भोपाल से उड़ा गिद्ध पहुंचा पाकिस्तान, GPS सिग्नल कटे तो वन विभाग को टेंशन, फिर

भोपाल से उड़ा गिद्ध पहुंचा पाकिस्तान, GPS सिग्नल कटे तो वन विभाग को टेंशन, फिर


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भोपाल के वन विहार से रिहा की गई मादा गिद्ध उड़कर पाकिस्तान पहुंच गई. भीषण तूफान के कारण वह घायल हो गई थी, जिसे अब पाकिस्तान वन विभाग और WWF की मदद से सुरक्षित बचा लिया गया है.

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वन्यजीवों के लिए सरहदे कोई मायने नहीं रखतीं, लेकिन जब उनकी जान पर बन आए तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग एक मिसाल बन जाता है. मध्यप्रदेश के वन विभाग ने तकनीक और विदेशी समन्वय के जरिए एक ऐसी ही बेजुबान जान को बचाने में कामयाबी हासिल की है. भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क से जिस मादा सिनेरेयस गिद्ध को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद आसमान में रिहा किया गया था, वह अब पाकिस्तान की धरती पर सुरक्षित है. इस मादा गिद्ध का सफर इसी साल 22 जनवरी को शुरू हुआ था, जब इसे शाजापुर के सुसनेर इलाके से गंभीर रूप से घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया था. इसके बाद इसे भोपाल के वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (VCBC) में लाया गया, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में इसका लंबा इलाज चला.

इलाज के बाद जब एक्सपर्ट्स ने इसे ‘फिट फॉर रिलीज’ घोषित किया, तो इसकी निगरानी के लिए आधुनिक GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस और माइक्रोचिप लगाई गई. 25 मार्च को इसे रायसेन के हलाली डैम क्षेत्र से आजाद किया गया, ताकि इसके प्रवासन और व्यवहार का अध्ययन किया जा सके. यह प्रोजेक्ट WWF-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा था. रिहाई के बाद इस गिद्ध की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही थी. डेटा से पता चला कि यह पक्षी राजस्थान की सीमा को पार करते हुए पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गया है. 6 अप्रैल तक वह पाकिस्तान के आसमान में था, लेकिन 7 अप्रैल को अचानक जीपीएस सिग्नल मिलने बंद हो गए. इससे भारतीय वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई. WWF-इंडिया ने बिना समय गंवाए WWF-पाकिस्तान से संपर्क साधा और संभावित लोकेशन शेयर की.

जांच में पता चला कि पाकिस्तान के खानेवाल और मुल्तान क्षेत्र में आए भीषण ओलावृष्टि और तूफान के कारण यह गिद्ध उड़ान भरने में असमर्थ हो गया था और जमीन पर गिर गया था. पाकिस्तान के स्थानीय निवासियों ने इस गिद्ध को देखा और वहां के वन विभाग को सूचित किया. पाकिस्तानी अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए इसे रेस्क्यू किया और प्राथमिक उपचार दिया. फिलहाल इसे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में शिफ्ट किया गया है, जहां यह पूरी तरह स्वस्थ हो रहा है. यह गिद्ध अब दोनों देशों के बीच वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक सेतु बन गया है. मध्यप्रदेश वन विभाग के अधिकारियों ने इस सफल अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सराहना की है, जो यह दर्शाता है कि मानवता और संरक्षण की भावना किसी भी सीमा से ऊपर है. इस घटना ने यह भी साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक के जरिए हम संकट में फंसे वन्यजीवों की जान सात समंदर पार भी बचा सकते हैं.

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Niranjan Dubey

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर के तौर कार्यरत. इंटरनेशनल, वेब स्टोरी, ऑफबीट, रिजनल सिनेमा के इंचार्ज. डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय. नेटवर्क 18 के अलावा टाइम्स ग्रुप, …और पढ़ें



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