जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही, पानी के लिए संघर्ष बढ़ता जा रहा है। बुरी स्थिति उन 20% इलाकों में है, जहां नर्मदा लाइन नहीं डली है। निगम कंट्रोल रूम और 311 एप पर ही औसत 250 शिकायतें रोज दर्ज हो रही हैं।
मायाखेड़ी, शक्करखेड़ी, कुमेड़ी व बड़ा-छोटा बांगड़दा जैसे इलाकों में सुबह होते ही पानी के लिए भाग-दौड़ शुरू हो जाती है। यहां की निर्भरता पूरी तरह बोरिंग पर थी, लेकिन भूजल स्तर तेजी से गिरने के कारण अब बोरिंग भी साथ छोड़ने लगे हैं। सामान्य दिनों में चलने वाले 200 टैंकरों के काफिले में 80 नए टैंकर जोड़े गए हैं, लेकिन मांग इतनी है कि यह संख्या जल्द ही 500 पार करने वाली है। सुदामा नगर, द्वारकापुरी हवा बंगला भी प्रभावित
विधानसभा क्षेत्र-4 के हवा बंगला, सुदामा नगर, साईं बाबा कॉलोनी, आकाश नगर, द्वारकापुरी और प्रजापत नगर सहित बस्तियों में पानी की किल्लत, गंदे पानी और सीवरेज की समस्याएं सामने आ रही हैं। कई जगह समय पर वॉल्व नहीं खुलने और टैंकर नहीं मिलने से रहवासी परेशान हैं। शनिवार को विधायक मालिनी गौड़ ने निगम अधिकारियों की बैठक लेकर जल सप्लाय के हालात जाने। उन्होंने हर वार्ड में टैंकर व्यवस्था सुनिश्चित करने, तंग गलियों में ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाने और अधूरे काम जल्द पूरे करने को कहा। तुलसी नगर एवेन्यू में ड्रेनेज और पानी की लाइनें जोड़ दीं
तुलसी नगर एवेन्यू में डेढ़ महीने से लोग परेशान हैं। यहां ड्रेनेज लाइन को पेयजल लाइन से जोड़ दिया। पिछले एक हफ्ते से मकान नंबर 185AA से 200 के बीच नलों से बदबूदार काला पानी आ रहा है। निगम को कई बार सूचना दी गई, लेकिन समाधान नहीं मिला। वाटर रिचार्जिंग नहीं, बोरिंग साथ छोड़ने लगे
कांक्रीटीकरण : इससे बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा रहा। वाटर रिचार्जिंग नहीं होने से बोरिंग साथ छोड़ने लगे हैं।
पुराना ड्रेनेज नेटवर्क: शहर का ड्रेनेज सिस्टम 30-40 साल पुराना है। लाइनें बिछाते वक्त पुरानी ड्रेनेज लाइनें फूट जाती हैं और गंदा पानी मिल जाता है।
यशवंत सागर पर दबाव : नर्मदा के साथ यशवंत सागर से 450 MLD सप्लाय है, लेकिन लीकेज व अवैध पंपिंग के कारण अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। क्या करें जब नलों में आए गंदा पानी?
शिकायत : तत्काल 311 एप पर फोटो के साथ शिकायत दर्ज करें और शिकायत नंबर संभालकर रखें।
पहचान : यदि पानी का रंग हल्का पीला या काला है, तो वह सीवरेज मिक्सिंग है। इसे उबालकर भी इस्तेमाल न करें, यह त्वचा और पेट की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
विकल्प: तंग गलियों के लिए निगम ने अब ट्रैक्टर-ट्रॉली वाले छोटे टैंकरों की व्यवस्था शुरू की है, अपने वार्ड पार्षद से इसकी मांग करें।
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