भूरी मोटे दाने वाली फली बनी खतरा! भेड़-बकरियों को सांस की तकलीफ, जान का खतरा

भूरी मोटे दाने वाली फली बनी खतरा! भेड़-बकरियों को सांस की तकलीफ, जान का खतरा


Last Updated:

Animal Husbandry Tips: पशुपालकों को रेवझा पेड़ की पहचान कर लेनी चाहिए. चराई के दौरान पशुओं को इसके आसपास भी न जाने दें. चरने से पहले पशुओं को घर पर ही थोड़ा चारा खिला दें ताकि वे सूखी फलियां कम खाएं.

शिवपुरी. गर्मी में जंगल चराई के दौरान रेवझा नाम से पहचानी जाने वालीं बबूल की सूखी फलियां भेड़-बकरियों के लिए खतरनाक साबित हो रही हैं. इन्हें खाने के बाद पशुओं में सांस लेने में दिक्कत, घबराहट, कमजोरी और मुंह से झाग जैसे लक्षण दिखते हैं. मध्य प्रदेश के शिवपुरी के पशु चिकित्सक डॉ गिर्राज शाक्य सलाह देते हैं कि ऐसे संकेत मिलते ही तुरंत इलाज कराएं. ग्रामीण पशुपालक गुड्डा प्रजापति लोकल 18 को बताते हैं कि गांव में प्राथमिक राहत के लिए मट्ठा (छाछ) और पानी दिया जाता है, पर यह अस्थायी उपाय है. चराई के समय पशुओं को सूखी फलियों से दूर रखना ही सबसे बड़ा बचाव है.

गर्मी बढ़ते ही जंगलों में हरे चारे की कमी हो जाती है. भूख में भेड़-बकरियां जमीन पर गिरी फलियां खा लेती हैं, जो बाद में परेशानी का कारण बनती हैं. फलियां खाने के कुछ समय बाद पशु सुस्त पड़ जाता है, बार-बार बैठता है और सांस फूलने लगती है. समय पर उपचार न मिले तो हालत गंभीर हो सकती है. डॉ गिर्राज शाक्य के मुताबिक, इन फलियों के तत्व पाचन और श्वसन तंत्र पर प्रतिकूल असर डालते हैं, इसलिए देरी करना जोखिम भरा है.

बचाव और प्राथमिक राहत
पशुपालकों को रेवझा पेड़ की पहचान कर लेनी चाहिए. चराई के दौरान पशुओं को इसके आसपास न जाने दें. चराई से पहले घर पर थोड़ा चारा खिला दें ताकि पशु सूखी फलियां कम खाएं. यदि लक्षण दिखें, तो प्राथमिक राहत के तौर पर मट्ठा और बार-बार पानी दिया जा सकता है, जैसा कि गुड्डा प्रजापति बताते हैं लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना देर करना ठीक नहीं. तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय पहुंचना ही सुरक्षित कदम है.

पशु चिकित्सा हेल्पलाइन नंबर पर करें कॉल
यदि भेड़-बकरी में सांस फूलना, सुस्ती, मुंह से झाग आना या चारा छोड़ देना जैसे लक्षण दिखें, तो देर न करें. तुरंत पशु चिकित्सा सहायता लें. मध्य प्रदेश में टोल फ्री पशुपालन विभाग, मध्य प्रदेश शासन हेल्पलाइन नंबर 1962 (पशु एम्बुलेंस/मोबाइल वेटनरी यूनिट) पर कॉल करें. आप पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-180-5141 पर भी सलाह ले सकते हैं. फोन करते समय गांव का नाम, दिख रहे लक्षण और पशुओं की संख्या साफ-साफ बताएं ताकि टीम जल्दी पहुंचे. नजदीकी पशु चिकित्सालय का नंबर पहले से लिखकर रखें. आपात स्थिति में यही तत्परता पशु की जान बचाती है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



Source link