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मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के बीचों-बीच खड़ा 140 साल पुराना घंटाघर आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान और आकर्षण को जीवित रखे हुए है.अंग्रेजों के दौर में बना यह घंटाघर न सिर्फ एक इमारत है, बल्कि शहर की पहचान और इतिहास का अहम हिस्सा बन चुका है.
मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के बीचों-बीच खड़ा 140 साल पुराना घंटाघर आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान और आकर्षण को जीवित रखे हुए है.अंग्रेजों के दौर में बना यह घंटाघर न सिर्फ एक इमारत है, बल्कि शहर की पहचान और इतिहास का अहम हिस्सा बन चुका है.इसके आसपास बना सुंदर गार्डन और पुराना बाजार आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है, जहां हर दिन लोग बैठकर इस विरासत को निहारते नजर आते हैं.
इस घंटाघर का निर्माण अंग्रेजों ने उस समय कराया था, जब खंडवा एक छोटा सा कस्बा हुआ करता था। उस दौर में यह स्थान एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था. जहां लोगों को इकट्ठा करने और सूचनाएं देने के लिए घंटा बजाया जाता था.घंटाघर में लगा बड़ा घंटा चारों दिशाओं में गूंजता था, जिसकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती थी। यही कारण है कि इसका नाम घंटाघर पड़ा. इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घंटाघर उस समय की एक तरह की सूचना प्रणाली हुआ करता था.जब संचार के आधुनिक साधन नहीं थे.अंग्रेज इसी घंटाघर के जरिए लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचाते थे. इसके अलावा यहां एक बड़ी घड़ी भी लगाई गई थी, ताकि लोग समय का पता लगा सकें.
140 साल पुराना घंटाघर बना खंडवा की पहचान
लव जोशी बताते हैं कि उन्होंने बचपन से इस घंटाघर को देखा है. उनके दादा-परदादा भी इसे देखते आए हैं.यह इमारत पीढ़ी दर पीढ़ी शहर के लोगों के जीवन का हिस्सा बनी हुई है, लेकिन आज की नई पीढ़ी इसके इतिहास से अनजान है.घंटाघर की मजबूती भी इसकी खास पहचान है.करीब डेढ़ सदी पुरानी यह इमारत आज भी मजबूती से खड़ी है.आने वाले कई वर्षों तक इसी तरह शहर की पहचान बनी रह सकती है. इसके आसपास आज भी पुराने समय जैसा बाजार लगता है, जहां लोग सस्ती और पारंपरिक चीजों की खरीदारी करते हैं. पुराने समय में इस स्थान पर एक महीने तक मेला भी लगता था, जिसमें पूरे खंडवा शहर के लोग शामिल होकर आनंद लेते थे.आज भले ही समय बदल गया हो, लेकिन घंटाघर के आसपास की रौनक और लोगों की आस्था अब भी वैसी ही बनी हुई है.