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भोपाल3 मिनट पहले
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भारतीय किसान संगठन के कार्यकर्ता और प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव भोपाल के नीलम पार्क में धरने पर बैठे हैं।
- किसान नीलम पार्क में धरने पर बैठे हैं, कहा – अब कानून वापस लेने तक आंदोलन
कृषि कानून के विरोध में भारत बंद का भोपाल में ज्यादा असर नहीं दिख रहा है, लेकिन मंदसौर के आंदोलन को प्रदेश में दोहराया जा सकता है। यह बात भोपाल के नीलम पार्क में धरने पर बैठे भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कही है। उन्होंने कहा कि किसान काले कानून के विरोध में एक साथ खड़े हैं। किसानों का व्यापारियों से बात नहीं करना हमारी गलती है। हमने व्यापारी संगठन से संपर्क नहीं किया। इसके कारण भोपाल में ज्यादा असर नहीं है, लेकिन हम विश्वास दिलाते हैं कि अब भोपाल से ही आंदोलन की शुरुआत होगी। अगर मोदी की केंद्र सरकार नहीं मानती है, तो मध्यप्रदेश के हर चार किमी पर किसान जाम कर देंगे। आंदोलन को लेकर अनिल यादव से दैनिक भास्कर की खास बातचीत….

लिंक रोड नंबर-2 पर पुलिस का चेकिंग पाइंट।
सवाल : अभी तक डिमांड क्या हैं?
जवाब : अब संशोधन की बात नहीं है। यह तो बिल बनने के समय तक थी, अब तो किसान विरोधी कानूनी वापस ही होना चाहिए। बड़े पैमाने पर किसान समझ चुका है कि यह कानून चंद उद्योगपतियों के इशारे पर बनाया गया था।
सवाल : कानून में ऐसा क्या-क्या है, जो किसान और मंडियों के खिलाफ है?
जवाब : इनके मंडी एक्ट को खत्म करने का प्रावधान है। शासकीय मंडी खुली रहेगी। न्यूनतम समर्थन की बात हो रही, लेकिन उसमें गारंटी नहीं है। प्राइवेट फार्म को कानून के दायरे में लेना था। न्यायालय में नहीं जा सकते हैं। निपटारा सिर्फ कलेक्टर के पास होगा। कोर्ट का रास्ता बंद करना व्यापारी को सीधा लाभ देना है। कालाबाजारी की छूट दी जा रही है। बड़े व्यापारी स्टाक कर लेंगे। किसान दो रुपए में बेचते हैं। व्यापारी उसे बाद में 80 रुपए किलो में बेचेगा।
सवाल : व्यापारी संगठन साथ क्यों नहीं आए?
जवाब : व्यापारी संगठनों से बात नहीं करना हमारी गलती है। हमने उन्हें लिखित में नहीं दिया था, इसलिए वे समर्थन में नहीं आए। यही कारण है कि भोपाल में इसका ज्यादा असर नहीं है। हमने व्यापारी संगठन से बात की है, तो उन्होंने कहा कि साथ हैं, लेकिन बंद नहीं होंगे।
सवाल : प्रदर्शन में संख्या बल कम क्यों है?
जवाब : यहां बैठना जरूरी नहीं है। सभी जिला अध्यक्षों को वापस भेजा गया है। सभी जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। शहरी क्षेत्र में उसका असर नहीं है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में असर है।
सवाल : क्या मंदसौर जैसे आंदोलन की पुनरावृत्ति हो सकती है?
जवाब : अगर सरकार नहीं मानी, तो आंदोलन को आगे ले जाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मंदसौर आंदोलन से बड़ा आंदोलन होगा। भोपाल में इतनी भीड़ होगी की जगह नहीं मिलेगी।
सवाल : क्या कारण है कि मध्यप्रदेश में देरी से आंदोलन शुरू हुआ?
जवाब : ऐसा नहीं है। हम दिल्ली गए, लेकिन ज्यादा नहीं दिख पाए। जागरुक करने में देरी हुई, लेकिन अब हम केंद्र सरकार के खिलाफ तैयार हो चुके हैं।
भोपाल में ज्यादा असर नहीं
भोपाल में सामान्य दिनों की तरह ही सभी मार्केट खुले रहे। व्यापारी संगठनों के साथ नहीं आने के कारण आंदोलन का यहां ज्यादा असर नहीं रहा। भोपाल में लोकल मार्केट से लेकर न्यू मार्केट, दस नंबर, जहांगीराबाद और पुराने भोपाल में सभी दुकानें और बाज खुले।
सड़क पर चौकसी
भोपाल में चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा बैठाया गया है। जगह-जगह स्टापर लगाकर चेकिंग की जा रही है। इधर, किसानों के द्वारा किए जा रहे भारत बंद को लेकर राजधानी भोपाल में सिख समाज के लोग सड़कों पर उतर आए। एमपी नगर इलाके में घूम घूम कर रैली निकालकर दुकानदारों से बंद करने की अपील कर रहे हैं।