कौन सी ताजी, कौन सी बासी, किसमें केमिकल? जानें लौकी पहचानने का तारीका, ताकि न हो धोखा

कौन सी ताजी, कौन सी बासी, किसमें केमिकल? जानें लौकी पहचानने का तारीका, ताकि न हो धोखा


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Taji Lauki Kaise Pehchane: सब्जी मंडियों में इन दिनों लौकी की बिक्री चरम पर है, लेकिन बढ़ती मांग के साथ बाजार में लोकल और बाहरी लौकी का फर्क समझना चुनौती बन गया है. व्यापारी मानते हैं कि एक दिन पुरानी सप्लाई और केमिकल ट्रीटमेंट वाली सब्जियां पहचान में अलग दिखती हैं, इसलिए खरीदारी में सतर्कता बेहद जरूरी है.

Tips And Tricks: बढ़ती गर्मी के साथ मध्य प्रदेश के सतना और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद बाजारों में लौकी की मांग अचानक बढ़ने लगती है. गर्मी के मौसम में हल्की और पाचन में आसान सब्जी होने के कारण लोग इसे अपनी थाली में शामिल करना पसंद करते हैं. लेकिन, इस बढ़ती डिमांड के बीच बाजार में पारंपरिक खेती के साथ साथ केमिकल और हाइब्रिड तकनीकों से उगाई गई लौकी भी बड़ी मात्रा में पहुंच रही है. ऐसे में आम उपभोक्ताओं के लिए सही और सुरक्षित लौकी की पहचान करना बेहद जरूरी हो है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है.

कैसे पहचानें ताजी लौकी
विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी लौकी की पहचान उसके रंग, बनावट और ताजगी से आसानी से की जा सकती है. ताजी लौकी का रंग हल्का हरा होता है और उसका छिलका मुलायम महसूस होता है. इसके अलावा लौकी का डंठल भी ताजा और हरा होना चाहिए जो इस बात का संकेत देता है कि सब्जी हाल ही में तोड़ी गई है. वहीं, अगर लौकी बहुत ज्यादा चमकदार दिखे या उसका छिलका अत्यधिक सख्त हो तो ऐसी लौकी से बचना चाहिए. कई बार केमिकल या अधिक समय तक स्टोरेज के कारण भी लौकी की प्राकृतिक बनावट बदल जाती है जो सेहत के लिए ठीक नहीं होती.

कड़वी लौकी बन सकती है जानलेवा
लौकी खरीदते समय एक और महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखना चाहिए कि यदि कटने के बाद लौकी का स्वाद कड़वा लगे तो उसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. लोकल 18 से बातचीत में सब्जी मंडी अध्यक्ष रामदुलारे कुशवाहा ने बताया कि बाजार में आने वाली सब्जियों को देखकर ही काफी हद तक यह समझा जा सकता है कि वे लोकल हैं या बाहर से आई हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ जैसे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां अक्सर एक दिन की देरी से बाजार में पहुंचती हैं, जिससे उनकी ताजगी थोड़ी कम हो जाती है. इसके विपरीत सतना और आसपास के क्षेत्रों से आने वाली लौकी और अन्य सब्जियां ज्यादा ताजी होती हैं. स्थानीय सब्जियों में ऊपर का नेरुआ ताजा और टूटा हुआ दिखता है, जिससे उनकी पहचान आसान हो जाती है. इसके अलावा लोकल लौकी अपेक्षाकृत मुलायम होती है जबकि बाहर से आई लौकी में सख्ती महसूस होती है.

अन्य सब्जियों में भी दिखता है यही फर्क
यह अंतर केवल लौकी तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य सीजनल सब्जियों में भी साफ नजर आता है. जैसे कद्दू में बाहरी माल ज्यादा चमकदार दिखाई देता है, जबकि भिंडी में बाहर से आने वाली सब्जियां थोड़ी मुरझाई और हल्के रंग की दिखती हैं. वहीं स्थानीय भिंडी और बरबटी का रंग, आकार और ताजगी अलग ही पहचान देती है क्योंकि किसान इन्हें सीधे खेत से तोड़कर बाजार तक पहुंचाते हैं.

सावधानी ही बचाव का तरीका
ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे खरीदारी करते समय थोड़ी सतर्कता बरतें. केवल दिखावे या सस्ते दाम के लालच में आकर सब्जियां खरीदना नुकसानदायक हो सकता है. सही पहचान और समझदारी से की गई खरीदारी न सिर्फ स्वाद बेहतर बनाती है बल्कि सेहत को भी सुरक्षित रखती है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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