7000 सिम फर्जीवाड़ा मामला: ग्रामीणों के आधार कार्ड का डाटा फिल करके लगाता था अपनी फोटो, फिर एक्टिवेट कराता था फर्जी सिमें

7000 सिम फर्जीवाड़ा मामला: ग्रामीणों के आधार कार्ड का डाटा फिल करके लगाता था अपनी फोटो, फिर एक्टिवेट कराता था फर्जी सिमें


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जबलपुर23 मिनट पहले

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स्टेट साइबर सेल जबलपुर

  • स्टेट साइबर सेल ने आरोपी को सागर से दबोचा, एक संचार कंपनी का पीओएस एजेंट है आरोपी
  • फर्जी सिम एक्टिवेट कर अंतरराज्यीय सायबर अपराधियों को बेचने की आशंका

गांव वालों का आधार कार्ड और वोटर कार्ड के साथ अपनी फोटो लगाकर फर्जी सिमें एक्टिवेट कराने वाले आरोपी को स्टेट साइबर सेल ने शनिवार को सागर से गिरफ्तार किया। आरोपी एक संचार कंपनी का पीओएस एजेंट है। आरोपी के तार पिछले दिनों सात हजार फर्जी सिम मामले में गिरफ्तार हो चुके नीलेश सेन, कृष्णा मेहरा व एडविन जैकब से जुड़े हैं। ये गिरोह फर्जी तरीके से एक्टिवेट सिमों पर पेटीएम वॉलेट एक्टिव कराकर उसे पश्चिम बंगाल सहित दूसरे राज्यों के साइबर अपराधियों को बेचते थे। वहीं सिम दिल्ली में 250 रुपए की दर से बेच देते थे।

सागर से आरोपी को गिरफ्तार किया
स्टेट साइबर सेल के निरीक्षक हरिओम दीक्षित ने बताया कि एक ठगी के मामले में इस प्रकरण का खुलासा हुआ था। बीएसएनएल के अलावा अन्य कंपनियों के सिम के बारे में जांच पर पता चला कि घौसी पट्‌टी गौरझामर सागर निवासी पीओएस एजेंट नीतेश रैकवार आइडिया और वोडाफोन कंपनी की सिम एक्टिवेट कराता था। टीम ने उसके घर दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में बताया कि उसके यहां गांव के लोग सिम खरीदने आते रहते हैं। वह सभी के आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड की प्रति रखता है। इसी के डाटा को वह फिल करके अपनी फोटो लगाकर फर्जी सिम जारी कराता था।
शासकीय योजना का लाभ दिलाने का देते थे झांसा
आरोपी इतने शातिर हैं कि बड़ी मात्रा में फर्जी सिम प्राप्त करने के लिए ये अलग-अलग गांव या कस्बे में कैम्प लगाते थे। शासन से संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर यह ग्रामीणों से आधार कार्ड व वोटर आईडी प्राप्त कर लेते थे। इसका भी दुरुपयोग फर्जी सिम एक्टिवेट कराने में करते थे। आरोपी को गिरफ्तार करने वाली टीम में एसआई हेमंत पाठक, प्रधान आरक्षक मनीष उपाध्याय, शुभम सैनी व अमित गुप्ता की भूमिका रही।
ये है फर्जीवाड़े की पूरी कहानी
स्टेट साइबर सेल में राजकुमार सिंह ने शिकायत की थी कि कोई उसके नाम पर फर्जी सिम का उपयोग कर रहा है। इस सिम का उपयोग 40 हजार की ठगी में हुआ था। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि राजकुमार की सिम जिस आईएमईआई नंबर वाले मोबाइल से एक्टिवेट हुआ है, उसी से बीएसएनएल के 118 सिमें और चालू की गई हैं। इन सभी सिमों पर पेटीएम वॉलेट भी एक्टिवेट मिला और इसमें ठगी की रकम भी ट्रांसफर हुए हैं। स्टेट साइबर सेल ने जांच का दायरा बढ़ाया तो सिमों की संख्या सात हजार पहुंच गई।
चार हजार पर पेटीएम एक्टिवेट
सात हजार सिमों में लगभग चार हजार में पेटीएम एक्टिवेट मिला। हैरानी की बात ये कि सभी एक्टिवेट पेटीएम वॉलेट को पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों के साइबर फ्रॉड करने वाले अपराधी संचालित कर रहे हैं। स्टेट साइबर सेल की टीम ने इस मामले में धारा 419, 420, 468, 471, 120बी भादंवि सहित 66 सी, 66 डी आईटी एक्ट का प्रकरण दर्ज कर मामले को जांच में लिया था। तकनीकी जांच के आधार पर सेल ने बीते दिनों नीलेश सेन, कृष्णा मेहरा व एडविन जैकब को गिरफ्तार किया था।
ठगी से बचने के लिए सावधानी की विकल्प
अपने दस्तावेजों का उपयोग शासकीय कार्यालय में ही करें। कोई व्यक्ति शासन की योजनाओं के नाम पर केवायसी करने पहुंचे तो उनका परिचय पत्र, विभाग का नाम, और संबंधित पार्षद, सरपंच या सचिव की मौजूदगी में ही जानकारी सांझा करें। लोन या अन्य लालच में किसी को जरूरी दस्तावेज ना दें।
अंकित शुक्ला, एसपी, स्टेट सायबर सेल जबलपुर जोन



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