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मुरैना21 घंटे पहले
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ई-कार्यशाला में विचार व्यक्त करते प्रोफेसर।
- मानव अधिकार एवं सुशासन विषय पर पीजी कॉलेज में हुई ई-कार्यशाला
अधिकार मांगना सही बात है, लेकिन इसके साथ-साथ नागरिकों को अपने कर्तव्यों व जिम्मेदारियों का भी ईमानदारी से निर्वहन करना होगा। मानव अधिकारों को लेकर नागरिक का सरकार व नागरिक का नागरिक से वास्ता पड़ता है। इस स्थिति में यह आवश्यक है कि आम नागरिक समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए विकास में अपना योगदान दें। यह बात गुरुवार को पीजी कॉलेज में मानव अधिकार एवं सुशासन विषय पर आयोजित ई-कार्यशाला में प्रभारी प्राचार्य डॉ एस गहलौत कह रहे थे।
इसी क्रम में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि रंजन ने विषय प्रर्वतन करते हुए कहा कि सोच में परिवर्तन लाकर ही अधिकारी मानव अधिकारों के प्रति संवेदनशील बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को समस्या का नहीं बल्कि समाधान का हिस्सा बनना होगा। प्रशासनिक स्तर पर ऐसा माहौल तैयार करना होगा ताकि मानव अधिकारों का हनन न हो सके। शासकीय कन्या महाविद्यालय मुरार ग्वालियर के डॉ रतन सिन्हा ने कहा कि मानवाधिकारों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को न केवल संवेदनशील बनना होगा, बल्कि स्वयं को सुशासन का हिस्सा भी बनाना होगा। महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ साधना दीक्षित ने कहा कि सोच में परिवर्तन लाकर ही अधिकारी मानव अधिकारों के प्रति संवेदनशील बन सकते हैं।
श्रीमती दीक्षित ने बताया कि मानव अधिकारों के मामले में भारत दूसरे देशों से कहीं बहुत आगे है। उन्होंने अफ्रीका के देशों का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में आज भी गृह युद्ध जैसी स्थिति है और किसी भी नागरिक को यह नहीं पता कि वह कल की सुबह देख भी पाएगा या नहीं। इन देशों में आपसी संघर्ष में लाखों लोगों की मृत्यु हो चुकी है। आज संपन्नता को आंकने का पैमाना बदल गया है। पहले प्रति व्यक्ति से आय किसी भी देश की संपन्नता का अनुमान लगाया जाता था लेकिन अब इसका स्थान मानव विकास सूचकांक ने ले लिया है। कार्यक्रम का संचालन मानव अधिकार प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ दिलीप कटारे ने किया। कार्यशाला में 100 अधिक लोगों ने दी गई लिंक पर ऑनलाइन भागीदारी की। ई-कार्यशाला में डज्ञॅ आरपी सिंह ने तकनीकी सहयोग दिया। अंत में एनसीसी अधिकारी डॉ. आरएल सखवार ने सभी सहभागियों को आभार व्यक्त किया।