बालाघाट में निर्माणाधीन भटेरा रेलवे ओवरब्रिज के लिए किए गए भू-अर्जन के मुआवजे को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रभावित रहवासियों और व्यापारियों ने प्रशासन पर मुआवजा वितरण में विसंगति और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। बुधवार को बड़ी संख्या में प्रभावित लोग एसडीएम कार्यालय पहुंचे और निष्पक्ष मुआवजे की मांग को लेकर ज्ञापन दिया। वार्डों के बीच भेदभाव का आरोप प्रभावित नागरिकों का आरोप है कि नगरीय क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 10 और 11 में अधिग्रहित की गई भूमि और भवनों के मुआवजे में असमानता बरती जा रही है। रहवासियों ने बताया कि एक ही क्षेत्र होने के बावजूद कुछ लोगों को अधिक और कुछ को कम दर पर मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि सभी प्रभावितों को समान दृष्टिकोण से देखते हुए नियमानुसार भुगतान किया जाए। ‘सांत्वना राशि’ को लेकर कानूनी सवाल अधिवक्ता प्रभु एस. बुढ्ढेकर ने प्रशासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुआवजा पत्र में स्पष्टता का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में नियमानुसार दी जाने वाली दोगुनी राशि और ‘सालिसियम’ (सांत्वना राशि) के विवरण को छिपाया जा रहा है। साथ ही, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को व्यावसायिक दर के बजाय कम दरों पर मुआवजा देने की बात भी सामने आई है। एसडीएम ने आरोपों को बताया निराधार दूसरी ओर, एसडीएम गोपाल सोनी ने भेदभाव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुआवजा वितरण पूरी तरह पारदर्शी है और सभी को कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर ही राशि आवंटित की जा रही है। प्रशासन के अनुसार, कुल 206 प्रभावितों को 24.34 करोड़ रुपए की राशि वितरित करने की प्रक्रिया जारी है। अक्टूबर 2026 तक पूरा होना है कार्य भटेरा ओवरब्रिज की कुल लागत 38 करोड़ रुपये है और इसकी लंबाई 1313 मीटर है। इस पुल में कुल 42 पिलर बनने हैं। हालांकि, मुआवजे को लेकर चल रहे विवाद और प्रशासनिक गति को देखते हुए इसके अक्टूबर 2026 की समय-सीमा में पूरा होने पर संशय हैं। भू-मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी विसंगतियां दूर नहीं की गईं, तो वे आगामी कदम उठाने को बाध्य होंगे।
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