गेहूं खरीदी में अव्यवस्था से बढ़ी किसानों की चिंता, मौसम की मार पर उठे सवाल

गेहूं खरीदी में अव्यवस्था से बढ़ी किसानों की चिंता, मौसम की मार पर उठे सवाल


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नर्मदापुरम जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का कार्य जारी है, लेकिन किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अब तक 25,698 किसानों से 1,42,674 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था को लेकर असंतोष कम नहीं हुआ है.

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गेहूं खरीदी में अव्यवस्था से बढ़ी किसानों की चिंता

नर्मदापुरम जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का कार्य जारी है, लेकिन किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अब तक 25,698 किसानों से 1,42,674 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था को लेकर असंतोष कम नहीं हुआ है. खासतौर पर गेहूं रिजेक्शन और मौसम में अचानक हो रहे बदलाव ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है.

मई महीने के लिए मौसम विभाग की चेतावनी और बदलते मौसम के मिजाज के चलते किसान पहले ही दबाव में है. ऐसे में खरीदी केंद्रों पर गेहूं रिजेक्ट होने की बढ़ती घटनाओं ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है. किसानों का आरोप है कि हल्की मिट्टी या गेहूं की चमक के आधार पर उनकी उपज को अनावश्यक रूप से खारिज किया जा रहा है.

गेहूं खरीदी में अव्यवस्था से बढ़ी किसानों की चिंता
खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाओं की कमी भी किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है. कई जगहों पर बारदाने की कमी है, तो कहीं तुलाई के लिए मजदूर पर्याप्त नहीं हैं. इसके कारण किसानों को अपनी फसल लेकर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. इन अव्यवस्थाओं के चलते किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.गेहूं रिजेक्शन को लेकर किसानों और सहकारी समितियों ने भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि एफसीआई द्वारा एफएक्यू मानकों के नाम पर जरूरत से ज्यादा सख्ती बरती जा रही है, जिससे बड़ी मात्रा में गेहूं रिजेक्ट हो रहा है. किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

मौसम की मार पर उठे सवाल
इसी बीच सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कृषि उपज मंडी पहुंचकर खरीदी व्यवस्था का निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. उन्होंने कहा कि एफएक्यू मानकों के नाम पर अनावश्यक सख्ती से बचा जाए और समय पर तुलाई सुनिश्चित की जाए.सांसद ने पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने के भी निर्देश दिए. निरीक्षण के दौरान जब सहकारी संस्थाओं ने गेहूं रिजेक्शन और भुगतान में देरी की शिकायत की, तो सांसद ने मौके पर ही अधिकारियों को तलब कर जवाबagri मांगा.अधिकारियों ने बताया कि गेहूं एफएक्यू मानकों पर खरा नहीं उतरने के कारण रिजेक्ट किया जा रहा है. इस पर सांसद ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कटाई के दौरान हल्की अशुद्धि सामान्य होती है, ऐसे में पूरी उपज को खारिज करना उचित नहीं है.उन्होंने निर्देश दिए कि सफाई और छनाई के जरिए अधिकतम गेहूं खरीदा जाए और किसानों को समय पर भुगतान किया जाए.



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