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रीवा अपने ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य और शांति के लिए प्रसिद्ध है. इस विंध्य क्षेत्र पर प्रकृति का वरदान है. यहां झील तालाब, किले महल, पहाड़, खनिज वन संपदा सर भरपूर है. इस प्रदेश में किले और महलों की भरमार है, जो भारत में ही नहीं बल्कि विश्व प्रसिद्ध हैं. रीवा के किले भी मशहूर हैं.
रीवा अपने ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य और शांति के लिए प्रसिद्ध है. इस विंध्य क्षेत्र पर प्रकृति का वरदान है. यहां झील तालाब, किले महल, पहाड़, खनिज वन संपदा सर भरपूर है. इस प्रदेश में किले और महलों की भरमार है, जो भारत में ही नहीं बल्कि विश्व प्रसिद्ध हैं. रीवा के किले भी मशहूर हैं. ऐतिहासिक महत्व रखने वाले रीवा में आज सैर करते हैं यहां के 4 किलों की.
रीवा में कई ऐतिहासिक किले हैं. इनमें सबसे ज्यादा भव्य रीवा शहर के उपरहटी में स्थित किला है. उसके बाद गोविंदगढ़, क्योटी और नई गढ़ी का किला भी अपनी विशालता के साथ-साथ विशेष नक्काशी की वजह से पहचाने जाते हैं. इन किलों को देखने के लिए आज भी दूर-दूर से पर्यटक आते हैं.
रीवा में उपरहटी स्थित ऐतिहासिक किला यहां का प्रमुख पर्यटन स्थल है. दो नदियों के संगम के किनारे बना ये किला अपने आप में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ इतिहाल को समेटे हुए है. किले का मुख्य द्वार भारतीय वास्तुकला का उदाहरण है. यहां पर्यटकों के लिए आवास भी हैं. साथ में यहां रेस्टोरेंट भी है, जहां राजघाट में नदी के दृश्य के साथ जायके का आनंद लिया जा सकता है. इस जगह पर शाही चांदी का सिंहासन, अद्भुत संग्रहालय, हॉल का झूमर, हथियार के अलावा भी बहुत कुछ खास है.
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प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े तालाब के किनारे गोविंदगढ़ पैलेस है. इसे गोविंदगढ़ किले के नाम से भी जाना जाता है. गोविंदगढ़ किला 1853 में रीवा और गोविंदगढ़ के शासक राजा रघुराज सिंह ने बनावाया था. इस महल का इतिहास गोविंदगढ़ झील के तट पर शाही निवास के रूप में है. इसी किले में दुनिया के पहले सफेद बाघ मोहन को रखा गया था. आज किले का कुछ भाग फाइव स्टार होटल में बदल चुका है.
गोविंदगढ़ का किला प्रकृति की गोद में बसा हुआ है, जो लगभग 170 साल पहले, वर्ष 1855 में, रीवा रियासत के महाराजा विश्वनाथ सिंह जूदेव द्वारा रीवा स्टेट की राजधानी से लगभग 20 किलोमीटर दूर गोविंदगढ़ में बनवाया गया था. यह किला 850 एकड़ के क्षेत्र में फैले एक बड़े तालाब के पास स्थित है. इस तालाब के बारे में कहा जाता है कि यह मानव निर्मित है.
रीवा मुख्यालय से तकरीबन 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित क्योटी का किला अपने आप में अनोखा है. महाना नदी के तट पर स्थित क्योटी वाटरफॉल के पास बने इस किले को देखने के लिए आज भी पर्यटक दूर-दूर से आते हैं. क्योटी का इतिहास रीवा के 18वें राजा वीर सिंह देव से शुरू हुआ था. यह स्थान कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है. इतिहासकार असद खान ने बताया कि इसी स्थान पर वर्ष 1857 में ठाकुर रणमत सिंह और ब्रिटिश कर्नल असवान के बीच भीषण युद्ध हुआ था. आज यह जगह पर्यटकों की पसंद है.
क्योटी जलप्रपात और ऐतिहासिक किला इन दिनों विंध्य क्षेत्र के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में शुमार हो चुके हैं. वीकेंड पर यहां न सिर्फ रीवा, सतना और सीधी से बल्कि प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से भी पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है. प्राकृतिक सौंदर्य, राजघराने के इतिहास से जुड़ा किला, पौराणिक महत्व और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे रील्स सब मिलकर क्योटी को ऐसा डेस्टिनेशन बना रहे हैं जहां पहुंचने से सैलानी खुद को रोक ही नहीं पाते हैं.
रीवा से तकरीबन 60 किलोमीटर की दूरी पर नई गढ़ी में भी एक किला है. यह स्थान भी पर्यटकों को बेहद पसंद है. इस क्षेत्र में राजपूतों के सेंगर वंश का शासन रहा. इतिहासकार असद खान ने बताया कि सेंगर वंश के राजा छत्रधारी सिंह ने इस स्थान को बसाया था. यह स्थान मऊगंज के बेहद नजदीक है.
मऊगंज को पहले ‘मऊ राज’ भी कहा जाता था. आज मऊगंज मध्य प्रदेश का नया जिला बन चुका है. मऊगंज अंतर्गत बहुती जलप्रपात और देवतालाब के ऐतिहासिक शिव मंदिर के बाद नई गढ़ी का यह किला प्रमुख पर्यटन स्थल है.<br />इन सभी पर्यटक स्थल पहुंचने के लिए आपको रीवा रेलमार्ग और हवाई मार्ग दोनों की सुविधा उपलब्ध है.