MP के 5 बड़े सरकारी स्कूलों से रिपोर्ट: कल से खुलेंगे स्कूल; जबलपुर में 33% स्टूडेंट्स बुलाए जाएंगे, इंदौर में एंट्री के पहले टेम्प्रेचर नापेंगे

MP के 5 बड़े सरकारी स्कूलों से रिपोर्ट: कल से खुलेंगे स्कूल; जबलपुर में 33% स्टूडेंट्स बुलाए जाएंगे, इंदौर में एंट्री के पहले टेम्प्रेचर नापेंगे


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मध्यप्रदेश13 मिनट पहले

जबलपुर के एक स्कूल में छात्राएं कल से लगने वाली क्लासेस की जानकारी लेने पहुंची, पर टीचर्स ने उन्हें क्लास में बैठाकर पढ़ाना ही शुरू कर दिया।

  • प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा
  • सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन के साथ मॉनीटरिंग सबसे बड़ी चुनौती

प्रदेश सरकार कल से 10वीं और 12वीं के सभी स्कूल खोलने जा रही है। प्राइवेट स्कूल संचालकों के दबाव में यह फैसला लिया गया है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती सरकारी स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग रखना और कैम्पस का सैनिटाइजेशन कराना है। ऐसे में हर जगह स्कूल मैनेजमेंट कोरोना से बचने के लिए अपना-अपना फॉर्मूला लागू कर रहा है। जबलपुर के एक स्कूल ने सिर्फ 33% छात्रों को पढ़ाने का फैसला लिया गया है। ग्वालियर के सबसे बड़े हायर सेकेंडरी स्कूल में ऑड-ईवन के आधार पर क्लासेस चलेंगी। इंदौर में स्कूल में एंट्री के पहले टेम्प्रेचर नापा जाएगा।

दैनिक भास्कर ने सरकारी स्कूलाें के प्रिंसिपल से बात की तो पता चला कि पहले दिन 25% से 35% छात्रों की पढ़ाई के लिहाज से तैयारियां की हैं। उनका मानना है कि इससे ज्यादा स्टूडेंट्स नहीं आएंगे। दावा तो किया गया है, लेकिन गाइडलाइंस के पालन की मॉनीटरिंग कैसे होगी, ये कोई नहीं बता रहा है। सरकार ने कहा है कि पहले दिन पैरेंट्स-टीचर मीटिंग करवाएं। यह भी साफ कर दिया है कि जो पैरेंट्स न आएं, उनसे ऑनलाइन चर्चा करें।

इंदौर : एक स्कूल में 800 छात्राएं, सोशल डिस्टेंसिंग चुनौती

इंदौर के कन्या स्कूल अहिल्या आश्रम में क्लास के बाहर सैनेटाइजर का इंतजाम किया गया है।

कन्या स्कूल अहिल्या आश्रम-2 में दसवीं और बारहवीं की करीब 800 छात्राएं हैं। स्कूल में 16 कमरे और 15 टीचर्स हैं। यहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना सबसे बड़ी चुनौती है। प्राचार्य सुनीता ठक्कर कहती हैं कि सभी का टेम्प्रेचर देखा जाएगा। हैंड वॉश का इंतजाम करा दिया है।

भोपाल : कम ही स्टूडेंट्स आने की उम्मीद

भोपाल के सरोजिनी नायडू कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में गेट पर सैनेटाइजर की व्यवस्था की गई है।

भोपाल के सरोजिनी नायडू कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में गेट पर सैनेटाइजर की व्यवस्था की गई है।

सरोजनी नायडू कन्या हायर सेकेंडरी में दसवीं-बारहवीं में 550 से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं। यहां स्कूल के बाहर ही सैनेटाइज कराए जाएंगे। स्कूल प्रबंधन को 25 से 35 फीसदी स्टूडेंट्स के ही आने की उम्मीद है। ज्यादातर छात्राएं दूर से आती हैं, उनके लिए सस्ते ट्रांसपोर्ट साधन में आने पर सोशल डिस्टेंस नहीं रख पाने का डर रहेगा। सरकार ने पहले दिन 18 दिसंबर को अभिभावकों को भी बुलाया है।

जबलपुर : चार घंटे का स्कूल, 33% स्टूडेंट आएंगे

जबलपुर के एमएलबी स्कूल में दसवीं में 200 और 12वीं में 250 छात्राएं हैं। एक तिहाई बच्चों को ही बुलाने का फैसला किया गया है। कहा है कि सहमति पत्र जरूर साथ लेकर आएं। स्कूल चार घंटे चलेगा। इधर, कुछ छात्राएं जानकारी लेने के लिहाज से 17 दिसंबर को ही स्कूल पहुंच गईं तो उन्हें कक्षा में बैठाकर पढ़ाई कराई गई। प्राचार्य प्रभा मिश्रा ने कहा कि क्लास में प्रवेश और वापसी पर सैनिटाइजेशन अनिवार्य किया है। जो बच्चे स्कूल नहीं आएंगे, उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी।

ग्वालियर : 50% ही बुलाएंगे, अटेंडेंस रजिस्टर से लागू करेंगे ऑड-ईवन

पद्मा कन्या स्कूल में सैनिटाइजर मशीन को जांचा जा रहा है।

पद्मा कन्या स्कूल में सैनिटाइजर मशीन को जांचा जा रहा है।

ग्वालियर के 506 हायर सेकेंडरी स्कूलों में पद्मा कन्या स्कूल सबसे बड़ा माना जाता है। यहां दसवीं और बारहवीं में 939 छात्राएं हैं। इसके चलते यहां ऑड-ईवन फॉर्मूले से पढ़ाई होगी। जिन छात्राओं का अटेंडेंस रजिस्टर में नंबर 1, 3, 5 है, उन्हें सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को बुलाएंगे। जिनका 2, 4, 6 पर है, वे मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को स्कूल जाएंगी। 10 टीचर्स को पढ़ाई का जिम्मा सौंपा है। एक कक्षा में 25 से 30 छात्राओं को बैठाया जाएगा। स्कूल का समय दोपहर 12 से 5 बजे का होगा।

उज्जैन : 17 कमरे सैनिटाइज किए, एक में 20 छात्राएं ही बैठेंगी

कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई शुरू हो गई है।

कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई शुरू हो गई है।

उज्जैन के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हाई स्कूल में 227 छात्राएं और हायर सेकेंडरी में 252 छात्राएं हैं। स्कूल में 17 कमरे ही हैं। इसके चलते एक कमरे में 20 से 25 छात्राएं बैठाकर सोशल डिस्टेंसिंग का दावा किया जा रहा है। मास्क और सैनिटाइजर का भी इंतजार किया जा रहा है।

कम उपस्थिति रहने का यह भी कारण

स्कूल की अटेंडेंस कम रहने की वजह ट्रांसपोर्टेशन के साधन सीमित होना भी है। स्कूल दूर होने से कई स्टूडेंट्स वैन से सफर करते हैं, क्योंकि यह सस्ता पड़ता है। वैन में सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रहने से परिवार भेजने से बच सकते हैं।



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