मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र महज 3 दिन का होगा
विधानसभा (Assembly) का यह सत्र इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सदन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाना है. लेकिन 3 दिन के इस सत्र में क्या स्पीकर (Speaker) का चयन हो पाएगा इस पर अभी भी संशय बना हुआ है.
कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पहले ही यह ऐलान कर चुकी है कि किसानों के मुद्दे पर वह विधानसभा का घेराव करेगी. खुद पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ और कांग्रेस के सभी विधायक ट्रैक्टर पर सवार होकर विधानसभा पहुंचेंगे. ऐसे में देखना यह होगा कि आखिरकार सदन में किस की रणनीति किस पर भारी पड़ती है.
कितना अहम है सत्र ?
28 दिसंबर से शुरू हो रहा मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र महज 3 दिन का होगा.यह सत्र इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार को अपने खर्चे चलाने के लिए अनुपूरक बजट को पास करवाना है. इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण लव जिहाद से जुड़ा हुआ विधेयक भी सरकार विधानसभा में लेकर आएगी. हाल ही में हुए उप चुनाव जीतकर आए विधायकों को भी इसी सत्र के दौरान शपथ दिलायी जाएगी. कांग्रेस ने सत्र छोटा होने पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर चर्चा से भाग रही हैक्या स्पीकर का होगा चुनाव ?
विधानसभा का यह सत्र इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सदन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाना है. लेकिन 3 दिन के इस सत्र में क्या स्पीकर का चयन हो पाएगा इस पर अभी भी संशय बना हुआ है.माना जा रहा है कि बीजेपी विधायक दल की बैठक के दौरान इस मुद्दे पर भी रणनीति बनेगी. मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा को बतौर प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया था. उसके बाद कोरोना काल की वजह से काफी वक्त तक सत्र नहीं हो सका. बाद में एक दिन का सत्र बुलाया गया,लेकिन उसमें स्पीकर का चयन नहीं हो सका. रामेश्वर शर्मा प्रोटेम स्पीकर के तौर पर पद पर बने रहे. वह प्रोटेम स्पीकर के पद पर सबसे ज्यादा वक्त तक रहने का रिकॉर्ड कायम कर चुके हैं.