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राजा हिरदे शाह की पुण्यतिथि 28 अप्रैल को है. देश में पहली बार भोपाल में उनकी पुण्यतिथि का आयोजन है. इसको लेकर मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि कई शहीदों का बलिदान बड़ा है. चर्चा कम है. अछूते नायकों के प्रति सम्मान का भाव बढ़ा है. पीएम मिशन शुरू नहीं करते, तो हिरदे शाह जैसे बलिदानी का कोई जिक्र नहीं करता.
प्रहलाद सिंह पटेल ने इस वजह से जताया PM मोदी का आभार
Prahlad Singh Patel: प्रहलाद सिंह पटेल मध्य प्रदेश सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री हैं. वह भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और जमीन पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत मानी जाती है. अब न्यूज 18 से खास बातचीत में उन्होंने कई विषयों पर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रांतिकारियों की चिंता की है. राजा हिरदे शाह की पुण्यतिथि 28 अप्रैल को है. देश में पहली बार भोपाल में उनकी पुण्यतिथि का आयोजन है. जल गंगा अभियान से जल संरक्षण का विचार आया और सरकार इसको लेकर लगातार काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण, जल संरक्षण पर काम और जागरूकता में जुटे हुए हैं. पर्यावरण संतुलन के साथ विकास चाहिए, तो कंक्रीट जैसे कामों से बचें. सस्टेनेबल डेवलपमेंट का अर्थ है. पर्यावरण को छेड़े बिना विकास करें.
राजा हिरदे शाह की पुण्यतिथि को लेकर भोपाल में होगा आयोजन: प्रहलाद पटेल
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रांतिकारियों की चिंता की है. बुंदेलखंड क्रांति के नायक हिरदे शाह के बलिदान से जुड़े आयोजन पर मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने कहा था कई शहीदों का बलिदान बड़ा है. चर्चा कम है. अछूते नायकों के प्रति सम्मान का भाव बढ़ा है. 1842 से 1942 के बीच कई क्रांतिकारियों ने देश के लिए बलिदान दिया. बुंदेलखंड में 1842 की क्रांति के अगुवा राजा हिरदे शाह लोधी थे. पार्लियामेंट में क्रांतिकारियों का कैलेंडर 1842 से 1942 के बीच का बना है. क्रांतिकारियों के इस मिशन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताता हूं. पीएम मिशन शुरू नहीं करते, तो हिरदे शाह जैसे बलिदानी का कोई जिक्र नहीं करता. राजा हिरदे शाह की पुण्यतिथि 28 अप्रैल को है. देश में पहली बार भोपाल में उनकी पुण्यतिथि का आयोजन है. नरसिंहपुर में हिरदे शाह की देशभर में एक ही मूर्ति है. गोंड राजाओं का भी देश के लिए बड़ा बलिदान है. यह कार्यक्रम जाति विशेष का नहीं, 1842 के शहीदों का कार्यक्रम है.
110 नदियों के उद्गम से जल किया जमा: प्रहलाद पटेल
जल संरक्षण की आवश्यकता पर मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि केंद्र में काम करते हैं, तो राज्यों की रिपोर्ट को देखकर सैंपलिंग करते हैं. जमीन की वास्तविक स्थिति राज्य सरकार में काम करने पर ही पता चलती है. जल स्रोत चाहे नदी हो, तालाब हो, वे गंदे हो रहे हैं या सूख रहे हैं. एक तरफ हम नदियों में सीवर लाते हैं दूसरी तरफ ट्रीट करने की बात करते हैं. दोनों चीज साथ-साथ नहीं हो सकती. नर्मदा के तट पर बड़े-बड़े घाट शताब्दियों से बने हैं. आप कंक्रीट की वॉल खड़ी करते हो, तो वह बरसात में बह जाती है. हमें यह समझना पड़ेगा कि हम कहां चूक रहे हैं? तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ेगा तभी समस्या हल होगी. जल संरक्षण और पर्यावरण के संबंध में जागरूकता की आवश्यकता है.
मंत्री ने कहा कि जल गंगा अभियान से जल संरक्षण का विचार आया. मेरे मन में आया की नदियों के उद्गम स्थल पर जाना चाहिए. मुख्यमंत्री जी के साथ बेतवा नदी के उद्गम स्थल से अभियान शुरू किया. पहले वर्ष में 32 नदियों के उद्गम स्थल पर पहुंचे हैं. दूसरे वर्ष यानी पिछले साल 108 नदियों के उद्गम स्थल पर पहुंच गए. अब तक 110 नदियों के उद्गम स्थल पर काम शुरू हो गया है.
उन्होंने कहा कि नदियों के किनारे जमीन कम बची है. पौधारोपण के सिवाय कुछ नहीं कर सकते हैं. कई नदियों के उद्गम ही सूख गए हैं. छोटी नदियां बारहमासी नहीं रहेंगी, तो बड़ी नदियां भी खतरे में आ जाएंगी. एक नदी का जल तीन बोतल में है. मेरी बिटिया ने रेत संग्रहण का विचार भी दिया है. मेरी मंशा है कि जो छोटी बोतल का जल है. वह मेरी पीढ़ी उपयोग करें. बाद वाली बोतल का बाद की पीढ़ी उपयोग करें. सालों बाद कोई रिसर्च करें कि उन दिनों इस पानी की पीएच वैल्यू क्या थी? मिनरल्स कितने थे, वनस्पतियां क्या थीं?
केन-बेतवा परियोजना को बताया अहम
उन्होंने कहा कि अगले 20 साल बाद क्या होगा यह पानी उस बात का गवाह होगा. संग्रहण किए जल पर लिखकर जाऊंगा कि कोई इस पर समाज के हित में रिसर्च करे. मध्य प्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है. बुंदेलखंड में अब सूखे के हालात नहीं, जो आंकड़े आ रहे हैं बहुत सुखद हैं. केन-बेतवा एक महत्वपूर्ण परियोजना है. चंदेल कालीन जो कैचमेंट है. उन्हें इमानदारी से खोला होता तो और बेहतर होता. बरसात के पानी को हम संग्रहण करेंगे तो आगे समस्या नहीं रहेगी.
श्रम कानून के लिए क्या बोले प्रहलाद पटेल
श्रम कानून पर मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि कई कानून बेमतलब के थे. भारत सरकार ने उनको रिपील किया है. कानून से मजदूर का फायदा नहीं, उसका सोशल वेलफेयर देखना होगा. मजदूर के स्वास्थ्य की और परिवार की सुरक्षा की भी सुनिश्चित करनी होगी. बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर शक्ति से काम करना होगा. दुर्घटना के समय कमाने वाले व्यक्ति के जाने के बाद परिवार का ध्यान रखना होगा. किसी भी गफलत में मजदूर की मृत्यु नहीं होनी चाहिए. मशीनों से काम करने से उपलब्धि हासिल नहीं होती है.
उन्होंने कहा कि यह भी देखना होता है कि मशीनों से पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा है. हमने मजदूरों की चिंता की है. मजदूर और मालिकों के बीच टकराहट नहीं यह हमारी सफलता है. जीरो टॉलरेंस पर काम करना हमारा कर्तव्य है. तकनीक मजदूरों के हित में है और ऑनलाइन पैसा पहुंचना चाहिए. बिचौलिए नहीं रहेंगे, तो मजदूरों की ज्यादा मदद होगी. ऑनलाइन लिस्ट में वास्तविक कैजुअल्टी और राहत राशि देख पाएंगे. तकनीक ने बहुत सारी चीजों को बेहतर करने का रास्ता दिया है. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं. यह विजन प्रधानमंत्री जी का था कि हर श्रमिक का मेडिकल कार्ड भी हो.