गर्मी में सब्जियों पर ‘इल्ली और कुकरा’ का खतरा, इन उपायों से सुरक्षित होगी फसल

गर्मी में सब्जियों पर ‘इल्ली और कुकरा’ का खतरा, इन उपायों से सुरक्षित होगी फसल


होमताजा खबरकृषि

गर्मी में सब्जियों पर ‘इल्ली और कुकरा’ का खतरा, इन उपायों से सुरक्षित होगी फसल

Last Updated:

Agriculture News: पत्तियों में छेद, किनारों का कटा होना और फल की सतह पर खुरचन जैसे निशान इसके सामान्य लक्षण हैं. लगातार हमले से पौधे की बढ़वार रुक जाती है और फल टेढ़े-मेढ़े बनते हैं. समय पर निगरानी न हो, तो उत्पादन प्रभावित होता है.

शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी में गर्मी के मौसम में सब्जी की फसलों पर इल्ली और स्थानीय रूप से कहा जाने वाला कुकरा रोग तेजी से फैलता है. तेज तापमान और हवाएं कीटों की बढ़ोतरी को बढ़ाती हैं, जिससे पत्तियां कटी-फटी दिखती हैं, फूल झड़ने लगते हैं और फल लगना कम हो जाता है. यदि समय पर पहचान और छिड़काव न किया जाए, तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. ऐसे में किसान भाइयों को रोज खेत का निरीक्षण करना चाहिए. पत्तियों के नीचे अंडे, छोटी इल्ली, जाल जैसा जाला या छेद दिखे, तो तुरंत बचाव करना चाहिए. संतुलित सिंचाई, खेत की सफाई और प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण ही बड़े नुकसान से बचाता है.

गर्मी में बेल वाली सब्जियां जैसे- करेला, तुरई, लौकी, कद्दू वर्ग और खीरा सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. इन फसलों की कोमल पत्तियां और फूल इल्ली के लिए आसान आहार बनते हैं. पत्तियों में छेद, किनारों का कटा होना और फल की सतह पर खुरचन जैसे निशान इसके आम लक्षण हैं. लगातार हमले से पौधे की बढ़वार रुकती है और फल टेढ़े-मेढ़े बनते हैं. समय पर निगरानी न हो, तो उत्पादन तेजी से गिरता है.

इस तरह करें बचाव
शुरुआती अवस्था में हाथ से ही अंडे/इल्ली नष्ट करें. फेरोमोन ट्रैप और लाइट ट्रैप लगाएं. नीम आधारित घोल (नीम का तेल तीन से पांच मिली प्रति लीटर पानी में) का छिड़काव करें. प्रकोप बढ़ने पर अनुशंसित कीटनाशक का लेबल अनुसार छिड़काव करें और दवा बदल-बदलकर उपयोग करें ताकि प्रतिरोध न बने. सुबह या शाम छिड़काव करें ताकि घोल पत्तियों के नीचे तक पहुंच सके. खेत में खरपतवार हटाकर हवा का संचार बनाए रखें.

मल्चिंग से बनाए रखें नमी
अनुभवी किसान रोज सुबह-शाम फसल देखते हैं और शुरुआती लक्षण मिलते ही नियंत्रण शुरू कर देते हैं. वे मल्चिंग से नमी बनाए रखते हैं, ट्रैप लगाते हैं और नीम के घोल का नियमित उपयोग करते हैं. दवा का छिड़काव जरूरत के अनुसार करते हैं और अनावश्यक स्प्रे से बचते हैं. सिंचाई संतुलित रखते हुए खेत साफ रखते हैं, जिससे कीटों का ठिकाना कम हो और फसल स्वस्थ रहे.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



Source link