Explainer: केन बेतवा लिंक परियोजना का विरोध क्यों? आसान तरीके से जानें मामला

Explainer: केन बेतवा लिंक परियोजना का विरोध क्यों? आसान तरीके से जानें मामला


छतरपुर. मध्य प्रदेश के छतरपुर में गुरुवार को केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. मुआवजे में गड़बड़ी को लेकर आंदोलन चल रहा है. आंदोलन उस समय उग्र हो गया, जब प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने की कोशिश की. दरअसल प्रदर्शनकारियों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया. उन्होंने नदी किनारे प्रतीकात्मक चिताएं बनाईं और उनपर लेटकर जल सत्याग्रह किया. प्रदर्शनकारियों के ‘चिता आंदोलन’ के दौरान स्थिति बिगड़ गई. प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण, आदिवासी और किसानों और महिलाओं ने प्रशासन का विरोध करना शुरू कर दिया. बताया जा रहा है कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर लोगों का राशन-पानी रोकने की कोशिश की, जिससे वे नाराज हो गए. इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं प्रशासन के खिलाफ एकजुट हो गए और विरोध तेज हो गया. हालात बिगड़ते ही प्रशासन को पीछे हटना पड़ा. इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस और प्रशासनिक अफसर वहां से जाते हुए दिखाई दे रहे हैं.

सवाल- केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कहां हो रहा है?
जवाब- पन्ना और छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध हो रहा है.

सवाल- केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध क्यों हो रहा है?
जवाब- छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावितों को वितरित की गई मुआवजा राशि में विसंगतियां सामने आई हैं. इसको लेकर पीड़ितों और प्रशासन के बीच संग्राम छिड़ा हुआ है.

सवाल- परियोजना का विरोध कब से रहा है?
जवाब- परियोजना का विरोध करीब चार साल से हो रहा है.

सवाल- आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है?
जवाब- आंदोलन का नेतृत्व किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर कर रहे हैं.

सवाल- आंदोलनकारियों की मांग क्या है?
जवाब- आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि आदिवासियों के हक की यह लड़ाई अब ‘जन संघर्ष’ बन चुकी है. उन्होंने साफ किया कि अगर आंदोलन को कुचलने या दमन करने की कोशिश की गई, तो इसके परिणाम और भी ज्यादा उग्र होंगे. जब तक विस्थापितों को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, यह चिता आंदोलन नहीं थमेगा. नदी हमारी और मनमानी तुम्हारी नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि पन्ना और छतरपुर के ग्रामीण अब एकजुट हो चुके हैं. यह लड़ाई केवल मुआवजे तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि जल, जंगल और जमीन बचाने का बड़ा संघर्ष बन चुकी है.

सवाल- दिल्ली क्यों जा रहे थे आदिवासी किसान?
जवाब- गुरुवार को करीब 5000 आदिवासी किसान मुआवजे में गड़बड़ी की शिकायत को लेकर दिल्ली जाने के लिए निकले थे. छतरपुर प्रशासन ने उन्हें रोक दिया. किसानों का आरोप है कि उनके वाहनों को जब्त किया गया और चालान किया गया. जिसके बाद आक्रोशित किसान निर्माणाधीन बांध स्थल पहुंचे और काम को पूरी तरह ठप कर दिया. परियोजना का निर्माण कार्य ठप पड़ा है, जिससे निर्माण कंपनी को लाखों का नुकसान हुआ है.

सवाल- परियोजना के लिए कितने गांवों का विस्थापन प्रस्तावित है?
जवाब- केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत 24 गांवों का विस्थापन प्रस्तावित है. इनमें से 8 गांव डूब क्षेत्र में आते हैं, जहां सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है जबकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 16 गांव शामिल किए जा रहे हैं.

किसान नेता अमित भटनागर ने कहा कि प्रशासन की तानाशाही, मनमानी, गुंडागर्दी, भ्रष्टाचार के खिलाफ पन्ना और छतरपुर जिले के हजारों किसान और महिलाएं अर्थी पर लेटने के लिए मजबूर हैं. हम चार साल से ज्ञापन दे रहे हैं. हमसे जल, जंगल और जमीन छीनी जा रही है. बिना मुआवजा दिए घर तोड़े जा रहे हैं, जमीन छीनी जा रही है. लोग सुसाइड कर रहे हैं. हम लोगों ने खून से प्रधानमंत्री को पत्र लिखा, जल सत्याग्रह किया, प्रदर्शन किया, सांकेतिक फांसी लगाई लेकिन चार साल से हमारी आवाज कहीं नहीं सुनी गई. हम लोगों पर फर्जी मुकदमे लगा दिए जाते हैं. पन्ना के साथ-साथ छतरपुर जिले में भी धारा 144 लगा दी गई. हम लोग दिल्ली जा रहे थे, हमें दिल्ली नहीं जाने दिया. हमारा सरकार से अब साफ कहना है कि या तो हमें न्याय दो या फिर हमारी जान ले लो.



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