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उज्जैन एक बार फिर अपने प्राचीन गौरव और आधुनिक विज्ञान के संगम के साथ वैश्विक मंच पर उभरता नजर आ रहा है. जहां सिंहस्थ 2028 को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कई विकास कार्यों का भूमिपूजन किया है. वहीं महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम सम्मेलन में महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने की बात कही गई है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में किया विकास कार्यों का भूमिपूजन
उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी हिस्सा लिया. इसमें महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की अवधारणा पर भी ध्यान दिया गया. इस सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, विद्वान और छात्र भारतीय कालगणना, खगोल विज्ञान पर मंथन और चर्चा करेंगे. इसके अलावा सिंहस्थ 2028 के लिए भी प्रदेश सरकार ने अपनी तैयारी कर ली है, जहां मुख्यमंत्री ने कई विकासकार्यों का भूमिपूजन किया.
महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की बात आई सामने
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि उज्जैन वह स्थान है, जहां विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम दिखाई देता है. उन्होंने ‘ग्रीनविच मीन टाइम’ की जगह ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ की अवधारणा को आगे बढ़ाने की बात कही, जिससे भारत की वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक पहचान मिल सके.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कही ये बात
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन सदियों से समय गणना और खगोल विज्ञान का केंद्र रहा है. जहां काल की अवधारणा केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक आधार पर विकसित हुई. उन्होंने ‘सूर्य सिद्धांत’ जैसी प्राचीन परंपराओं का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली समय और अंतरिक्ष के गहरे संबंध को पहले ही समझ चुकी थी.
LIVE: तारामंडल परिसर, उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ का उद्घाटन समारोह https://t.co/3SwBktkKHb