भोपाल में साइबर क्राइम ब्रांच ने बड़े फर्जी सिम रैकेट का खुलासा करते हुए दो पीओएस एजेंटों को मंगलवार गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने एक ही व्यक्ति के चेहरे का उपयोग कर करीब 246 फर्जी सिम कार्ड जारी किए। इन सिम कार्ड्स को अलग-अलग नाम और पतों पर एक्टिवेट किया गया, जिससे इनके साइबर अपराधों में इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। मामले का खुलासा “ऑपरेशन FACE” के तहत की गई कार्रवाई में हुआ, जो फर्जी सिम नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए चलाया जा रहा है। फर्जी दस्तावेजों से सिम एक्टिवेशन का खेल जांच में सामने आया कि आरोपी ग्राहकों के आईडी प्रूफ की फोटोकॉपी अपने पास रख लेते थे और उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग नामों से सिम जारी करते थे। एक ही व्यक्ति की फोटो लगाकर करीब 250 सिम एक्टिवेट की गईं। आरोपियों ने यह काम कमीशन और कंपनी के इंसेंटिव के लालच में किया। साइबर क्राइम के मुताबिक, 2023 में दूरसंचार विभाग द्वारा एआई आधारित फेसियल रिकग्निशन टूल के जरिए ऐसे संदिग्ध कनेक्शनों की पहचान की गई थी, जिनमें एक ही चेहरे पर 50 से अधिक सिम सक्रिय पाए गए। इसी इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए भोपाल में यह गिरफ्तारी की गई। AI से खुली पोल एआई तकनीक ने फर्जी सिम एक्टिवेशन के बड़े नेटवर्क की पोल खोल दी। इस कार्रवाई की शुरुआत दूरसंचार विभाग (DOT) द्वारा 2023 में एआई (Artificial Intelligence) आधारित फेसियल रिकग्निशन टूल (ASTR) के जरिए संदिग्ध मोबाइल सिम धारकों का डाटा उपलब्ध कराए जाने से हुई। इस डाटा में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें एक ही व्यक्ति के चेहरे का उपयोग कर अलग-अलग नाम और पतों पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड एक्टिव पाए गए। इसी इनपुट के आधार पर भोपाल में सक्रिय फर्जी सिम रैकेट का खुलासा हुआ। साइबर क्राइम ब्रांच ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए जांच आगे बढ़ाई और एक ही चेहरे पर सैकड़ों सिम जारी करने के इस संगठित खेल का पर्दाफाश किया। तकनीकी विश्लेषण से पकड़े गए आरोपी पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और डेटा एनालिसिस के आधार पर जहांगीराबाद निवासी देवेंद्र यादव और इतवारा क्षेत्र निवासी सैफ कुरैशी को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए गए हैं। दोनों आरोपी पीओएस एजेंट के रूप में काम करते थे और सिम बेचने के बदले मिलने वाले इनाम के लालच में इस अवैध गतिविधि में शामिल हुए। अन्य साथियों की तलाश जारी
पूछताछ में आरोपियों ने अपने एक साथी के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने की बात कबूल की है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन फर्जी सिम कार्ड्स का उपयोग किन-किन साइबर अपराधों में किया गया। ऐसे रखें सावधानी पुलिस ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सिम जारी कराते समय यदि विक्रेता बार-बार प्रक्रिया दोहराने को कहे तो सावधान रहें। अपने आधार कार्ड पर जारी सिम की संख्या की जानकारी दूरसंचार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से ली जा सकती है। साइबर अपराध की किसी भी घटना की सूचना तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या भोपाल साइबर क्राइम के नंबर 9479990636 पर दी जा सकती है।
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