- Hindi News
- Local
- Mp
- Sagar
- More Than 100 Marriages In 25 Years, 70% Settled Abroad With Husband, Children’s Names On Indian Culture
Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप
संदीप तिवारी | सागर44 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
खजुराहो के अंजुम सिंह ने रशिया की स्वेतलाना से शादी की चौथीं वर्षगांठ मनाई।
- डॉ. हरीसिंह गौर विवि की ‘अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक विवाह’ की रिसर्च रिपोर्ट का दावा
- पहले विवाह पर युवक का बहिष्कार हुआ था, लेकिन अब मिल रही मान्यता
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल खजुराहो में 25 साल में 100 से ज्यादा परिवार में विदेशी बहुएं आईं, लेकिन इनमें से 70 फीसदी अपने ससुराल में नहीं रुकीं। वे पति को लेकर विदेश जा बसीं। ये युवतियां भारतीय संस्कृति से प्रभावित थीं, इसलिए बच्चों के नाम भारतीय संस्कृति पर रखे। ये भारतीय त्योहार तो मनाती हैं लेकिन सामाजिक कार्यों में भाग नहीं लेतीं। यह तथ्य डॉ.हरीसिंह गौर विवि में हुई रिसर्च में सामने आए हैं। समाज शास्त्र एवं समाज कार्य विभाग के शोधार्थी डॉ. शशिकांत अवस्थी ने प्रो.दिवाकर शर्मा के निर्देशन में यह शोध किया है।
शोध का विषय है- ‘क्रॉस सांस्कृतिक विवाह अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में: खजुराहो पर्यटन के विशेष संदर्भ में।’ इसमें पाया 25 साल पहले खजुराहो के रिक्शा चालक ने जापान की लड़की से विवाह किया था तो उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया था। फिर एक प्रतिष्ठित परिवार के एक सदस्य ने ऑस्ट्रेलिया की युवती से विवाह किया और उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई। इसके बाद ऐसे विवाह बहिष्कृत श्रेणी से बाहर हो गए।
भारतीय नाम जो इन दंपतियों ने अपनी संतानों के रखे
ज्यादातर जोड़ों ने वीजा के लिए दिल्ली में विवाह पंजीयन कराया और फिर विदेश चले गए। वहां जन्मे बच्चों के नाम अथर्व, श्रेष्ठ, श्रेणिक, रेहान रखे।
10 जोड़ों पर अध्ययन, रोजगार के लिए विदेश में बसना पड़ा
अध्ययन में पाया कि 10 में से 7 जोड़े विदेश जाकर बस गए। इसका सबसे बड़ा कारण सामने आया कि स्थानीय बाजार व पर्यटन में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने से इन्हें देश छोड़ना पड़ा।
केस स्टडी : शादी के बाद किसी ने भी धर्म-संस्कृति नहीं बदली, आर्थिक रूप से समृद्ध हो गए
12वीं तक पढ़ा युवक पर्यटन क्षेत्र से जुड़ा था। 2009 में स्विट्जरलैंड की युवती से खजुराहो के मतंगेश्वर मंदिर में विवाह किया। बच्चे का नाम हिंदू नामावली के अनुसार रखा। युवक वैश्य है, युवती क्रिश्चियन है।
8वीं तक पढ़ा मुस्लिम युवक फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता था। 2011 में कनाडा की युवती से मिला। दोनों ने आर्य समाज मंदिर दिल्ली में विवाह किया। अब कनाडा में रहते हैं। संतान का नाम मुस्लिम धर्म अनुसार रखा।
खजुराहो के पास के गांव का युवक टैक्सी चलाता था। 2009 में ब्रिटिश मूल की युवकी से हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। बेटी का नाम हिंदू धर्म के अनुसार रखा। ये दंपती अब लंदन में होटल चलाते हैं।
विदेशी पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर भारतीय संस्कृति का ज्यादा प्रभाव
- भारतीय युवतियों की अपेक्षा युवकों को अंतरराष्ट्रीय विवाह की स्वीकृति समाज ज्यादा दे रहा है।
- विदेशी पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव अधिक पड़ रहा है, वे यहां के युवकों से भी प्रभावित हो रही है।
- दूसरी संस्कृति से आई महिला भारतीय सामाजिक कार्यो में रुचि नहीं लेती।
- विदेशी बहुएं भारतीय त्योहारों को मनाती हैं।
- माता-पिता के संबंध पुत्र तक ही सीमित रह जाते हैं।
- खजुराहो में ऐसे विवाह एक अवसर की भांति हैं, जो बेरोजगार युवाओं को एक सुपरफिशियल जिंदगी देती है। जिसमें नौकरी एवं पत्नी दोनों ही मिल जाती है।
- खजुराहो के युवकों में इस तरह के विवाह के प्रति रुझान बढ़ रहा है।