रायसेन में बुधवार को अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एडीएम को सौंपा। इससे पहले शिक्षकों ने धरना दिया और शाम को कलेक्ट्रेट तक करीब तीन किलोमीटर लंबी वाहन रैली भी निकाली। मोर्चा की प्रमुख मांगों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करना और सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करना शामिल है। संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सक्सेना ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा सभी नॉन-TET शिक्षकों को TET पास करने के निर्देश दिए गए हैं, जो अनुचित हैं। NCTE की अधिसूचना का दिया हवाला
मोर्चा ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 10 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुसार कुछ श्रेणियों के शिक्षकों को TET से छूट प्राप्त है। इसमें 3 सितंबर 2001 के बाद नियुक्त संविदा शाला शिक्षक, 3 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षाकर्मी व संविदा शिक्षक, तथा वर्ष 2011 से 2014 के बीच गुरुजी से संविदा शिक्षक बने शिक्षक शामिल हैं। इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का भी हवाला दिया गया। आदेश निरस्त करने की मांग
शिक्षकों का कहना है कि सभी सेवारत नॉन-TET शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य करना NCTE की अधिसूचना और न्यायालय के निर्णय के विपरीत है। उन्होंने लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा 2 मार्च 2026 और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 26 मार्च 2026 को जारी आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग की। डेढ़ लाख शिक्षकों को राहत देने की मांग
मोर्चा ने प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त कर उन्हें मानसिक तनाव से राहत देने की मांग की। इसके अलावा नवीन शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों ने सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि इससे पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण और पदोन्नति जैसे लाभ मिल सकेंगे। बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद
इस प्रदर्शन में संरक्षक उम्मेद सिंह ठाकुर, जिलाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सक्सेना, सचिव हरिराम विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष सीताराम रायकवार, कोषाध्यक्ष एल.एन. प्रधान, महामंत्री रघुवीर भदौरिया और सदस्य राजकुमार खत्री सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
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