खिड़कियां टूटी, दीवारों में दरारें, 2.21 करोड़ खर्च कर बनाया छात्रावास, फिर भी 9 साल से बं

खिड़कियां टूटी, दीवारों में दरारें, 2.21 करोड़ खर्च कर बनाया छात्रावास, फिर भी 9 साल से बं


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मध्य प्रदेश के सागर स्थित संभागीय शासकीय आईटीआई में 2 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से बना 60 सीटर बालिका छात्रावास 9 साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया है. 2017 में लोकार्पण के बावजूद यह भवन आज जर्जर हालत में खंडहर बन चुका है.

सागर. सागर संभागीय आईटीआई यानी कौशल प्रशिक्षण केंद्र में लगभग 900 स्टूडेंट पढ़ाई कर रहे हैं. 10 से अधिक ट्रेडों में यहां पर पढ़ाई करवाई जाती है, जिनमें से सैकड़ों विद्यार्थी दूसरे जिलों से या ग्रामीण क्षेत्र से अध्ययन करने के लिए आते हैं. ऐसे स्टूडेंटों को किसी भी तरह की कोई परेशानी ना हो इसके लिए सरकार के द्वारा हॉस्टल बनाए गए, लेकिन इन्हीं में से एक 60 सीटर बालिका छात्रावास का लोकार्पण होने के 9 साल बाद भी ताला नहीं खुल पाया है.

आईटीआई परिसर में बनाई गई इस हॉस्टल की बिल्डिंग इतनी जर्जर हो गई है कि ऐसा लगता है अगर किसी दिन तूफानी हवाएं चल गई तो यह है धड़ाम से गिर भी सकती है. बाउंड्री वॉल बुरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. खिड़कियां टूट गई हैं. ऊपरी छत से मालवा टपकने लगा है. बाहर से ही देखने पर इसमें बड़ी-बड़ी दरार दिखाई दे रही हैं. कुल मिलाकर इस बिल्डिंग को घटिया सामग्री और गुणवत्ता विहीन बनाया गया लेकिन उस समय के जो जिम्मेदार अधिकारी इंजीनियर थे उन्होंने आंख मूंद कर संबंधित कंपनी ने भरोसा किया, और इसके बाद इस बिल्डिंग का तत्कालीन राज्य मंत्री दीपक जोशी से लोकार्पण भी करवा दिया था, लेकिन लोकार्पण होने के बाद भी यह छात्रावास कभी शुरू नहीं हो पाया.

2 करोड़ 21 लाख की लागत से बना छात्रावास
बता दें कि सागर की खुरई रोड पर स्थित संभागीय शासकीय आईटीआई है, जहां 2 करोड़ 21 लाख की लागत से बालिका छात्रावास का भवन बनवाया गया था. जहां 60 छात्राओं को रहने की सुविधा मिलती 22 अगस्त 2017 को इस छात्रावास का लोकार्पण हुआ, लेकिन ताला आज भी नहीं खुल पाया है और जिन छात्राओं के लिए यह हॉस्टल बनाया गया था वे छात्राएं आज भी या तो किराए के कमरे में रहकर अध्ययन करने को मजबूर है या फिर उन्हें बसों में धक्के खाकर ग्रामीण क्षेत्र से अप डाउन करना पड़ रहा है.

आईटीआई से जो जानकारी मिली उसमें बताया गया कि वर्तमान समय में 900 में से 350 छात्राएं हैं, इनके लिए हॉस्टल नहीं होने की वजह से कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. और बड़ी बात तो यह है कि पिछले 9 साल में ना तो उस ठेकेदार पर कोई कार्रवाई की गई, और ना ही वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इसका कोई इंतजाम किया गया.  हालांकि जर्जर बिल्डिंग को लेकर आईटीआई के प्राचार्य अमरनाथ साकेत के द्वारा पिछले 1 साल से लगातार शासन को पत्राचार किया जा रहा है ताकि इसका मेंटेनेंस किया जा सके, लेकिन इसकी हालत को देखकर छात्राएं इसमें रहना ही नहीं चाहती हैं.

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Dallu Slathia

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें



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