बड़वानी जिले के राजपुर में दो बेटियां होने से नाराज एक पति ने अपनी पत्नी को ‘तीन तलाक’ दे दिया। पीड़िता ने अपने पति और सास पर बेटा न होने के कारण शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 के तहत मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। निकाह के बाद बेटियों के जन्म से शुरू हुई प्रताड़ना पीड़िता (21) का निकाह 8 जनवरी 2023 को राजपुर निवासी जाहिद पिता जाकिर मंसूरी से हुआ था। महिला ने बताया कि शादी के शुरुआती दिन अच्छे बीते, लेकिन 2024 में पहली बेटी के जन्म के बाद से ही पति और सास सब्बो उसे परेशान करने लगे। 2025 में दूसरी बेटी होने के बाद ससुराल वालों का व्यवहार और हिंसक हो गया। पति और सास को बेटा चाहिए था, जिसके चलते उसे आए दिन छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित किया जाने लगा। फोन पर बोला ‘तलाक-तलाक-तलाक’ विवाद बढ़ने पर महिला करीब 15 दिन पहले अपने मायके सिलावद चली गई थी। ईद के एक दिन बाद पति जाहिद ने उसे मोबाइल पर फोन कर तीन बार ‘तलाक’ बोला। जब महिला के पिता और परिजन जाहिद को समझाने राजपुर पहुंचे, तो वह आवेश में आ गया और उसने सबके सामने मौखिक रूप से फिर से ‘तलाक-तलाक-तलाक’ कहकर रिश्ता खत्म करने की घोषणा कर दी। इसके बाद पीड़िता ने बुधवार को परिजनों के साथ थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपी पति पर केस राजपुर थाना प्रभारी विक्रम सिंह बामनिया ने बताया कि पीड़िता की शिकायत और प्राथमिक जांच के आधार पर आरोपी जाहिद मंसूरी के विरुद्ध मुस्लिम महिला विवाह अधिनियम 2019 की धारा 4 के तहत अपराध क्रमांक दर्ज किया गया है। कानूनन ‘तीन तलाक’ देना गैरकानूनी है और इसमें सजा के साथ-साथ महिला को गुजारा भत्ता देने का भी प्रावधान है। पुलिस अब मामले में अन्य गवाहों के बयान दर्ज कर रही है। तीन तलाक पर सख्त है कानून उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद भारत सरकार ने 2019 में कड़ा कानून लागू किया था। इस कानून के तहत एक बार में तीन तलाक बोलना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें आरोपी पति को 3 साल तक की जेल हो सकती है। पीड़ित महिला को बच्चों की कस्टडी और जीवन निर्वाह के लिए गुजारा भत्ता मांगने का भी पूर्ण अधिकार है।
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