आटा और गुड़ की खुरमी! मेहमाननवाजी के लिए परफेक्ट स्वीट डिश, आसान रेसिपी

आटा और गुड़ की खुरमी! मेहमाननवाजी के लिए परफेक्ट स्वीट डिश, आसान रेसिपी


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Satna News: आटा गूंथने के बाद इसे कुछ समय के लिए ढककर रख दिया जाता है. इसकी छोटी-छोटी लोइयां बनाकर हथेली से दबाकर चपटा किया जाता है या फिर चाकू से मनचाहे आकार में काटा जाता है. कड़ाही में तेल को मध्यम गर्म करके आंच धीमी कर दी जाती है और फिर खुरमी को धीरे-धीरे तला जाता है.

सतना. बघेलखंड अंचल की रसोई में पारंपरिक व्यंजनों की एक अलग ही पहचान है, जहां हर पकवान अपने साथ संस्कृति और स्वाद की कहानी लेकर आता है. इन्हीं में से एक है खुरमी जो खास मौकों और त्योहारों में बनाई जाने वाली एक लोकप्रिय स्वीट डिश है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से खस्ता खुरमी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित रहने की वजह से मेहमाननवाजी के लिए भी बेहतरीन विकल्प मानी जाती है. आज भी बघेलखंड के कई घरों में यह परंपरा जीवित है, जहां खुरमी को बड़े चाव से बनाया और परोसा जाता है. लोकल 18 से बातचीत में सतना निवासी मीना द्विवेदी बताती हैं कि खुरमी बनाने की शुरुआत गुड़ के घोल से होती है. इसके लिए आधा कप पानी में गुड़ डालकर धीमी आंच पर गर्म किया जाता है जब तक वह पूरी तरह घुल न जाए. इसके बाद घोल को छानकर ठंडा किया जाता है, जिससे उसकी शुद्धता और स्वाद बना रहता है. यह प्रक्रिया खुरमी को खास मिठास और नैचुरल फ्लेवर देती है, जो इसे बाजार की मिठाइयों से अलग बनाती है.

खुरमी के आटे को तैयार करने के लिए गेहूं का आटा और सूजी को एक साथ मिलाया जाता है. इसमें सफेद तिल, कसी हुआ नारियल और इलायची पाउडर मिलाकर स्वाद को और भी बढ़ाया जाता है. इसके बाद इसमें घी या तेल डालकर अच्छी तरह से रगड़ा जाता है, जिससे आटा बांधने लायक बन सके. जब आटा मुट्ठी में दबाने पर लड्डू की तरह बंधने लगे, तभी इसमें धीरे-धीरे ठंडा हो चुका गुड़ का पानी मिलाया जाता है. ध्यान रखना है कि खुरमी का आटा रोटी की तरह नरम नहीं बल्कि सख्त होना चाहिए.

पारंपरिक आकार और तलने की विधि
आटा गूंथने के बाद इसे कुछ समय के लिए ढककर रखा जाता है. फिर इसकी छोटी-छोटी लोई बनाकर हथेली से दबाकर चपटा किया जाता है या चाकू से मनचाहे आकार में काटा जाता है. कड़ाही में तेल को मध्यम गर्म करके आंच धीमी कर दी जाती है. फिर खुरमी को धीरे-धीरे तला जाता है. इसे तुरंत न पलटें क्योंकि इससे खुरमी टूट सकती है. ध्यान रखें कि यह एक तरफ से सख्त हो जाए, तब पलटकर सुनहरा भूरा होने तक तलें.

स्वाद के साथ लंबे समय तक स्टोरेज का फायदा
खुरमी की एक खासियत यह भी है कि यह जल्दी खराब नहीं होती. तलने के बाद शुरुआत में यह थोड़ी नरम लग सकती है लेकिन ठंडी हवा लगते ही यह पूरी तरह कुरकुरी और खस्ता हो जाती है. पूरी तरह ठंडा होने के बाद इसे कांच या स्टील के एयरटाइट डिब्बे में रखा जाए, तो यह 30 से 45 दिनों तक आसानी से सुरक्षित रह सकती है. आटे, गुड़ और सूजी जैसे पोषक तत्वों से बनने वाली खुरमी गर्मियों में भी शरीर को ऊर्जा देने का काम करती है. यही वजह है कि यह सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि हेल्थ के लिहाज से भी फायदेमंद है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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