Toxic Liquor Death In Madhya Pradesh (MP) Ujjain, SIT Investiagation Latest News Update; Team at OLD Nagar Nigam Office, Regal Talkies Bhawan | गिरफ्त में आए आरोपी का खुलासा 20 से 25 दिन पहले ही सीखा था झिंझर शराब बनाना, डॉक्टर बोले – पीने वाला हाे सकता है पागल, जा सकती है आंखाें की राेशनी

Toxic Liquor Death In Madhya Pradesh (MP) Ujjain, SIT Investiagation Latest News Update; Team at OLD Nagar Nigam Office, Regal Talkies Bhawan | गिरफ्त में आए आरोपी का खुलासा 20 से 25 दिन पहले ही सीखा था झिंझर शराब बनाना, डॉक्टर बोले – पीने वाला हाे सकता है पागल, जा सकती है आंखाें की राेशनी


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उज्जैन10 मिनट पहले

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आरोपी सिकंदर अभी फरार है, उसे निगमायुक्त ने बर्खास्त कर दिया है।

  • गृह विभाग के सचिव राजेश राजौरा समेत एसआईटी की टीम ने क्षेत्रों का दौरा कर जानकारी जुटाई
  • बुधवार और गुरुवार को जहरीली शराब से 14 माैत हुई, एसआईटी ने परिजनों और गवाहों से बात की

उज्जैन में जहरीली शराब से 36 घंटे में 14 लोगों की मौत मामले में एसआईटी की जांच जारी है। शुक्रवार सुबह टीम नगर निगम के पुराने दफ्तर यानी रीगल टॉकीज भवन पहुुंची। टीम ने छत्री चौक, खाराकुआं थाना, महाकाल थाना और विभिन्न रैन बसेरों में जाकर मौके का मुआयना किया। एसआईटी की टीम कंट्रोल रूम पर गवाहों और मृतक परिजनों से भी मिली। गवाही देने आए एक व्यक्ति ने बताया कि आरोपी सिकंदर और गब्बर ने कुछ दिनों पहले ही 500 रुपए खर्च कर झिंझर शराब बनाना सीखा था। वहीं, आईजी राकेश गुप्ता ने भी कहा कि गिरफ्त में आए एक आरोपी ने कबूला है कि उसने 20 से 25 दिन पहले ही झिंझर बनाना सीखा था। संभवत: इसे बनाते समय फाॅर्मेशन गड़बड़ा गया होगा। वहीं, पीएम करने वाले डाॅक्टर का कहना है कि इसे पीने से व्यक्ति पागल या अंधा भी हाे सकता है।

फरार निगमकर्मी आरोपी गब्बर को भी नौकरी से हटा दिया गया है।

फरार निगमकर्मी आरोपी गब्बर को भी नौकरी से हटा दिया गया है।

गवाहों से जब बता की गई तो उन्होंने बताया कि यह अवैध शराब का धंधा क्षेत्र में लंबे समय से चल रहा था। आरोपी पहले हैंड बैग में रखकर शराब छतरी चौक पार्क पर बेचने लाते थे। इसके बाद वे झोले में शराब भरकर लाने लगे। इन्हें ऐसा करने से मना किया गया तो भी वे नहीं मानते थे। ये निगम की पार्किंग के ऊपर और पिंजारवाड़ी क्षेत्र में शराब बनाया करते थे। पिंजारवाड़ी में तो ये स्टोव की मदद से झिंझर तैयार करते थे।

इसी प्रकार की प्लास्टिक की पोटली बनाकर झिंझर बेचते थे।

इसी प्रकार की प्लास्टिक की पोटली बनाकर झिंझर बेचते थे।

गवाहों की माने तो सिकंदर और गब्बर पहले कहावाड़ी क्षेत्र से लाकर शराब की सप्लाई करते थे। इसके बाद इन्होंने धीरे से खुद ही इसे सीखने की कोशिश की। कुछ दिन पहले ही इन्होंने 500 रुपए खर्च कर इसे बनाने की विधि सीखी थी। शायद झिंझर बनाने के दौरान इनसे कुछ चूक हुई हो। हालांकि दोनों आरोपी अभी फरार हैं। इसी बात की पुष्टि उनके गिरफ्त में आने के बाद ही होगी। उधर, शुक्रवार को जहां निगमायुक्त ने आरोपी सिकंदर और गब्बर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। वहीं, मामले में आबकारी के भी दो अधिकारियों पर गाज गिरी। आबकारी उप निरीक्षक सुनीता मालवीय और आबकारी आरक्षक रोहित लोहारिया को निलंबित कर दिया गया है।

टीम को मिली मौके से स्प्रिट की यह बोतल।

टीम को मिली मौके से स्प्रिट की यह बोतल।

आईजी बोले – एक आरोपी ने कबूला 20 से 25 दिन पहले बनाना सीखा
मामले में आईजी राकेश गुप्ता से बात की गई तो उनका कहना था कि गिरफ्त में आए एक आरोपी ने इस बात काे कबूला है कि झिंझर को बनाना का काम उन्होंने 20 से 25 दिन पहले ही शुरू किया था। यह कोई शराब नहीं है, बल्कि स्प्रिट में पानी मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। यह वही स्प्रिट है, जो घाव साफ करने के लिए अस्पतालों में उपयोग में लाया जाता है। उन्होंने बताया कि संभवत: फॉर्मेशन में गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ होगा। प्रारंभिक पीएम रिपोर्ट में जहरीले पदार्थ से मौत की बात सामने आई है। सभी आरोपियों के पकड़ने जाने और बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण पता चल पाएगा। इस बात की पुष्टि सुबह गृह विभाग के सचिव राजौरा ने भी की थी जो स्प्रिट यहां से मिला है उसे पीने में उपयोग नहीं किया जा सकता है। इस बात की जानकारी स्प्रिट की बोतल में भी लिखी रहती है।

एसआईटी ने परिजनों और गवाहों से बात की।

एसआईटी ने परिजनों और गवाहों से बात की।

इसे पीने वाला हो सकता है पागल, किडनी, लीवर सहित शरीर के अन्य अंगाें को भी करता है डैमेज
जहरीली शराब से मृत शवाें का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. जितेंद्र शर्मा ने बताया इस शराब को लंबे समय तक पीने वाला पागल हो सकता है। मानव शरीर के 9 प्रमुख तंत्र हैं। ऐसी शराब लीवर, किडनी, दिमाग और भोजन तंत्र को पूरी तरह डैमेज कर देती है। इससे आदमी अंधत्व का भी शिकार हो सकता है। इधर, गुरुवार रात प्रशासनिक व डॉक्टरों की टीम फुटपाथों का जायजा लेने निकली तो जिला अस्पताल के बाहर दाे लोग नशे में धुत्त मिले, जो फुटपाथ पर अचेत पड़े थे।



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