मां स्कूल में लगाती है झाडू-पोछा, बेटी बनीं कक्षा 12वीं की टॉपर, पूरे स्टेट में लाई रैंक 1

मां स्कूल में लगाती है झाडू-पोछा, बेटी बनीं कक्षा 12वीं की टॉपर, पूरे स्टेट में लाई रैंक 1


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MP Board 12th Topper Chandni Vishwakarma Success Story: भोपाल की चांदनी विश्वकर्मा ने झुग्गी बस्ती में रहते हुए एमपी बोर्ड कक्षा 12वीं की परीक्षा में 500 में से 494 अंक हासिल कर पूरे स्टेट में टॉप किया है. दुर्घटना में कटी पिता की उंगली और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी भी मेहनत नहीं छोड़ी. अब वह NDA की तैयारी कर सेना में अफसर बनकर देश सेवा करना चाहती हैं.

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चांदनी ने बताया कि वह रोजाना पढ़ाई का एक टारगेट बनाती थीं और उसे पूरा करने के लिए 6 से 8 घंटे पढ़ती थीं.

MP Board 12th Topper Chandni Vishwakarma Success Story: कहते हैं कि अगर इंसान मेहनत करने की ठान ले, तो दुनिया की कोई भी ताकत उसे सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती है. भोपाल की चांदनी विश्वकर्मा ने इस बात को सच कर दिखाया है. बेहद कठिन हालात में रहने के बावजूद उन्होंने मध्य प्रदेश बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षा में 500 में से 494 अंक लाकर पूरे राज्य में टॉप किया है और एक नई मिसाल कायम की है.

झुग्गी बस्ती से निकलकर बनी स्टेट टॉपर

हिंदुस्तान लाइव के मुताबिक, भोपाल के भीमनगर इलाके की झुग्गी बस्ती में रहने वाली चांदनी विश्वकर्मा ने कॉमर्स स्ट्रीम में शानदार प्रदर्शन किया. खास बात यह है कि उनके अंक न सिर्फ कॉमर्स, बल्कि अन्य सभी स्ट्रीम के टॉपर्स से भी ज्यादा हैं. उनकी इस सफलता ने पूरे शहर का नाम रोशन कर दिया है.

पिता की दुर्घटना ने बढ़ाई जिम्मेदारी

चांदनी के पिता रामभुवन विश्वकर्मा कारपेंटर का काम करते हैं. पिछले साल दिवाली के समय एक हादसे में उनकी उंगली कट गई थी, जिसके बाद उनका काम पूरी तरह बंद हो गया. लंबे इलाज और आर्थिक तंगी के बीच परिवार के सामने कई मुश्किलें खड़ी हो गईं. इन हालातों ने चांदनी को और मजबूत बना दिया.

मां ने संभाला घर, बेटी ने जारी रखी पढ़ाई

हालांकि, अब घर चलाने की जिम्मेदारी चांदनी की मां पर आ गई. वह एक सरकारी स्कूल में सफाई और बच्चों से जुड़े काम करती हैं. इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. वहीं, परिवार के इस संघर्ष ने चांदनी को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

शिक्षा के अधिकार के तहत पूरी की पढ़ाई

चांदनी ने अपनी पढ़ाई शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गुरुदेव शिक्षा केंद्र, नीलबड़ से की. उनके पिता को भी यह अंदाजा नहीं था कि उनकी बेटी इतनी मेहनत कर रही है. चांदनी चुपचाप अपने लक्ष्य पर ध्यान देती रहीं और अचानक यह सफलता हासिल कर ली.

रोजाना टारगेट बनाकर करती थीं पढ़ाई

चांदनी ने बताया कि वह रोजाना पढ़ाई का एक टारगेट बनाती थीं और उसे पूरा करने के लिए 6 से 8 घंटे पढ़ती थीं. Math उनका कमजोर विषय था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. वहीं, Accounts उनका पसंदीदा विषय रहा, जिसमें उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया.

स्कूल आना-जाना भी संघर्ष से कम नहीं

चांदनी का स्कूल घर से काफी दूर था. वह पहले ऑटो से डीपो चौराहा जाती थीं और वहां से स्कूल के लिए बस पकड़ती थीं. हालांकि, रोज का यह संघर्ष भी उनकी पढ़ाई के बीच बाधा नहीं बन पाया.

सेना में अफसर बनने का है सपना

चांदनी अब भारतीय सेना में अफसर बनना चाहती हैं. इसके लिए वह NDA परीक्षा की तैयारी कर रही हैं. उनका सपना है कि वह देश की सेवा करें और अपने परिवार का नाम और ऊंचा करें.

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Kunal Jha

Kunal Jha is an experienced journalist with more than four years of experience in the field of journalism. He mainly writes articles related to education, careers, and jobs. His work includes covering UPSC Civi…और पढ़ें



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