शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में मल्टी पिटीशन: सुप्रीम कोर्ट में शासकीय शिक्षक संगठन की याचिका पर केस रजिस्टर्ड – Bhopal News

शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में मल्टी पिटीशन:  सुप्रीम कोर्ट में शासकीय शिक्षक संगठन की याचिका पर केस रजिस्टर्ड – Bhopal News




स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 2009 के पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों की पात्रता परीक्षा लिए जाने के आदेश के बाद शासकीय शिक्षक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में मल्टी पिटीशन दायर कर दी है। संगठन ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसके गंगेले को अधिवक्ता नियुक्त किया है जो शिक्षकों की पैरवी कर रहे हैं। याचिका पर केस कोर्ट में रजिस्टर कर लिया गया है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया कि मध्यप्रदेश से टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर पहली याचिका सुप्रीम कोर्ट में रजिस्टर हुई है। कौशल के अनुसार मध्यप्रदेश शासकीय शिक्षक संगठन के नर्मदापुरम संभाग के संभागीय अध्यक्ष राजेश पांडे द्वारा अपने साथियों की याचिका दायर की गई है। उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एसके गंगेले (मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश) द्वारा उच्चतम न्यायालय में दायर कराई गई याचिका केस नंबर 1385/2025 के रूप में रजिस्टर्ड हो चुकी है। इसका टाइटल अंजुमन इशात ई तालीम ट्रस्ट बनाम द स्टेट ऑफ महाराष्ट्र एंड अदर्स है। यह याचिका संचालक लोकशिक्षण भोपाल द्वारा सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा याने TET अनिवार्य करने के विरोध में दायर की गई है। याचिका में 2 मार्च को लोक शिक्षण भोपाल द्वारा टीईटी परीक्षा आदेश और 2009 आरटीई एक्ट से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से मुक्त रखने की मांग की गई है। राज्य अध्यापक संघ और ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन भी दायर कर रहा याचिका इस मामले में राज्य अध्यापक संघ और ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन भी सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर करने जा रहा है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग वकीलों से संवाद कर संगठनों की ओर से दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं। सबसे पहले शासकीय शिक्षक संगठन ने याचिका के लिए वकील तय किया था और इस संगठन की याचिका भी सबसे पहले लगी है। गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा विभाग के फैसले से डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों को परीक्षा देना पड़ेगी। यह परीक्षा उन सभी टीचर्स को देना होगी जिनका रिटायरमेंट पांच साल से अधिक समय का है।



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