सीमेंट-स्टील के दामों ने बढ़ाई आम आदमी की टेंशन, घर बनाना हुआ 25% महंगा

सीमेंट-स्टील के दामों ने बढ़ाई आम आदमी की टेंशन, घर बनाना हुआ 25% महंगा


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Satna News: पिछले दो महीने में ही आसपास के क्षेत्रों में घर बनाना करीब 25 फीसदी तक महंगा हो गया है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए अपने घर का सपना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. सीमेंट सिटी कहे जाने वाले सतना में भी सीमेंट के हर बैग में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

सतना. मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में घर बनाने का सपना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव, युद्ध जैसे हालात और सप्लाई चेन में आई रुकावटों का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है. निर्माण सामग्री खासकर सीमेंट, स्टील और बिटुमेन जैसे मैटेरियल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे मकान निर्माण की लागत में भारी इजाफा देखने को मिल रहा है. सतना जैसा शहर खुद सीमेंट उत्पादन का बड़ा केंद्र है लेकिन यहां भी निर्माण सामग्री की कीमतों में उछाल ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. लोकल 18 से बातचीत में सिविल इंजीनियर सुशील गौतम बताते हैं कि निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट है, जो सीधे तौर पर फ्यूल की कीमतों से जुड़ा हुआ है. अंतरराष्ट्रीय युद्ध के कारण फ्यूल सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो गया है. जब डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ती हैं, तो हर प्रकार के मैटेरियल की ढुलाई महंगी हो जाती है. इसका सीधा असर सीमेंट, सैंड और एग्रीगेट जैसे बेसिक मैटेरियल पर पड़ता है और उनके रेट ऑटोमैटिक बढ़ जाते हैं.

स्थानीय बाजार की स्थिति पर नजर डालें, तो सीमेंट की एक बोरी पर 20 से 25 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. वहीं स्टील के दामों में पांच से 15 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया है. सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बिटुमेन पहले करीब 45 हजार रुपये प्रति टन के आसपास था, जो अब 70 से 75 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गया है. इन बढ़ी हुई कीमतों ने कंस्ट्रक्शन सेक्टर में हलचल मचा दी है और बिल्डर से लेकर आम व्यक्ति तक इससे प्रभावित हैं.

सीमेंट हब में भी दिखा असर
पिछले दो महीने में ही आसपास के क्षेत्रों में घर बनाना लगभग 25% तक महंगा हो गया है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए अपना घर बनाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. सीमेंट सिटी कहे जाने वाले सतना में भी सीमेंट के हर बैग में बढ़ोतरी देखी जा रही है. स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने के बावजूद ट्रांसपोर्टेशन और ऊर्जा लागत बढ़ने से सीमेंट के दामों में राहत नहीं मिल पा रही है. ठेकेदारों और बिल्डर्स का कहना है कि बढ़ती लागत के चलते प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग प्रभावित हो रही है और कई लोग निर्माण कार्य को टालने पर मजबूर हो रहे हैं.

और बढ़ सकता है संकट
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तनाव बढ़ता है या यह मार्ग बाधित होता है, तो इसका वैश्विक असर पड़ेगा. दुनिया का करीब 20-21% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. इस मार्ग में बाधा आने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे ऊर्जा लागत बढ़ेगी और सीमेंट-स्टील जैसे उत्पादों की कीमतें और ऊपर जाएंगी. इसके अलावा पेट्रोलियम आधारित उत्पाद जैसे पेंट, पीवीसी पाइप, वॉटरप्रूफिंग केमिकल और डामर के दामों में भी तेजी आएगी. अगर पिछले कुछ वर्षों का विश्लेषण करें, तो 2020 के बाद से अब तक घर बनाने की लागत में 40% से अधिक की वृद्धि हो चुकी है. लगातार बढ़ती महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों ने निर्माण क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है.

आम आदमी पर सीधा असर
इस बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. जो लोग वर्षों से अपने घर का सपना देख रहे थे, उनके लिए अब बजट संभालना मुश्किल हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती और फ्यूल सप्लाई स्थिर नहीं होती, तब तक निर्माण सामग्री के दामों में राहत की उम्मीद कम ही है. ऐसे में फिलहाल घर बनवाने की योजना बना रहे लोगों को अपने बजट और प्लानिंग पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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