बैकुंठ चतुर्दशी आज, हरिहर मंदिर पर पहुंचे भक्त: भगवान हरिहर के दर्शन मात्र से मिलता है बैकुंठ धाम, बढ़ता है यश

बैकुंठ चतुर्दशी आज, हरिहर मंदिर पर पहुंचे भक्त: भगवान हरिहर के दर्शन मात्र से मिलता है बैकुंठ धाम, बढ़ता है यश


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ग्वालियर13 मिनट पहले

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बैकुंठ चतुर्दशी पर हरिहर मंदिर में फूलों से सजे भगवान हरिहर

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को बैकुंठ चतुर्दशी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है इस दिन भगवान हरिहर के दर्शन मात्र से बैकुंठ धाम मिलता है। बैकुंठ धाम में ही भगवान विष्णु निवास करते हैं। भगवान हरिहर में आधा रूप भगवान शिव का है और आधा भगवान विष्णु का। ग्वालियर के सूबे की गोठ कैलाश टॉकीज के पास 250 साल पुराना हरिहर मंदिर है। यहां रविवार को बैकुंठ चतुर्दशी पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ रही,पर मंदिर प्रबंधन ने कोविड गाइड लाइन का पालन कराते हुए पूजा अर्जना करवाई है।

रविवार सुबह 4 बजे मंदिर के पुजारी दिलीप पराड़कर ने भगवान हरिहर को स्नान कराकर उनकी पूजा अर्चना की और मंदिर को आम भक्तों के लिए खोल दिया। पुजारी दिलीप महाराज ने बताया कि बैकुंठ चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु व भगवान शिव का भस्मासुर के वध के बाद मिलन हुआ था। सुबह 4 बजे मिलन हुआ था, इसलिए मंदिर में सुबह 4 बजे अभिषेक व काकड़ आरती की जाती है। मंदिर में स्थापित भगवान का फूलों से श्रंगार किया गया और हवन एवं पूजन के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है। इस बार कोविड गाइड लाइन का पालन किया गया है और सोशल डिस्टेंस से ही दर्शन व पूजा अर्चना कराई जा रही है। इससे आम लोगों को दर्शन का लाभ भी मिले और कोरोना संक्रमण भी न फैले। उन्होंने बताया कि मंदिर में आधे विष्णु, आधे शंकर की प्रतिमा है। लक्ष्मी-पार्वती व चारों देवी देवताओं के वाहनों की संयुक्त मूर्ति भी है। यह मूर्ति करीब 250 वर्ष पहले एक कुएं में मिली थी, जिसे बाद में स्थापित किया गया।



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