लेटलतीफी: सरकार! दाे साल में किसानों की जमीन ही रेलवे को नहीं मिल पाई, ब्राडगेज का काम कब शुरू हाेगा

लेटलतीफी: सरकार! दाे साल में किसानों की जमीन ही रेलवे को नहीं मिल पाई, ब्राडगेज का काम कब शुरू हाेगा


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मुरैना3 घंटे पहले

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  • जौरा, कैलारस व सबलगढ़ में नवंबर बीतने तक 50-50 सर्वे नंबरों की जमीन को किसानों से लेने का काम अधूरा

साल 2020 बीतने में सिर्फ 42 दिन शेष हैं लेकिन प्रशासन ब्रॉडगेज रेल प्रोजेक्ट के लिए अभी तक जौरा, कैलारस व सबलगढ़ में किसानों की निजी जमीन अधिग्रहण के काम को पूरा नहीं कर सका है। राजस्व अफसरों की दलील है कि उपचुनाव में व्यस्त होने के कारण जमीन अधिग्रहण का काम नहीं देख पाए तो रेलवे के अफसर अभी तक जमीनों के सर्वे नंबर के रिवाइज एस्टीमेट तहसीलदारों को पेश कर रहे हैं। कुल मिलाकर दो साल में किसानों की जमीन, रेलवे के हैंडओवर नहीं की जा सकी। इससे जाहिर है कि 2021 में बड़ी रेल लाइन बिछाने का काम शायद ही शुरू हो पाए।

विधानसभा चुनाव से पहले कलेक्टर ने रेलवे के अफसरों को भरोसा दिलाया था कि अप्रैल तक जमीन अधिग्रहण की कोई फाइल मुरैना, जौरा, कैलारस, सबलगढ़ के किसी राजस्व कार्यालय में लंबित नहीं रहेगी। सबलगढ़ के 13 गांवों की जमीन के अवार्ड पारित करने की कार्रवाई जल्द पूरी कर ली जाएगी। श्योपुर कलेक्टर ने जमीन अधिग्रहण के मामले में धारा 11 के प्रकाशन की कार्रवाई का हवाला दिया था। उन्होंने मई तक 38 गांवों के किसानों की जमीन के अधिग्रहण का काम पूरा होने की बात कही थी लेकिन यह काम अभी तक पूरा नहीं हो सका।

जानिए…कहां कितनी जमीन की जरूरत और कितनी उपलब्ध

  • जौरा अनुविभाग में रेलवे को बड़ी लाइन बिछाने के लिए 76.85 हेक्टेयर जमीन चाहिए लेकिन अभी तक 61.403 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया चल रही है। राजस्व विभाग का कहना है कि रेलवे के अधिकारी आए दिन नए सर्वे नंबर लेकर जमीन अधिग्रहण के नए प्रस्ताव पेश कर जाते हैं। इससे जमीन अधिग्रहण का काम लौटकर फिर पुरानी स्थिति पर आ जाता है।
  • रेलवे की दलील है कि पुराने सर्वे नंबरों की जमीन पर आबादी घर बनाकर रह रही है। वहां मकानों की तोड़फोड़ किए जाने पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बन सकती है इसलिए कुछ जमीनों का उपयोग बदल दिया गया है। इस कारण नए सर्वे नंबर राजस्व विभाग को देने पड़े हैं।
  • कैलारस में बड़ी लाइन के लिए रेलवे ने राजस्व विभाग से 50.122 हेक्टेयर जमीन मांगी है इसमें से 38.249 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया नवंबर बीतने तक पूरी नहीं हो सकी है।
  • सबलगढ़ अनुविभाग में रेल प्रोजेक्ट के लिए 81.385 हेक्टेयर जमीन चाहिए लेकिन वहां भी नवंबर बीतने तक 2.491 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका है।
  • श्योपुर में बड़ी रेल लाइन के लिए 45 ग्रामों की भूमि इस रेल लाइन परियोजना केे लिये अधिग्रहित की जाना है। 38 गांव की निजी भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई अभी धारा 11 के प्रकाशन की स्टेज पर है।

बानमोर में हाइवे के ऊपर से निकलेगी बड़ी लाइन
रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर एसएन यादव का कहना है कि बानमोर में श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज के पास बड़ी रेल लाइन को बानमोर में हाइवे के ऊपर से निकाला जाएगा। इसकी डिजायन और ड्राइंग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण मुख्यालय को स्वीकृति के लिए भेजी जा चुकी है। अब स्वीकृति मिलने में देरी हो रही है।

उधर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संजय वर्मा का कहना है कि बड़ी रेल लाइन के नीचे से सिक्सलेन हाइवे निकाला जाएगा। सिक्सलेन हाइवे, रेल लाइन से कम से कम 5.5 मीटर नीचे होगा।

अप्रैल-2021 से पहले ही बंद होगी नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन
ग्वालियर से श्योपुर के बीच संचालित नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन को अप्रैल-2021 से पहले ग्वालियर- जौरा के बीच बंद कर दिया जाएगा। इस ट्रेन का संचालन जौरा से श्योपुर के बीच किया जाएगा। यह कार्रवाई इसलिए किया जाना जरूरी है क्योंकि नैरोगेज रेलवे ट्रैक अलाइनमेंट पर ही बड़ी लाइन बिछाने का काम चलेगा। बाद में जैसे-जैसे बड़ी रेल बिछाने का काम कैलारस, सबलगढ़ की दिशा में आगे बढ़ेगा तब नैरोगेज पैसेंजर ट्रेन का संचालन सबलगढ़ से श्योपुर के बीच तक सीमित रह जाएगी। इस प्रकार 106 साल पुरानी लाइट रेल का दौर 2022 तक समाप्त हो जाएगा।

बानमोर तक बनाया मिट्‌टी का ट्रैक
बड़ी रेल लाइन बिछाने के लिए रायरू से बानमोर गांव के बीच मिट्टी का कार्य लगभग 8 किमी में पूरा हो चुका है। ठेकेदार बानमाेर से लेकर सुमावली व जौरा तक बड़ी रेल लाइन बिछाने के लिए मिट्‌टी का ट्रैक तैयार करना चाहता है लेकिन उसे रेलवे नवंबर तक किसानों की निजी जमीन उपलब्ध नहीं करा सका है। इधर, रेलवे का दूसरा ठेकेदार रायरू से सबलगढ़ के बीच 20 बड़े व छोटे पुल-पुलिया बनाने का काम शुरू करना चाहता है लेकिन उसे जमीन अधिग्रहण में देरी के कारण रूट मैप ले-आउट नहीं मिल सका है। नतीजा है कि 2021 में भी पुल बनाने का काम शुरू शायद ही हो सके।

मुआवजा के लिए चाहिए 100 करोड़, मिले 60 कराेड़
कैलारस के 10 गांव व सबलगढ़ के 12 गांव की निजी जमीन के अधिग्रहण के लिए 100 करोड़ रुपए का मुआवजा बांटा जाना है। इसका प्रस्ताव स्थानीय अधिकारियों ने रेलवे बोर्ड को भेजा था लेकिन बोर्ड ने अभी 60 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई है।



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