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मध्य प्रदेश में बीना-नागदा पैसेंजर के लोको पायलट ने पटरियों की ओर बढ़ती आग को देख ट्रेन को 4 किलोमीटर पीछे कर लिया. इस बहादुरी से सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई. पराली की आग के कारण रेल यातायात घंटों बाधित रहा.
सांकेतिक तस्वीर
इंसान की समझदारी ही उसे बड़े संकटों से बचाती है. मध्य प्रदेश में एक लोको पायलट की सूझबूझ और तत्परता ने सोमवार दोपहर एक भीषण ट्रेन हादसे को टाल दिया. ग्वालियर-इंदौर लाइन के मक्सी-रुठियाई खंड पर अवैध रूप से जलाई गई पराली की आग जब ‘आग की दीवार’ बनकर पटरियों की तरफ बढ़ने लगी, तो पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए पैसेंजर ट्रेन को करीब 4 किलोमीटर तक पीछे (रिवर्स) कर लिया. इस साहसिक कदम से न केवल ट्रेन आग की चपेट में आने से बची, बल्कि सैकड़ों यात्रियों की जान पर आया संकट भी टल गया.
यह आग सोमवार दोपहर करीब 12.45 बजे भोपाल रेलवे डिवीजन के अंतर्गत आने वाले ब्यावरा-राजगढ़ और पचोर स्टेशनों के बीच खेतों में भड़की थी. स्थानीय स्तर पर अवैध रूप से जलाई गई पराली ने तेज हवाओं के कारण विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते यह आग पटरियों की तरफ बढ़ने लगी. उस समय बीना-नागदा पैसेंजर ट्रेन उसी ट्रैक से गुजर रही थी. लोको पायलट ने दूर से ही आग की भीषण लपटों को देख लिया था और उसे अंदाजा हो गया था कि ट्रेन को आगे ले जाना खतरे से खाली नहीं है.
पायलट की जांबाजी और यात्रियों की सुरक्षा
जैसे ही आग की लपटें पटरियों के बेहद करीब पहुंचीं, लोको पायलट ने बिना समय गंवाए ट्रेन को रोकना ही काफी नहीं समझा, बल्कि उसे पीछे ले जाने का फैसला किया. ट्रेन को करीब 4 किलोमीटर तक रिवर्स किया गया, ताकि यात्रियों को सुरक्षित दूरी पर ले जाया जा सके. पायलट के इस त्वरित निर्णय ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया. अधिकारियों का कहना है कि अगर ट्रेन कुछ सेकंड और आगे बढ़ जाती, तो लपटें डिब्बों को अपनी चपेट में ले सकती थीं, जिससे भारी जनहानि हो सकती थी.
रेल यातायात पर असर और यात्रियों की परेशानी
इस आग के कारण क्षेत्र में रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ. गुना से अहमदाबाद जा रही साबरमती एक्सप्रेस को भी ब्यावरा स्टेशन पर ही रोक दिया गया, क्योंकि आग पटरियों के पास धधक रही थी. दोपहर करीब 4 बजे तक रेल यातायात पूरी तरह निलंबित रहा, जिससे यात्री भीषण गर्मी के बीच तीन घंटे से अधिक समय तक फंसे रहे. स्थिति सामान्य होने और पटरियों के सुरक्षित पाए जाने के बाद ही ट्रेनों का संचालन दोबारा शुरू किया जा सका.
पराली जलाने की घटनाओं पर चिंता
रेलवे अधिकारियों ने इस जांबाज लोको पायलट के नाम की घोषणा अभी नहीं की है, लेकिन उन्होंने पुष्टि की है कि उसे इस बहादुरी और सतर्कता के लिए पुरस्कृत किया जाएगा. दूसरी ओर, खेतों में अवैध रूप से पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. आंकड़ों के अनुसार, इस साल अकेले राजगढ़ जिले में पराली जलाने की 928 घटनाएं दर्ज की गई हैं. रेलवे ने इस विशेष मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है.
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न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर के तौर कार्यरत. इंटरनेशनल, वेब स्टोरी, ऑफबीट, रिजनल सिनेमा के इंचार्ज. डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय. नेटवर्क 18 के अलावा टाइम्स ग्रुप, …और पढ़ें