MP : मंत्रिमंडल विस्तार की खबर से गरमाई सियासत, विधायकों ने अपनी दावेदारी के लिए शुरू की जोर-आजमाइश। Possibility of cabinet expansion in Madhya Pradesh, MLAs start contacting | indore – News in Hindi

MP : मंत्रिमंडल विस्तार की खबर से गरमाई सियासत, विधायकों ने अपनी दावेदारी के लिए शुरू की जोर-आजमाइश। Possibility of cabinet expansion in Madhya Pradesh, MLAs start contacting | indore – News in Hindi


जल्द ही कैबिनेट विस्तार के मुद्दे पर दिल्ली जाएंगे CM शिवराज (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) जल्द ही दिल्ली की उड़ान भरेंगे और सूची को मूर्त रूप देंगे. इस हलचल के बाद इंदौर से दावेदार विधायकों (MLAs) ने भी जोर आजमाइश शुरू कर दी है.

इंदौर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) के चौथी बार सरकार बनाए जाने के बाद तीन महीने से ज्यादा का समय बीत गया है. कोरोना के फेर में शुरुआती दौर में पांच मंत्रियों को शपथ दिला दी गई थी, लेकिन अब बड़े गठन की तैयारी शुरू हो गई है. इसको लेकर पार्टी में पिछले दिनों गहन मंथन भी हुआ, जिसमें प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे (Vinay Sahastrabuddhe) भी भोपाल (Bhopal) आए थे. बताया जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान जल्द ही दिल्ली की उड़ान भरेंगे और सूची को मूर्त रूप देंगे. इस हलचल के बाद इंदौर से दावेदार विधायकों (MLAs) ने भी जोर आजमाइश शुरू कर दी है. इंदौर में दादा के नाम से मशहूर विधायक रमेश मेंदोला के लिए उनके आका राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पूरा जोर लगा रहे हैं. इसके अलावा मेंदोला की अरविंद मेनन भी मदद कर रहे हैं. उनके लिए सबसे बड़ा रोड़ा जातिगत समीकरण है .वह ब्राह्मण समाज से हैं और ब्राह्मण समाज के गोपाल भार्गव, राजेंद्र शुक्ल, संजय पाठक भी दावेदार हैं, जबकि नरोत्तम मिश्रा पहले ही मंत्री बनाए जा चुके हैं. हालांकि मंत्री बनने को लेकर रमेश मेंदौला का कहना है कि ये मेरा विषय नहीं है, आप मुख्यमंत्री से पूछिए.

दीदी, भाभी और बाबा की जोर आजमाइश जारी

दीदी यानी उषा ठाकुर के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा संघ की एक बड़ी लॉबी मदद कर रही है. वे तीन बार की विधायक भी हैं. वहीं, विधायक महेंद्र हार्डिया को मुख्यमंत्री चौहान और जातिगत समीकरण पर भरोसा है. वे चार बार से विधायक होने के साथ ग्वालियर बेल्ट में होने वाले उपचुनाव में 17 सीटों पर उनके समाज का वोट बैंक है. इसका लाभ उन्हें मिल सकता है. इस बीच भाभी यानी मालिनी गौड़ के लिए केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पैरवी कर रहे हैं. उनकी साफ छवि और इंदौर को सफाई में तीन बार नंबर वन लाने का तमगा भी मददगार बन सकता है. वे भी तीन बार से विधायक हैं. इसलिए सभी दावेदारों ने पूरी ताकत से लॉबिंग शुरू कर दी है, ताकि अंतिम समय में चूक न हो जाए. हालांकि मंत्रिपद को लेकर उषा ठाकुर काफी आश्वस्त दिखाई दे रही हैं. जब उनसे पूछा गया कि आप मंत्री पद की कब शपथ ले रही हैं, तो उन्होने कहा कि ये तो संगठन जाने जो काम मिले उसे करो इसी में आनंद है. वे काफी खुश दिखाई दे रही हैं.

चार विधायकों की खींचतान में छूट न जाए इंदौरइंदौर में राजनीतिक खींचतान के चलते शिवराज सरकार के तीसरे कार्यकाल में किसी को मंत्री नहीं बनाया गया था. ऐसा ही दांव एक बार फिर न हो जाए. चारों दावेदार ठनठन गोपाल हो जाएं या योजना के मुताबिक सीएम शिवराज सिंह चौहान विधायक मालिनी गौड़ की एंट्री करवा दें. हालांकि इस बार उनके लिए ये काम इतना आसान नहीं है, क्योंकि आखिरी मोहर दिल्ली में ही लगेगा. ऐसे में इंदौर को एक बार फिर मंत्री न मिले तो आश्चर्य नहीं होगा. हालांकि बीजेपी प्रवक्ता उमेश शर्मा का कहना है कि इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा महानगर और आर्थिक राजधानी है, इसलिए इस बार मुख्यमंत्री सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे और इंदौर जिले को भी प्रतिनिधित्व देंगे.

शिवराज नहीं चाहते इंदौर से कोई मंत्री बने – कांग्रेस

शिवराज मंत्रिमंडल में इंदौर के प्रतनिधित्व को लेकर बीजेपी पर निशाना साध रही कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला का कहना है कि कमलनाथ की सरकार ने इंदौर से सबसे ज्यादा मंत्री बनाए थे, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल का इतिहास है कि यहां सबसे कम प्रतिनिधित्व इंदौर को दिया गया. वे इंदौर को अपने सपनों का शहर बताते हैं इसलिए अभी भी उनकी इच्छा है कि वे इंदौर को प्रशासनिक अधिकारियों के सहारे चलाएं और यहां से एक भी मंत्री न बनाएं और उनको बाबा, दादा, दीदी और भाभी की रस्साकशी ने मौका भी दे दिया है. ऐसे में हो सकता है एक बार फिर इंदौर को एक भी मंत्री न मिले. शिवराज सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में इंदौर से एक भी मंत्री नहीं बनाया था और उससे पहले के कार्यकाल में भी इंदौर को सिर्फ एक राज्यमंत्री का पद दिया था. जिसमें महेन्द्र हार्डिया को स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाया गया था. इससे उलट कमलनाथ सरकार ने इंदौर से जीते अपने 4 विधायकों में से दो को मंत्री बना दिया था. इसलिए इस बार बीजेपी पर भी नैतिक दबाव बनता दिखाई दे रहा है.



First published: June 27, 2020, 5:08 PM IST





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