दूर से खींचती है मालपुआ की खुशबू, रबड़ी के साथ खाने पर मुंह में जाते ही गायब

दूर से खींचती है मालपुआ की खुशबू, रबड़ी के साथ खाने पर मुंह में जाते ही गायब


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इंदौर में सराफा बाजार में मालपुआ की एक ऐसी दुकान है, जो दशकों पुरानी है और यहां पर मालपुआ की खुशबू दूर से ही आपको खींच लेती है. मालपुआ को रबड़ी, मावे और दूध के घोल के साथ बनाया जाता है. फिर इसे जलेबी वाली कढ़ाई में पकाया जाता है. बाद में रबड़ी के साथ खाने पर इसमें गजब का स्वाद आता है.

शाम ढलते ही इंदौर का सराफा बाजार का नजारा बिल्कुल बदल जाता है. यहां पर अचानक से खाने की प्लेट्स सज जाती है. माहौल खूशबुदार और लजीज हो जाता है. यहां कई दशकों पुरानी दुकानें हैं, जो पारंपरिक व्यंजन बेच रही हैं. ऐसे ही कुछ दुकानों पर इंदौर का अपना मावे वाला मालपुआ मिलता है, जो आपके यहां से गुजरते ही अपनी और खींच लेता है. ‌

ऐसी एक दुकान है पराग गुप्ता की, जो उनके पिता ने 40 साल पहले शुरू की थी. वह बताते हैं कि मालपुआ और रबड़ी का मिश्रण सराफा बाजार की पहचान बन चुका है. कई लोग केवल मालपुआ खाना पसंद करते हैं, लेकिन जैसे ही इसमें रबड़ी मिलाई जाती है. एक अलग ही स्वाद बन जाता है. देखा जाए तो रबड़ी की यही खासियत है. इसको जिसके साथ भी मिश्रित किया जाता है. उसका स्वाद दोगुना कर देती है.

मुंह में जाते ही घुल जाता है मालपुआ
मालपुआ के लिए रबड़ी, मावे और दूध का घोल पहले तैयार किया जाता है. उसके बाद इसे जलेबी वाली कढ़ाई में पकाया जाता है. खास तौर पर शुद्ध घी में तैयार किया जाता है. उसके बाद मालपुआ पकने पर इसे चासनी में डूबा दिया जाता है. कुछ घंटे चाशनी में रखने के बाद निकालकर सीधे गरमा-गरम आपकी प्लेट में रखा जाता है. यह ऊपर से हल्का कुरकुरा होता है और अंदर से इतना नरम कि जब इसे खाया जाता है, तो मुंह में जाते ही यह घुल जाता है.

रबड़ी बढ़ा देती है स्वाद
मालपुआ अपने आप में शानदार है, लेकिन जब उसके ऊपर गाढ़ी, मलाईदार और लच्छेदार रबड़ी की परत बिछाई जाती है और मालपुआ के छोटे-छोटे टुकड़े रबड़ी के साथ मिक्स होकर खाए जाते हैं, तो यह मिश्रण सोने पर सुहागा बन जाता है. सराफा की रबड़ी की खासियत है कि ‌ये इतनी गाढ़ी होती है कि उसे चम्मच से उठाने पर भी वह अपनी मलाईदार पहचान नहीं छोड़ती.

हालांकि पिछले दिनों खड़ा हुआ गैस संकट अब इस मिठास भारी डिश के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर रहा है. दुकान संचालक पराग गुप्ता ने बताया कि बड़ी मुश्किल से उन्हें गैस टंकी मिल पा रही है. इसकी वजह से उन्हें कई दिन दुकान भी बंद रखनी पड़ी. जैसे-तैसे कोयले की भट्टी पर काम चला रहे हैं. अगर आप भी इंदौर में सराफा बाजार की सैर पर निकले हैं तो अगली बार कुरकुरे मालपुए और रबड़ी का लुत्फ जरूर उठाएं.



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