में एक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक और एक ऑटोमेटिक व्हीकल टेस्टिंग और सर्टिफिकेट सेंटर बनाया गया है.
राज्य में 80फीसदी मामलों में एक्सीडेंट (Accident) में मौत की वजह वाहनों की तेज़ रफ्तार (speed) थी. इसे कम करने के उपायों पर विचार किया गया.
तेजी से बढ़ रहा है ग्राफ
पीटीआरआ (PTRI) एडीजी डीसी सागर ने मीडिया के सामने आंकड़ों का ब्यौरा रखा. उन्होंने बताया कि रोड एक्सीडेंट में हर साल मौत का प्रतिशत बढ़ रहा है. ये ग्राफ 2015 में 8.69%, 2016 में 3.65%, 2017 में 5.5%, 2018 में 5.2%, 2019 में 5.1% बढ़ा. 2014 में मौत का आंकड़ा 8569 से बढ़कर 2019 में 11249 यानी 23.82% हो गया.
लॉक डाउन के कारण कम एक्सीडेंटजनवरी से जून 2020 तक लॉक डाउन की वजह से एक्सीडेंट में मौत के ग्राफ में 2019 की तुलना में 24.4% की कमी आई. क्योंकि लॉक डाउन के कारण लोग घरों से निकले ही नहीं. सड़क सुरक्षा समिति ने बताया कि हादसों का सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना और ओवरटेक करने की होड़ है. अब मध्यप्रदेश में सड़क हादसे रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस नये सिरे से अभियान चलाएगी.
आदर्श राज्य की कल्पना
बैठक में इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की गई कि राज्य में 80फीसदी मामलों में एक्सीडेंट में मौत की वजह वाहनों की तेज़ रफ्तार थी. इसे कम करने के उपायों पर विचार किया गया. इस काम को एक मिशन के रूप में किया जाएगा ताकि प्रदेश इस मामले में आदर्श राज्य बने. मध्य प्रदेश में एक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक और एक ऑटोमेटिक व्हीकल टेस्टिंग और सर्टिफिकेट सेंटर बनाया गया है.जो अभी ऑपरेशनल हैं. भोपाल में एक और ड्राइविंग टेस्ट सेंटर चालू किया जाएगा. इसके साथ ही सभी जिलों और आरटीओ में ड्राइविंग टेस्ट सेंटर बनाने का काम जनवरी 20 21 तक पूरा हो जाएगा.
हादसे रोकने के उपायों पर चर्चा
सर्वोच्च न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष अभय मनोहर सप्रे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मध्य प्रदेश शासन के साथ बैठक की. इसमें मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग, परिवहन आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पीटीआरआई, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, सचिव गृह विभाग, आयुक्त नगरीय प्रशासन विभाग और सहायक पुलिस महा निरीक्षक पीटीआरआई मौजूद रहे.