हबीबगंज स्टेशन का कायापलट: चमचमाते ग्लास डोम गेट से एंट्री, कॉनकोर्स देगा एयरपोर्ट का फील; एक साथ 700 यात्री बैठेंगे, लगेगा कि जैसे जर्मनी के हाइडलबर्ग स्टेशन पर हैं

हबीबगंज स्टेशन का कायापलट: चमचमाते ग्लास डोम गेट से एंट्री, कॉनकोर्स देगा एयरपोर्ट का फील; एक साथ 700 यात्री बैठेंगे, लगेगा कि जैसे जर्मनी के हाइडलबर्ग स्टेशन पर हैं


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भोपाल2 घंटे पहलेलेखक: सुमित पांडेय

भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन के रि-डेवलपमेंट का काम करीब-करीब पूरा हो गया है। यहां पर विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।

  • 31 मार्च को राष्ट्र को समर्पित हो जाएगा देश का पहला पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) वाला रेलवे स्टेशन

रेलवे स्टेशन का नाम लेने पर भीड़ धक्का मुक्की और भाग-दौड़ याद आने लगती है और अनुभव भी अच्छा नहीं होता है। ट्रेनें लेट चलने के कारण समय पर स्टेशन पहुंचे लोग भारी भीड़ में धक्का-मुक्की सहने को बाध्य होते हैं। बैठने के लिए जगह नहीं, शौचालय का इंतजाम नहीं और तमाम परेशानियां। लेकिन अब ये सारी परेशानियां कम से कम भोपाल के इस स्टेशन पर नहीं दिखाई देंगी। हम बात कर रहे हैं भोपाल का हबीबगंज रेलवे स्टेशन (Habibganj Railway Station) की। जो अब पूरी तरह से नए रूप में दिखाई देगा। इसका रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट आखिरी दौर में पहुंच गया है और इसमें बदलाव दिखने लगे हैं।

भोपाल का हबीबगंज रेलवे स्टेशन अब पूरी तरह से नए रूप में दिखाई देगा।

स्टेशन में एक नंबर प्लेटफार्म की तरफ से एंट्री ग्लास डोम वाले चमचमाते गेट से होगी और एक्सलेटर के जरिए यात्री सीधे एयर कॉनकोर्स में पहुंच जाएगा। यहां पहुंचकर यात्री को एयरपोर्ट वाला फील मिलेगा। सभी पांच प्लेटफार्म को इस कॉनकोर्स को एस्कलेटर और सीढिय़ों के जरिए जोड़ा गया है। ये स्टेशन जर्मनी के हाइडलबर्ग (Heidelberg) रेलवे स्टेशन की तर्ज पर होगा, जो एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के कारण मशहूर है।

एक नंबर और पांच नंबर प्लेटफार्म की तरफ से एंट्री लेने वाले यात्रियों को यहां ट्रेन का इंतजार करते समय परेशानी नहीं होगी, क्योंकि यहां उनके बैठने की बेहतरीन सुविधा होगी। जहां पर वह अपनी ट्रेन का इंतजार करेंगे। उनके मनोरंजन के लिए बड़े एलईडी स्क्रीन होंगे और एक से बढ़कर एक दुकानें होंगी। जहां पर खान पान की सामग्री मिलेगी। इस एयर कॉनकोर्स कम लाउंज में 700 यात्रियों के बैठने की जगह बनाई गई है।

स्टेशन का रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट आखिरी दौर में पहुंच गया है।

स्टेशन का रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट आखिरी दौर में पहुंच गया है।

PPP मॉडल पर तैयार हो रहा स्टेशन

हबीबगंज स्टेशन सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत तैयार किया जा रहा है। स्टेशन का रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट 31 मार्च को पूरा हो जाएगा और इसी दिन इसे राष्ट्र को समर्पित कर दिया जाएगा। ट्रेनों से आने वाले करीब 1500 यात्री एक साथ अंडरग्राउंड सब-वे से गुजर सकेंगे। स्‍टेशन में ऐसे दो सब-वे बनाए गए हैं। भीड़ के दबाव को भी कम किया जा सकेगा।

स्टेशन में एक नंबर प्लेटफार्म की तरफ से एंट्री ग्लास डोम वाले चमचमाते गेट से होगी।

स्टेशन में एक नंबर प्लेटफार्म की तरफ से एंट्री ग्लास डोम वाले चमचमाते गेट से होगी।

एक दिन में 40 हजार यात्रियों का आवागमन होगा

हबीबगंज रेलवे स्टेशन तैयार हो जाने के बाद संभावना है कि यहां पर हर रोज 40 हजार यात्रियों की आवागमन होगा। करीब 80 जोड़ा ट्रेनों को स्टॉपेज दिया जाएगा। कोविड से पहले तक यहां हर रोज 54 जोड़ा ट्रेनों का संचालन होता था और करीब 25 हजार लोगों की आवाजाही दर्ज की जा रही थी। फिलहाल 22 जोड़ा ट्रेनों का संचालन हो रहा है।

पैसेंजर सेग्रीगेसन के सिद्धांत पर बना है स्टेशन

हबीबगंज रि-डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट मैनेजर अबू आसिफ ने भास्कर को बताया कि स्टेशन को पैसेंजर सेग्रीगेसन प्रिंसिपल पर डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि यहां पर यात्रियों के आने और जाने की व्यवस्था अलग-अलग रखी गई है, जिससे स्टेशन पर भीड़ न हो और किसी को कोई परेशानी भी न आए। हबीबगंज देश का पहला स्टेशन होगा जिसका रि-डेवलपमेंट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनशिप पर किया जा रहा है।

स्टेशन तैयार होने के बाद संभावना है कि यहां हर रोज 40 हजार यात्रियों का आवागमन होगा।

स्टेशन तैयार होने के बाद संभावना है कि यहां हर रोज 40 हजार यात्रियों का आवागमन होगा।

चार बार बढ़ी है डेडलाइन

हबीबगंज स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने का काम मार्च 2017 से शुरू हुआ था। रेलवे ने दावा किया है कि यात्रियों को इस स्टेशन पर एयरपोर्ट की तर्ज पर विश्व स्तरीय सुविधाएं दी जाएंगी। इसे दिसंबर 2018 तक पूरे करने के दावे किए थे। दूसरी, डेडलाइन जुलाई 2019 थी, तब भी काम पूरा नहीं हो सका था। तीसरी, 31 दिसंबर 2019 तक काम पूरा करने का दावा किया गया, लेकिन काम तब भी पूरा नहीं हुआ। चौथी, मार्च 2020 तक काम पूरा करने की डेडलाइन दी गई, लेकिन फिर भी काम पूरा नहीं हुआ और फिर कोरोना आ गया और काम में फिर से देरी हुई।

450 करोड़ की लागत से रि-डेवलपमेंट

यह काम लगभग 450 करोड़ रुपए की लागत में किया जा रहा है। इसके तहत स्टेशन के दोबारा कंस्ट्रक्शन पर लगभग 100 करोड़ खर्च होंगे, वहीं कमर्शियल विकास पर लगभग 350 करोड़ लगेंगे। इसका काम 31 मार्च 2021 को पूरा हो जाएगा।

स्टेशन का रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट 31 मार्च को पूरा हो जाने की बात कही जा रही है।

स्टेशन का रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट 31 मार्च को पूरा हो जाने की बात कही जा रही है।

री-डेवलप के बाद यात्रियों के लिए होंगी ये सुविधाएं

  • हबीबगंज स्‍टेशन में 700 यात्री एयर कॉनकोर में बैठ सकेंगे, जब ट्रेनें आएंगी तब ये प्लेटफार्मों पर उतरेंगे।
  • ट्रेनों से आने वाले करीब 1500 यात्री एक साथ अंडरग्राउंड सब-वे से गुजर सकेंगे। स्‍टेशन में ऐसे दो सब-वे बनाए गए हैं। भीड़ के दबाव को भी कम किया जा सकेगा।
  • एक प्लेटफार्म पर एक समय पर 2000 हजार यात्री ट्रेनों का इंतजार कर सकेंगे।
  • 36 मीटर ऊंची बिल्डिंग में 2500 से अधिक यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होगी।
  • स्‍टेशन में एक ग्रीन बिल्डिंग होगी यानी इस इमारत में ऊर्जा की कम खपत करने वाली एलईडी लाइट्स लगाई जाएंगी। साथ ही इसमें वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्‍लांट भी होगा।
  • इसमें यात्रियों के बैठने के लिए एक वेटिंग लाउन्ज होगा, जिसमें मॉडर्न टॉयलेट्स होंगे। साथ ही स्‍टेशन में एक म्यूजियम और गेमिंग जोन भी होगा।



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