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नागदा10 मिनट पहले
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- बार एसोसिएशन अध्यक्ष के संगीन आरोप, डायस पर प्रभारी तहसीलदार गुहा को कहा-
नागदा तहसील न्यायालय में लगातार हो रही गड़बड़ियों, अनदेखी और बाबुओं के टालमटोल भरे रवैये पर गुरुवार को वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा। अभिभाषक संघ नागदा के अध्यक्ष विनोदसिंह रघुवंशी ने तहसील न्यायालय में ही प्रभारी तहसीलदार आर.के. गुहा के समक्ष सार्वजनिक रूप से कई संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि बाबू तहसील न्यायालय चला रहे हैं। डेढ़ हजार फाइलें गायब हैं। हर काम के रेट हैं, बाहर एक लिस्ट लगा दो। बार एसोसिएशन अध्यक्ष रघुवंशी स्वयं सीमांकन के मामले को लेकर तहसील न्यायालय गए थे। उनका कहना था कि सीमांकन के एक मामले में उन्होंने 14 अक्टूबर को एक ऑर्डर करवाया था, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों की वजह से आरआई की रिपोर्ट आना थी। आरआई ने 2 दिसंबर को तहसील न्यायालय में फाइल भी दे दी, लेकिन तहसील न्यायालय के बाबू संतोष मोरे उन्हें चक्कर लगवाते रहे और मार्गदर्शन लेने की बात कहते रहे। तहसील न्यायालय के बाबू उन्हें 17 दिसंबर तक भी फाइल ढूंढवाने की बात कहते रहे। इस पर रघुवंशी के साथ ही अन्य वकीलों का गुस्सा भी फूट पड़ा। साथी वकीलों के साथ रघुवंशी तहसील न्यायालय पहुंचे। इस समय प्रभारी तहसीलदार गुहा डायस पर ही बैठे थे। उनके सामने ही रघुवंशी ने तहसील न्यायालय की व्यवस्थाओं को कठघरे में खड़ा करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। प्रभारी तहसीलदार गुहा चुपचाप बैठे उनकी बात सुनते रहे। लगभग आधा घंटा तहसील न्यायालय में हंगामा चलता रहा। प्रभारी तहसीलदार के आश्वासन के बाद रघुवंशी सहित अन्य वकील वापस लौटे। हंगामे की वजह से आधा घंटा तहसील न्यायालय में गहमागहमी बनी रही। हंगामे के बाद रघुवंशी से चर्चा की तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि कुछ अभिभाषकों की समस्या थी, जिसको लेकर गए थे।
रघुवंशी ने कहा- आपके ऑर्डर को भी घोल पर पी रहे हैं
- कुछ तो भी हो रहा है, ये (बाबू) हर आदमी को बेवकूफ समझ रहे हैं साहब।
- अंकुश आपको (तहसीलदार) रखना चाहिए, वो अंकुश तो जाने कहां गया, वो आपको, आपके ऑर्डर को भी घोल कर पी रहे हैं। वो न्यायालय चला रहे हैं या आप चला रहे हैं, हमें तो यही समझ नहीं आ रहा है।
- बाबू वकीलों को कुछ नहीं समझ रहे हैं। वकीलों की कोई इज्जत ही नहीं करते।
- गलती आपकी (तहसीलदार) नहीं है। गलती इन लोगों की है, जानबूझकर किसी चीज को कहां दबाना है और कब निकालना है, यह इनसे सीख लो।
- जो जूनियर आए हैं, वह क्या कमा लेंगे और क्या खा लेंगे। बाबू चला रहे हैं, जैसा चल रहे हैं। फलानी फाइल का इतना, तो वह बिल्कुल फिक्स है, देना ही है इनको।
- ऑर्डर निकालने, दर्ज करने के भी लिए ला भाई। तो यह बेचारे (अन्य जूनियर वकील की ओर इशारा करते हुए) यह कमाने वाले कहां से कैसे कमाएंगे। या तो एक लिस्ट लगा दो कि यह फेहरिस्त है।
- इन (बाबुओं) पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी है। तहसील न्यायालय में इसलिए हमारे जैसा वकील वकालात करने आता ही नहीं है। क्योंकि हमें मालूम है कि यहां न्याय नहीं है। इनके जैसे बाबू चला रहे हैं, हमारी तहसील न्यायालय को। यह जैसा चला रहे हैं वैसा धक रहे हैं, चल रहे हैं।
- डेढ़ हजार फाइलें गायब हैं इस कोर्ट परिसर के, इस न्यायालय के अंदर। जूनियर बाहर आकर व्यथित होते हैं। रोते हैं कि फाइल ही नहीं मिल रही है। खुद ढूंढते हैं यहां बैठकर, बंडलों के अंदर। यह हालत है तो कैसे-क्या काम चलेगा।