किसानों के समर्थन में युवाओं का सत्याग्रह: किसानों के संघर्ष में 1 दिन के धरने पर अन्न त्याग बैठे युवा

किसानों के समर्थन में युवाओं का सत्याग्रह: किसानों के संघर्ष में 1 दिन के धरने पर अन्न त्याग बैठे युवा


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भोपाल9 मिनट पहले

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गांधी भवन में किसानों के समर्थन में सत्याग्रह पर बैठे युवा।

  • किसानों के समर्थन में युवाओं का उपवास
  • युवाओं ने केन्द्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की

राजधानी भोपाल के गांधी भवन में किसानों के समर्थन में युवाओं का उपवास किया गया है। बता दे कि गांधी भवन में उपवास कर रहे युवा अन्नदाता के लिए 1 दिन का अन्य त्याग कर गांधी भवन में उपवास पर बैठे हैं। युवाओं का कहना है कि हम किसान के संघर्ष में उनके साथ हैं और एक दिन हम अन्य त्याग कर महसूस करना चाहते हैं कि अन्नदाता की हमारे जीवन में कितनी अहमियत है।

किसान आंदोलन के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों में आज युवा समूह सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक का उपवास किए हैं। भोपाल के गांधी भवन में 15 युवाओं ने अन्नदाताओं के समर्थन के लिए अन्न त्याग किया है। देश भर में अलग-अलग जगहों पर छोटे समूहों में या फिर व्यक्तिगत स्तर पर घरों में उपवास कर रहे युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात को सरकार तक पहुंचाया है।

अन्नदाता के लिए 1 दिन का करेंगे उपवास

सत्याग्रह पर बैठे युवाओं का कहना है कि हम अन्नदाता के संघर्ष में उनके साथ रहते हुए 1 दिन का उपवास करेंगे जिससे कि हम अपने जीवन में अन्नदाता की अहमियत को समझ पाए। वही 8 दिसंबर को भारत बंद का भी किसानों के साथ समर्थन करेंगे।

भारत में अलग-अलग जगह इस तरह का किया जा रहा है सत्याग्रह

सत्याग्रह के सदस्य ने बताया कि भारत के अलग-अलग जगह हम से जुड़े लोग इस तरह का सत्याग्रह कर रहे हैं और 1 दिन का अन्न त्याग कर रहे हैं। लोग घरों में दफ्तरों में व जहां उन्हें काम है वहां पर भी बैठकर सत्याग्रह कर रहे हैं। साथ ही सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनकी मांगों को पूरा करें।

विरोध का सबसे बेहतर तरीका है अनशन
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए गांधी भवन न्यास के सचिव दयाराम नामदेव ने कहा कि विरोध का सबसे बेहतर तरीका अनशन एवं सत्याग्रह है। केन्द्र सरकार द्वारा बनाए गए किसान विरोधी कानून के खिलाफ जब पूरे देश का किसान विरोध कर रहा है और सत्याग्रह कर रहा है, तब समाज के सभी वर्गों को उनके समर्थन में आना चाहिए। इसी क्रम में भोपाल सहित देश भर में युवाओं ने उनके समर्थन में उपवास किया है।

देश के किसान बीते 4 महीने से कर रहे आंदोलन

एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक अनीश कुमार ने बताया कि किसान दिल्ली घेरकर बैठे हैं। अपनी जायज मांगों के साथ देश के किसान बीते 4 महीने से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, मजबूरन उन्हें दिल्ली घेरना पड़ा। लॉकडाउन के समय केंद्र सरकार ने कृषि को लेकर 3 कानून बनाए, जो किसान विरोधी है, यही वजह है कि किसान आंदोलन कर रहे हैं।

कृषि कानून से किसान होगा बदहाल

किसान सत्याग्रह से जुड़े गौरव जायसवाल ने बताया कि ये कृषि कानून पूरी तरह से कृषि व्यवस्था को बदल देंगे, जिसमें किसान बदहाल हो जाएगा और निजी कंपनियां खेती के धंधे में हावी हो जाएंगी। इसका व्यापक असर पूरे समाज पर पड़ेगा।

युवा शांतिपूर्वक कर रहे किसानों का सर्मथन

सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री कुमुद सिंह ने बताया कि युवाओं ने यहां पर न केवल किसानों का समर्थन किया, बल्कि आपस में चर्चा कर इस मुद्दे को गहराई से समझने का प्रयास भी किया, ताकि वे ज्यादा मजबूती के साथ किसानों का साथ दे सकें और इस पर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर कर सकें। यह पहला मौका है जब युवा वर्ग इतने अहम मुद्दे पर सामने आया है। बहुत सारे वॉलेटियर्स उपवास कर रहे हैं। देश का युवा भी जानता है कि किसान हमारे जीवन में कितना महत्व रखते हैं। उनकी समस्या देश के हर नागरिक की समस्या है।

कार्यक्रम में युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। गांधी जी के भजन, कबीर भजन सहित जन गीत भी युवाओं ने प्रस्तुत किए। गांधी भवन में कुमुद सिंह, अनीश कुमार, गौरव जायसवाल, मोहसिन, आनंद मिश्रा, शिवाशीष, नीरू दिवाकर, सौम्या जैन, मो. साबिर, राजू, आरती, आनंद जायसवाल, कृष्णानंद पाठक, राकेश नागर और सायम ने उपवास किया।



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