वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने 25 मंत्रियों पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा था. मगर इनमें से तेरह को हार का सामना करना पड़ा था. केवल बारह मंत्री ही चुनाव जीत सके थे. हारने वालों बीजेपी सरकार में वित्त मंत्री रहे जयंत मलैया, ओम प्रकाश धुर्वे, रुस्तम सिंह, अर्चना चिटनिस, उमाशंकर गुप्ता, अंतर सिंह आर्य, जय भान सिंह पवैया, नारायण सिंह कुशवाहा, दीपक जोशी, लाल सिंह आर्य, शरद जैन, ललिता यादव, बालकृष्ण पाटीदार के नाम शामिल हैं.
वहीं वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी सरकार के 10 मंत्रियों को हार का मुंह देखना पड़ा था. इनमें अजय विश्नोई, लक्ष्मीकांत शर्मा, रामकृष्ण कुसमरिया, करण सिंह वर्मा, अनूप मिश्रा, जगन्नाथ सिंह, कन्हैयालाल अग्रवाल, हरिशंकर खटीक, बृजेंद्र प्रताप सिंह और दशरथ लोधी हार के चलते विधानसभा की दहलीज नहीं पहुंच सके थे.
बता दें कि जिन 28 सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें से 16 सीटें अकेले ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में आती हैं. यहां कांग्रेस से बीजेपी में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया का खासा प्रभाव है.मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के लिए तीन नवंबर को वोटिंग होगी और 10 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे. इसी दिन बिहार विधानसभा चुनाव का भी रिजल्ट घोषित होगा.