आदिवासियों का देसी चिमरी शरबत, 5 मिनट में तैयार, चावल के साथ भी देता लाजवाब स्वाद

आदिवासियों का देसी चिमरी शरबत, 5 मिनट में तैयार, चावल के साथ भी देता लाजवाब स्वाद


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शिवपुरी गर्मी के सीजन में आदिवासी संस्कृति में कई ऐसे देसी पेय और व्यंजन प्रचलित हैं, जो न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं बल्कि शरीर को ठंडक भी पहुंचाते हैं. इन्हीं में से एक है खरबूजे, जिसे कई इलाकों में “चिमरी” भी कहा जाता है.. यह शरबत इतनी सरल विधि से बनता है कि मात्र 5 मिनट में तैयार हो जाता है.

शिवपुरी गर्मी के सीजन में आदिवासी संस्कृति में कई ऐसे देसी पेय और व्यंजन प्रचलित हैं, जो न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं बल्कि शरीर को ठंडक भी पहुंचाते हैं. इन्हीं में से एक है खरबूजे, जिसे कई इलाकों में “चिमरी” भी कहा जाता है, से बनाया जाने वाला देसी शरबत. यह शरबत इतनी सरल विधि से बनता है कि मात्र 5 मिनट में तैयार हो जाता है. ग्रामीण अंचलों में इसका महत्व इतना अधिक है कि लोग इसे केवल पीते ही नहीं, बल्कि चावल के साथ भी बड़े चाव से खाते हैं.

यह परंपरा वर्षों से आदिवासी समाज में चली आ रही है. जब भी तेज धूप और लू का मौसम होता है, तब घरों में ठंडक देने वाले प्राकृतिक पेयों का उपयोग बढ़ जाता है. खरबूजे का यह शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और प्यास को तुरंत शांत करता है.

5 मिनट में बनकर तैयार
इस शरबत को बनाने की विधि बेहद आसान है. सबसे पहले एक पका हुआ खरबूजा लीजिए. उसे दो भागों में काट लीजिए. इसके बाद उसके अंदर मौजूद बीजों को निकाल दें. बीज निकालने के बाद चम्मच की सहायता से खरबूजे का गूदा बाहर निकाल लें. यह प्रक्रिया बहुत ही आसान होती है और इसमें ज्यादा समय नहीं लगता. अब इस निकाले गए गूदे को एक बर्तन में डालकर उसमें थोड़ा ठंडा पानी मिलाएं. चम्मच या हाथ से इसे अच्छी तरह घोल लें. कुछ ही क्षणों में गूदा पानी में घुलकर शरबत का रूप ले लेता है. यदि खरबूजा कम मीठा है तो स्वादानुसार थोड़ी चीनी भी मिला सकते हैं. इससे शरबत का स्वाद और भी बढ़ जाता है.

स्वाद ऐसा कि चावल के साथ भी खाया जाता
इस शरबत की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण अंचलों में लोग इसे केवल पेय के रूप में नहीं लेते, बल्कि पके हुए चावल के साथ भी खाते हैं. गर्मी के मौसम में जब भूख कम लगती है, तब चावल के साथ यह मीठा, ठंडा शरबत मिलाकर खाने से स्वाद भी बढ़ता है और पेट भी हल्का रहता है. यह आदिवासी परंपरा आज भी कई गांवों में देखने को मिलती है.

शरीर को देता है प्राकृतिक ठंडक
खरबूजा स्वभाव से ठंडा होता है. इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। लू और गर्मी से बचाव के लिए यह शरबत बेहद लाभदायक माना जाता है. इसके साथ ही, यह पूरी तरह प्राकृतिक है, जिसमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम तत्व नहीं होता है.

परंपरा और स्वाद का अनोखा मेल
आदिवासी समाज में प्रकृति के साथ जुड़ाव हमेशा से रहा है. यही कारण है कि उनके खान-पान में ऐसे प्राकृतिक और मौसमी पदार्थ शामिल होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए भी अच्छे होते हैं. खरबूजे का यह शरबत उसी परंपरा का एक जीवंत उदाहरण है। सिर्फ 5 मिनट में तैयार होने वाला यह देसी शरबत स्वाद, स्वास्थ्य और परंपरा—तीनों का अनोखा संगम है. गर्मी के मौसम में इसे एक बार जरूर आजमाएं, और चाहें तो आदिवासी अंदाज में चावल के साथ इसका स्वाद लें.



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