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Chhatarpur News: आज हम आपको एक ऐसी बगिया के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके पौधों को 106 वर्षीय अम्मा ने अपने बच्चों की तरह पाल-पोस कर बड़ा किया. इन पेड़ों को तैयार करने में अम्मा को पूरे 5 साल लगे हैं. अम्मा ने सरकारी हैंडपंप से पानी लाकर इन पौधों को सींचा और बड़ा किया. आइए जानते हैं इस बगिया को तैयार करने में कितना समय लगा है.
Amma ki Bagiya: आज हम आपको एक ऐसी बगिया के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके पौधों को 106 वर्षीय अम्मा ने अपने बच्चों की तरह पाल-पोस कर बड़ा किया. इन पेड़ों को तैयार करने में अम्मा को पूरे 5 साल लगे हैं. अम्मा ने सरकारी हैंडपंप से पानी लाकर इन पौधों को सींचा और बड़ा किया. साथ ही बंदरों से बचाने के लिए खुद खाट डालकर डेरा भी डाल रखा है. बता दें, यहां औषधीय पौधे, फलदार पौधे और फूलदार पौधे जैसे 100 पेड़ लगाए गए हैं.
छुट्टन तिवारी के नाम से प्रसिद्ध अम्मा लोकल 18 से बातचीत बातचीत में बताती हैं कि 5 साल पहले मैंने इस बगिया को तैयार करने का सोचा था. लेकिन उस समय न तो यहां पानी था और न घर बना था. फिर भी बगिया तो तैयार करनी ही थी. मैंने अपने बेटे से कहा कि तुम पेड़ लाओ मुझे बगिया लगानी है. बेटे ने कहा मैं खुद 60 साल हो गया, लेकिन बगिया का नहीं सोचा फिर तुम क्यों इस बुढ़ापे में मेहनत करना चाहती हो. मैंने कहा कि मरने से पहले अपनी मां की ख्वाहिश पूरी करनी है. इसके बाद जाकर बेटे ने मेरी बात पर ध्यान दिया और मुझे पेड़ लाकर दिए.
सरकारी हैंडपंप से पौधों को सींचा पानी
अम्मा बताती हैं कि मैंने पहले साल कुछ पौधे लगाकर शुरुआत की. लेकिन दिक्कतें बहुत आईं. यहां न तो जानवरों से बचाने के लिए बाउंड्री थी. इसलिए सबसे पहले तार लगवाया. पौधों को तैयार करने के लिए शुरुआत में सरकारी हैंडपंप से पानी सींचा. हालांकि, अब तो बगिया में ही पानी की सुविधा है. अगले साल फिर से पौधे लगाए. इन पौधों को तैयार करने के लिए गढ्ढे खुदवाए. यहीं पर गोबर खाद तैयार करवाई ताकि बाजार से कुछ भी न खरीदना पड़े.
500 पेड़ करने हैं तैयार
अम्मा बताती हैं कि हर साल अपनी इस बगिया में नए-नए पौधे लगाती हैं. पिछले 5 सालों में अब तक 100 पौधे तैयार हो चुके हैं. उनका सपना है कि अपने जिंदा रहते 500 पेड़ों की बगिया तैयार हो जाए. हालांकि, इसमें मेहनत बहुत है. फलों को खाने के लिए यहां बंदर भी आते हैं. अभी केला फल आए थे तो बंदरों ने भी चखा है. हमनें भी खाए हैं लेकिन बंदरों से नुकसान को बचाना होता है. बंदरों को भगाने के लिए बगिया पर ही खाट(चारपाई) डालकर सोती हैं. साथ ही एक पक्का कमरा भी बनवा लिया है. यहां मेरा खाना-पीना बनता है.
आम से लेकर अनार के पौधे
अम्मा बताती हैं कि इस बगिया में औषधीय पौधों से लेकर फूलदार पौधे और फलदार पौधे लगा रखे हैं. पूजा-पाठ के लिए फूलदार पौधे भी लगते हैं. साथ ही दवाइयों के लिए औषधीय पौधे भी लगते हैं. फलदार पौधे की बात करें तो अमरूद, आंवला, जामुन,अनार, केला, देसी आम से लेकर दशहरी आम(3 पेड़ दशहरी आम), नींबू , पेड़ लगा रखे हैं. टमाटर और बैंगन जैसी सब्जियां भी लगा रखी हैं.
5 सालों से पौधों की कर रहीं सेवा
अम्मा बताती हैं कि पिछले 5 सालों से इस बगिया में पौधे तैयार कर रही हैं लेकिन अभी भी फल नहीं खाने को मिले हैं. इस साल केला फल जरूर खाने को मिला, लेकिन आधे केले बंदर खा गए. दशहरी आम फल आए हैं और उसमें कपड़े बांधकर रखा है ताकि ये फल भगवान को चढ़ा पाएं. साथ ही दूसरों को भी खाने को मिल जाएं.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें