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इंदौर22 मिनट पहले
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काम बंद कर अपनी मांगों को लेकर 300 से ज्यादा कर्मचारी सड़क पर उतर आए।
कोरोना काल में जान की परवाह किए बगैर काेराेना मरीजों की सेवा में लगे स्वास्थ्यकर्मी और पैरामेडिकल स्टाफ को अब नौकरी जाने का डर सताने लगा है। गुरुवार को संविदा करने की मांग को लेकर ये स्वास्थ्यकर्मी सड़क पर उतर आए। इन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इनका कहना है कि हमने छह महीने कोरोना में ड्यूटी संभाली और अब सरकार कह रही है कि अपने घर आओ। अब हमारी जरूरत पूरी हो गई है। इन्होंने बुधवार को स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण जडिया को नियमितीकरण की मांग करते हुए सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा था।
कुछ ऐसा है आवेदन…
महाेदय, हम सभी कोविड -19 चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ (आयुष चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन) पिछले 8 महीनों से जान जोखिम में डाल कर काम कर रहे हैं। सरकार आवश्यकताओं के अनुसार हमारा अनुबंध घटा-बढ़ा रही है, किंतु हमने जिन परिस्थितियों में सरकार का साथ दिया है, उन्हें ध्यान में रखते हुए हमें संविदा में लिया जाए। सरकार के स्वास्थ्य विभाग में पर्याप्त रिक्तियां हैं। क्योंकि इतने महीनों से काम करना और अब हमें अचानक से बेरोजगार करना उचित नहीं है। हमारी प्राइवेट नौकरी और क्लिनिक भी छूट चुकी हैं।
तीन महीने की अस्थाई नौकरी थी
वहीं, मामले में सीएमएचओ डॉ. जडिया ने कहा कि इसमें डॉक्टर से लेकर स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट कैडर के करीब 300 लोग हैं। कोविड-19 में आवश्यकता पड़ने पर तीन माह की अस्थाई नौकरी का प्रस्ताव सरकार द्वारा दिया गया था, जिसमें पैरामेडिकल के छात्रों द्वारा ज्वॉइन किया गया था। इन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया गया था कि कोविड काल के लिए ही आपकी ज्वाइनिंग हो रही है। अभी भी इन्हें निकाला नहीं गया है। प्रतिमाह इनकी सेवा अवधि में वृद्धि की जा रही है। इस माह भी 31 दिसंबर तक का आदेश हमें मिल चुका है।
इनकी मांग है कि एक-एक महीने बढ़ाने के बजाय संविदा नियुक्ति कर दी जाए। इसी मांग को लेकर कल ज्ञापन दिया था। हमें इन्होंने हड़ताल पर जाने की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। बगैर जानकारी के इस प्रकार से हड़ताल पर गए हैं, जो महामारी एक्ट के खिलाफ कार्य कर रहे हैं, जो कि दंडनीय है। इनके काम बंद करने की सूचना नहीं मिली है। जहां इनकी पोस्टिंग थी, वहीं से जानकारी मंगवाई गई है। इनके कार्य नहीं करने से यदि कोरोना में किसी प्रकार की वृद्धि होती है तो ये दोषी माने जाएंगे।
सरकार हमें संविदा नौकरी पर रखे
हड़ताल पर गए मेडिकल छात्रों का कहना था कि हम लॉकडाउन के समय से काम कर रहे हैं। हमें तीन महीने के अनुबंध पर रखा गया था, जिसे बढ़कर बाद में 8 महीने कर दिया गया। कोरोना के ऐसे समय में हमने सरकार का साथ दिया है, जब सरकार को जरूरत थी। हमें सरकार या तो संविदा में रखे या स्थाई नियुक्ति दे दे, जिससे हमारा भविष्य सुरक्षित हो सके। प्रदेशभर में हमारी संख्या 7 हजार से ज्यादा है। सीएम ने इसे लेकर आश्वासन जरूर दिया है। कई जिलों में साथियों को निकाला जा चुका है। मप्र कोविड संगठन बन रहा है, संगठन के आदेश पर रणनीति पर काम किया जाएगा।
फार्मासिस्ट अनिल बच्चन ने बताया कि एनआरएचएम मप्र ने कोरोना के दौरान कार्यरत फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन की संख्या में भारी छंटनी कर दी है। जिले अब फार्मासिस्ट का एक पद कर दिया है। कोविड में मरीज तो बढ़ रहे हैं, लेकिन ये स्टाफ कम करते जा रहे हैं। हमारी मांगे पूरी नहीं करने पर हम भोपाल में धरना देंगे। इंदौर में करीब साढ़े 300 कर्मचारी विरोध में उतरे हैं। हमने सीएमएचओ से लेकर मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन सौंपा है। इंदौर में अब फार्मासिस्ट के दो पद कर दिए हैं। हमारी मांग जब तक कोरोना चल रहा है, जितनी भर्ती की गई थी, सभी को वापस नौकरी पर रखा जाए।