492 bridge will be constructed from Lamheta to Lamhetti then 450 meters from Saraswati Ghat to Guari village. | लम्हेटा से लम्हेटी तक 492 तो सरस्वती घाट से ग्वारी गाँव तक 450 मीटर का बनेगा ब्रिज

492 bridge will be constructed from Lamheta to Lamhetti then 450 meters from Saraswati Ghat to Guari village. | लम्हेटा से लम्हेटी तक 492 तो सरस्वती घाट से ग्वारी गाँव तक 450 मीटर का बनेगा ब्रिज


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जबलपुर19 घंटे पहले

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  • एक में होंगे 15 स्पॉन तो दूसरे में होंगे 6, प्रस्ताव पहले रद्द हो गया था

लम्हेटा से लम्हेटी और सरस्वतीघाट से ग्वारी गाँव तक नर्मदा के ऊपर प्रस्तावित जिन ब्रिजों को बनने रद्द कर दिया गया था, अब उनका टेण्डर लगभग फाइनल हो गया है। प्रस्ताव को एक बार फिर लोक निर्माण विभाग सेतु शाखा ने मूवमेंट में लाते हुए टेण्डर जारी किया, जिसके बाद इस टेण्डर की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है।

भोपाल में मंत्रालय स्तर पर इसको स्वीकृति जल्द मिल जाती है तो इनमें निर्माण कार्य भी जल्द आरंभ हो सकता है। जानकारी के अनुसार लम्हेटाघाट में नर्मदा के उस पार लम्हेटी तक कुल 492 मीटर का केबल स्टे ब्रिज बनना है।

सरस्वती घाट से ग्वारी गाँव तक नार्मल कुल 450 मीटर का ब्रिज बनना है। लम्हेटा ब्रिज की लागत 48 करोड़ है तो सरस्वतीघाट के ब्रिज की लागत 28 करोड़ निर्धारित की गई है। प्रक्रिया जल्द पूरी हुई तो इनका निर्माण शुरू होगा।

लोक निर्माण सेतु शाखा के प्रभाकर सिंह परिहार के अनुसार इन ब्रिजों के टेण्डर की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है। मंत्रालय से यदि एनओसी मिलती है तो निर्माण संबंधी प्रक्रिया भी आरंभ कर दी जाएगी। फिलहाल इनकी अंतिम स्वीकृति बाकी है।

गौर तलब है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार के समय इन ब्रिजों का बनाना कैंसल कर दिया गया था। पीपापुल को विकल्प के रूप में सुझाया गया पर इसको भी स्वीकृति नहीं मिली। पीपापुल को हर बार बारिश के पहले अलग करना और कई तरह के खतरे रहते हैं। कई तरह के विकल्प के बाद इनका बनना रद््द कर दिया गया था, पर अब सरकार के बदलते ही इन पुराने प्रस्तावों पर फिर से अमल शुरू हो गया है।

कुछ इस अंदाज में बनना है
लम्हेटा का ब्रिज 30 मीटर ऊँचा होगा। इसमें कुल 15 स्पॉन होंगे। यह केबल स्टे ब्रिज है। खास बात यह है कि जैसा ब्रिज अभी इलाहाबाद में गंगा और यमुना नदी के संगम में बनाया गया है, उसी अंदाज में इसको विकसित किया जाएगा। इसमें नदी के ऊपर ब्रिज करीब 300 मीटर का होगा।

नर्मदा के इस पार से उस पार तक इसमें आवागमन किया जा सकता है, इसमें स्पॉन केबल ऊपर के हिस्से में होगा। इससे अलग जो सरस्वती घाट का ब्रिज होगा उसमें 6 स्पॉन होंगे। यानी एक ब्रिज बड़ा होगा तो दूसरा उससे कुछ छोटा। बताया जा रहा है कि दोनों ब्रिजों को जरूरतों के हिसाब से आधुनिक तरीके से प्लान किया गया है।

पर्यावरण को हो सकती है हानि – संत समाज
इधर संतों और नर्मदा प्रेमियों का कहना है कि नर्मदा के ऊपर अब होने वाला कोई भी कांक्रीट निर्माण पर्यावरण को हानि पहुँचा सकता है। भेड़ाघाट की ओर व इसके आसपास दो पक्के पुल बनने से भेड़ाघाट का सौंदर्य समाप्त होने के साथ ही माँ नर्मदा को पर्यावरणीय नुकसान पहुँचेगा।

नदी की दूसरी ओर बस्तियाँ बस जाएँगी, जिनकी गंदगी स्वच्छ निर्मल जल में समाहित होगी। भारी वाहनों की आवाजाही होगी। धूल, धुएँ से वातावरण दूषित होने के साथ-साथ स्वच्छ माँ नर्मदा का आँचल भी प्रदूषित हो सकता है। स्वामी गिरीशानंद महाराज कहते हैं कि ऐसे किसी भी निर्माण को स्वीकार नहीं किया जा सकता है, जिससे माँ रेवा के मौलिक स्वरूप को हानि पहुँचे। नुकसान पहुँचाने वाले ऐसे किसी भी निर्माण का हम विरोध करेंगे।



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