मतदाता सूचियों (Voter list) में ऐसे कई व्यक्ति शामिल हैं जिनका नाम दोनों जगह की सूचियों में दर्ज किया गया है. सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि दोनों ही मतदाता सूचियों में परिचय पत्र का क्रमांक अलग-अलग है.
मतदाता सूचियों (Voter list) में ऐसे कई व्यक्ति शामिल हैं जिनका नाम दोनों जगह की सूचियों में दर्ज किया गया है. सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि दोनों ही मतदाता सूचियों में परिचय पत्र का क्रमांक अलग-अलग है.
जबलपुर के 79 वार्डों के लिए तैयार की गई मतदाता सूची को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से सवाल खड़े किए गए हैं. दरअसल निर्वाचन आयोग की ओर से जारी की गई मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम दो सूचियों में दर्ज हैं. नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के सदस्य मनीष शर्मा का कहना है निर्वाचन आयोग के जिम्मेदार अधिकारियों ने मतदाता सूची में बड़ा गड़बड़झाला किया है. आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची में एक व्यक्ति का दो जगह नाम दर्ज है और ऐसे एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों मामले सामने आ जाएंगे.
दो सूचियों में नाम
मंच ने निर्वाचन अधिकारी को शिकायत सौंपते हुए मतदाता सूची निरस्त करने की मांग उठाई है. निर्वाचन आयोग को ऐसे नामों की जानकारी देते हुए मंच के सदस्यों ने बताया कि कमला नेहरू वार्ड के भाग क्रमांक 11 और 13 की मतदाता सूचियों में ऐसे कई व्यक्ति शामिल हैं जिनका नाम दोनों जगह की मतदाता सूचियों में दर्ज किया गया है. सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि दोनों ही मतदाता सूचियों में परिचय पत्र का क्रमांक अलग-अलग है.एक नज़र इधर
उदाहरण के लिए जबलपुर के वार्ड क्रमांक 19 का ही उदाहरण देख लीजिए. यहां वार्ड क्रमांक 19 के भाग 13 में – 862 नंबर में रेखा नाम की मतदाता का नाम दर्ज है.इनके पति का नाम रविशंकर है. उनका मकान नंबर 1801 है.इसी वॉर्ड के भाग क्रमांक 11 में भी मतदाता सूची में 232 नंबर पर रेखा का ही नाम दर्ज है. इसके पति का नाम रविशंकर है और मकान का नंबर 1804 है.ऐसे ही सैकड़ों मतदाता सिर्फ एक ही वॉर्ड में पाए गए हैं. हैरानी की बात है कि मतदाता एक है लेकिन परिचय पत्र क्रमांक अलग-अलग हैं.
सवाल ये है…
आखिरकार यह कैसे संभव हो सकता है कि एक ही व्यक्ति के दो पहचान पत्र हों. मंच के सदस्य मनीष शर्मा का कहना है जब मतदाता सूची में नाम दर्ज किए जा रहे थे तब जिम्मेदार अधिकारियों ने इस बात पर गौर क्यों नहीं किया. यदि इस तरह की मतदाता सूची के साथ नगरीय निकाय चुनाव होते हैं तो चुनाव में फर्जी मतदान के पूरे आसार हैं. मंच ने मांग की है कि मतदाता सूची को तत्काल निरस्त किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. मंच ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने मतदाता सूची पर कोई कार्रवाई नहीं की तो वो हाईकोर्ट जाएंगे. जब जिम्मेदार अधिकारियों से हमने बातचीत करने की कोशिश की तो उन्होंने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया.