ऑस्ट्रेलिया ने 12 नवंबर को टेस्ट टीम घोषित की. टीम में पेस चौकड़ी के तौर पर वो नाम हैं जो किसी भी टीम को थर्रा दें. जोश हेज़लवुड, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क तो पिछली बार भी खेले थे. इस बार तिकड़ी का साथ देने के लिए जेम्स पैटिंसन भी शामिल हो चुके हैं.
Source: News18Hindi
Last updated on: November 13, 2020, 11:03 AM IST
शुरुआत से ही किस्मत मेज़बान की तरफ?
पिछली बार अगर सीरीज़ शुरु होने से पहले किस्मत ने भारत (India) का साथ दिया. इस बार ठीक उल्टा हो रहा है. भारत के सबसे करिश्माई बल्लेबाज़ विराट कोहली 4 मैचों की टेस्ट सीरीज़ में सिर्फ 1 मैच खेलकर स्वदेश लौट आएंगे क्योंकि वो पिता बनने वाले हैं. कोरोनाकाल की वजह से उनका पितृत्व अवकाश सामान्य से लंबा हो गया है. वहीं ऑस्ट्रेलिया इस बार हर तरफ पर चौतरफा हमला करना चाहता है ताकि पिछली हार को तुक्का बताया जा सके.
ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं ने इरादे साफ किए
ऑस्ट्रेलिया ने 12 नवंबर को टेस्ट सीरीज़ के लिए अपने 17 खिलाड़ियों के नाम का ऐलान किया तो इस बार पेस चौकड़ी (Australian Pace Attack) के तौर पर वो नाम हैं जो किसी भी टीम को थर्रा दे. जोश हेज़लवुड (Josh Hazlewood), पैट कमिंस (Pat Cummins) और मिचेल स्टार्क (Mitchell Starc) तो पिछली बार भी खेले थे लेकिन इस बार तिकड़ी का साथ देने के लिए जेम्स पैटिंसन (James Pattinson) भी शामिल हो चुके हैं. ज़ाहिर सी बात है ऑस्ट्रेलियाई ज़मीं पर इस चौकड़ी से बेहतरीन तेज़ गेंदबाज़ी का आक्रमण और क्या हो सकता था? पिछली बार जब हेज़लवुड-कमिंस-स्टार्क की तिकड़ी ने मिलकर साझे तौर पर 21 पारियों में 40 विकेट झटके थे. इसके जवाब में बुमराह-शमी-ईशांत की तिकड़ी 22 पारियों में 48 विकेट झटके थे और स्थानीय टीम से आक्रमण के तौर पर इक्कीस साबित हुए थे. इसके चलते टीम इंडिया को ऐतिहासिक सीरीज़ जीत नसीब हुई थी.
इकलौता स्पिनर भारतीय तिकड़ी से बेहतर
ऑस्ट्रेलिया के पास इस बार भी अपने पेस आक्रमण के अलावा ऑफ स्पिनर नाथन लॉयन (Nathan Lyon) हैं. लॉयन ने पिछली बार सीरीज़ में अकेले ही उतने विकेट (21) ले लिए थे जिसके करीब टीम इंडिया की स्पिन तिकड़ी यानि आर अश्विन, रविंद्र जडेजा और कुलदीप यादव मिलकर भी (18) नहीं पहुंच पाए थे.ऑस्ट्रेलिया का बेहद उम्दा पेस आक्रमण
इस बार भारत के पास शमी और बुमराह तो हैं लेकिन ईशांत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में कंगारुओं के विकल्प के तौर पर पैंटिसन का उपलब्ध होना उनकी टीम को भी मज़बूत ही करता है. आईसीसी की गेंदबाज़ों की रैंकिंग में भी पहले 11 स्थानों पर हेज़लवुड-कमिंस-स्ट्रार्क की तिकड़ी शामिल है जबकि भारत के लिए सिर्फ बुमराह ही 9वें नबंर पर हैं जबकि कमिंस नंबर 1 गेंदबाज़ और स्टार्क नंबर 7 हैं. यानि साख और हालिया फॉर्म के लिहाज़ से ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण भारत पर भारी पड़ता दिख रहा है. इतना ही नहीं कमिंस के 30 मैचों में 143, हेज़लवुड के 51 मैचों में 195 विकेट और स्टार्क के 57 मैचों में 244 विकेट, संख्या और विविधता दोनों के लिहाज़ से टीम इंडिया पर भारी पड़ते दिख रहे हैं. रही-सही कमी पैटिंसन पूरी करते दिख रहे है जो सबसे कम अनुभवी ज़रुर है लेकिन 21 टेस्ट में उनके 81 विकेट भी कम तो नहीं हैं. शमी ने जहां 49 टेस्ट खेलकर 180 विकेट लिए हैं वहीं बुमराह ने दिखाया उनके लिए अनुभव नाम का शब्द ज़्यादा मायने नहीं रखता है (14 मैच में 68 विकेट). लेकिन, 300 टेस्ट विकेट की दहलीज़ पर खड़े ईशांत अगर फिट नहीं होते हैं तो उनकी कमी की भरपाई करना बेहद मुश्किल होगा. न्यूज़ीलैंड के पिछले दौरे पर हमने देखा कि कैसे ईशांत जब एक टेस्ट में खेले तब भारतीय आक्रमण का क्या हाल था और जब अनफिट होकर बाहर हुए तब टीम इंडिया का कितना बुरा हाल हुआ.
मुश्किल मैदानों में होंगे मैच
भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए एक और समस्या टेस्ट मैचों के वेन्यू हो सकते हैं. टीम इंडिया जहां पहली बार विदेशी ज़मीं पर एडिलेड में पहला पिंक बॉल टेस्ट खेलेगी. वहीं पहली बार ब्रिसबेन में जीत का खाता खोलने की चुनौती होगी (पिछले 7 दशक में 5 मैचों में कभी भी नहीं जीते). गाबा में ऑस्ट्रेलिया 1989 के बाद एक भी टेस्ट मैच नहीं हारा है.
कुल मिलाकर देखा जाए तो ऑस्ट्रेलिया ने टेस्ट सीरीज़ के लिए इस बार बेहद दमदार टीम की घोषणा की है और ये टीम निश्चित तौर पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी कोहली के साथियों से छीनने का माद्दा रखती है. (डिस्क्लेमर: यह लेखक के निजी विचार हैं.)
विमल कुमार
न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.
First published: November 13, 2020, 11:03 AM IST



