गर्मी में गाभिन गाय-भैंसों का रखें ज्यादा ध्यान, एक्सपर्ट ने बताए आसान उपाय

गर्मी में गाभिन गाय-भैंसों का रखें ज्यादा ध्यान, एक्सपर्ट ने बताए आसान उपाय


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Khandwa News: पेट के कीड़ों की दवाई डॉक्टर की सलाह से देनी चाहिए. दूध देने वाले पशुओं के थनों की सफाई बहुत जरूरी होती है. दूध निकालने के बाद थनों को कीटाणुनाशक घोल में डुबाने से इंफेक्शन से बचाव होता है.

खंडवा. निमाड़ समेत पूरे मध्य प्रदेश में गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. इंसानों के साथ-साथ अब पशुओं पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है. ऐसे में अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो गाय-भैंस बीमार पड़ सकती हैं और पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. यही वजह है कि अब पशु चिकित्सक भी गर्मियों में खास सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. दरअसल गर्मी के मौसम में तापमान तेजी से बढ़ता है. लू चलती है और मौसम में लगातार बदलाव होता रहता है. इन सबका सीधा असर पशुओं पर पड़ता है, जिससे वे हीट स्ट्रेस में आ जाते हैं. इससे उनके दूध उत्पादन और सेहत दोनों पर दिखाई देता है. कई बार पशु उतना ही चारा खाते हैं लेकिन दूध कम देने लगते हैं, जिससे पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ता है.

खंडवा के पशु चिकित्सक हेमंत शाह के मुताबिक, गर्मियों में खासकर दोपहर का समय गाभिन पशुओं के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. इस दौरान उन्हें तेज धूप और गर्म हवा से बचाना जरूरी है. पशुओं के शेड में भी मौसम के हिसाब से बदलाव करना चाहिए ताकि अंदर ठंडक बनी रहे. साथ ही पीने के पानी और चारे का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए.

गाभिन पशुओं का रखें विशेष ध्यान
उन्होंने कहा कि गाभिन पशुओं को कब बाहर ले जाना है और कब शेड में रखना है, इसका समय तय करना बेहद जरूरी है. सुबह और शाम के समय ही पशुओं को बाहर निकालना चाहिए जबकि दोपहर में उन्हें छांव में ही रखना बेहतर होता है. खासतौर पर गर्भवती और पहले से बीमार पशुओं का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए. अगर देखभाल के जरूरी उपायों की बात करें, तो सबसे पहले पशुओं को साफ और ताजा पानी पिलाना चाहिए लेकिन बहुत ज्यादा ठंडा पानी देने से बचना चाहिए. इसके अलावा समय-समय पर खुरपका-मुंहपका जैसे रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण कराना जरूरी है.

पेट के कीड़ों की दवाई भी जरूरी
उन्होंने आगे कहा कि पेट के कीड़ों की दवाई भी डॉक्टर की सलाह से देनी चाहिए. दूध देने वाले पशुओं के लिए थनों की सफाई बेहद जरूरी होती है. दूध निकालने के बाद थनों को कीटाणुनाशक घोल में डुबाने से संक्रमण से बचाव होता है. वहीं पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए मिनरल मिक्चर भी दिया जा सकता है. गर्मी के दिनों में हरे चारे की कमी भी एक बड़ी समस्या होती है. ऐसे में गेहूं की कटाई के बाद ज्वार, मक्का और लोबिया की बुवाई करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इससे पशुओं को पौष्टिक आहार मिल सकता है.

अफरा से बचाव का देसी इलाज
उन्होंने कहा कि अगर किसी पशु को अफरा (पेट फूलना) जैसी समस्या हो जाए, तो घरेलू उपाय के तौर पर सरसों के तेल में थोड़ा तारपीन का तेल मिलाकर दिया जा सकता है लेकिन इसके लिए भी डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. ऐसे में अगर पशुपालक थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर देखभाल करें, तो न सिर्फ अपने पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं बल्कि दूध उत्पादन भी अच्छा बनाए रख सकते हैं क्योंकि गर्मी में लापरवाही सीधे नुकसान का कारण बन सकती है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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