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- Ujjain’s Attendance On The First Day Of School Is Low, Parents Are Also Confused To Send Their Children To School
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उज्जैनएक घंटा पहले
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शासकीय उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय माधव नगर में हाईस्कूल में सिर्फ तीन छात्राएं आईं
- पैरेंट्स-टीचर मीटिंग के बाद बढ़ सकती है स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति
शुक्रवार से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कक्षाएं नियमित हो गईं। कोविड-19 गाइडलाइन और सरकार की ओर से जारी एसओपी का पालन करते हुए स्कूलों ने छात्र-छात्राओं के बैठने की व्यवस्था की है। हालांकि पहले दिन स्कूलों में बच्चों की संख्या काफी कम रही। शासकीय उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय माधवनगर में हाईस्कूल में कुल तीन छात्राएं ही आईं। जबकि यहां पर हाईस्कूल में 268 और इंटरमीडिएट में 487 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। प्रिंसिपल ने बताया कि अब भी ज्यादातर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। शुक्रवार को पैरेंट्स-टीचर मीटिंग रखी गई है। उसमें अभिभावकों से बात की जाएगी। उन्हें स्कूल की ओर से बच्चों को संक्रमण से दूर रखने के लिए की गई व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।
तीन दिन छात्र और तीन दिन छात्राओं को बुलाने का शेड्यूल बनाया
उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल ने बताया कि छात्र-छात्राओं को अलग-अलग दिन स्कूल आने का शेड्यूल बनाया गया है। सोमवार, मंगलवार और बुधवार को छात्र और गुरुवार, शुक्रवार व शनिवार को छात्राओं की कक्षाएं चलाई जाएंगी। प्रत्येक दिन दो पालियों में कक्षाएं चलेंगी। पहली पाली सुबह आठ से दोपहर 11 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 11.30 बजे से 2.30 बजे तक होगी।

शासकीय कन्या उमा विद्यालय दशहरा मैदान में 12वीं की छात्राएं
हॉस्टल नहीं खुलने से छात्राओं की उपस्थिति कम
शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दशहरा मैदान में 10वीं में 227 और 12वीं में 252 छात्राएं हैं। शुक्रवार को व्यावसायिक संकाय में 35 में से 27 छात्राओं की उपस्थिति रही। प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में ज्यादातर छात्राएं हॉस्टल में रहती हैं। चूंकि हॉस्टल अभी खुले नहीं हैं इसलिए छात्राओं की संख्या काफी कम है।
अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने में असमंजस में
ज्यादातर अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असंमजस में हैं। जहां एक ओर पढ़ाई ठप होने से उन्हें बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता है वहीं दूसरी ओर उनके स्वास्थ्य के प्रति भी सजग हैं। अभिभावक कृष्ण गोपाल शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन कक्षाएं चलने से बच्चों को विषयों के बारे में गहराई जानकारी नहीं हो पा रही है। उनका कहना था कि जिस तरह से देश के अन्य राज्यों में स्कूलों में बच्चों के संक्रमित होने की खबरें आ रही हैं उससे उन्हें डर लग रहा है। अभिभावक आशुतोष पांड्या का कहना है कि ईश्वर न करे कोई बच्चा संक्रमित हो और अगर वह संक्रमित हो जाता है तो उसके पैरेंट्स तो परेशान हो जाएंगे। संक्रमित बच्चे के साथी बच्चों के अभिभावकों में संक्रमण का भय बैठ जाएगा। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज करने लगेंगे।