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कांग्रेस विधायक अभय कुमार मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका है, जिसमें याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया. उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती थी, जिसमें उनकी चुनाव याचिका को खारिज करने की अपील रद्द कर दी गई थी.
अभय कुमार मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
Abhay Kumar Singh: रीवा जिले के सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय कुमार मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया. जबलपुर हाईकोर्ट में विधानसभा में मिली उनकी जीत को चुनौती दी गई थी. तब हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज करने से मना कर दिया था. इसके बाद मिश्रा ने उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सेमरिया से विधायक मिश्रा को कानून में उपलब्ध विकल्प अपनाने की छूट देते हुए याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी.
बेंच ने अभय मिश्रा के वकील कपिल सिब्बल से कहा कि याचिकाकर्ता वहां (मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में) चुनाव याचिका का विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं? जाइए और उसका विरोध कीजिए. जब बेंच ने याचिका पर सुनवाई में रुचि नहीं दिखाई, तो सिब्बल ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी. बेंच ने उन्हें याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी.
साल 2023 में विधानसभा का चुनाव जीते थे अभय कुमार मिश्रा
वकील सुमीर सोढ़ी के जरिए दाखिल याचिका में अभय कुमार मिश्रा ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच के 20 मार्च के आदेश को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट में कृष्ण पति त्रिपाठी की तरफ से उनकी जीत को चुनौती देने वाली याचिका दी गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया. त्रिपाठी नवंबर 2023 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार थे. मिश्रा को 56,024 वोट मिले थे, जबकि त्रिपाठी को 55,387 वोट प्राप्त हुए थे.
कृष्ण पति त्रिपाठी ने मिश्रा के खिलाफ दर्ज नौ आपराधिक मामलों का खुलासा न करने समेत अन्य आधारों पर उनके चुनाव को चुनौती दी थी. मिश्रा ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है और न ही उन्हें किसी मामले में दोषी ठहराया गया है.
कृष्ण पति त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कहा था कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-33ए के तहत उन आपराधिक मामलों का खुलासा करने की जरूरत नहीं है, जिनमें सक्षम कोर्ट ने उम्मीदवार को बरी कर दिया हो या उस पर कोई आरोप तय न हुआ हो.