बहुचर्चित Honey Trap मामले में नप गयीं इंदौर जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी,सिवनी ट्रांसफर | indore – News in Hindi

बहुचर्चित Honey Trap मामले में नप गयीं इंदौर जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी,सिवनी ट्रांसफर | indore – News in Hindi


Honey Trap मामले में इंदौर जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी का ट्रांसफर सिवनी किया गया

सिवनी जिला जेल के अधीक्षक (Jail superintendent) अजमेर सिंह ठाकुर को इंदौर जिला जेल (indore central jail) का नया अधीक्षक बनाया गया है.

इंदौर.मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बहुचर्चित हनी ट्रैप (honey trap) मामले में इंदौर (indore) की जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी नप गयी हैं. उनका ट्रांसफर (transfer) सिवनी ज़िला सेंट्रल जेल कर दिया गया है. मध्यप्रदेश की संवेदनशील मानी जाने वाली इंदौर जिला जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने कुछ दिनों पहले हनी ट्रैप मामले की मास्टरमाइंड श्वेता जैन और बरखा सोनी को जेल से छोड़ने की सिफारिश की थी,ये सिफारिश उनको भारी पड़ गई.इस मामले में जेल महानिदेशक ने पहले उनके खिलाफ आरोप पत्र जारी किया और अब उनका ट्रांसफर कर दिया गया है. वहीं सिवनी जिला जेल के अधीक्षक अजमेर सिंह ठाकुर को इंदौर जिला जेल का नया अधीक्षक बनाया गया है.

ये था मामला 
देश में चल रहे कोरोना संकट के कारण जेल में कैदियों की संख्या कम करने का  फैसला राज्य सरकार ने लिया था. इसमें सज़ायाफ्ता कैदियों को 120 दिन की पैरोल दी गई थी.वहीं विचाराधीन कैदियों की अंतरिम जमानत के लिए प्रस्ताव कोर्ट को भेजे गए थे. इसी को आधार बनाते हुए इंदौर जिला जेल की अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने नौ महिने से जेल में बंद हनीट्रैप मामले की मास्टर माइंड श्वेता स्वप्निल जैन और बरखा सोनी को अंतरिम जमानत का प्रस्ताव जिला कोर्ट भेज दिया था. लेकिन जैसे ही राजधानी के अधिकारियों को ये बात पता लगी तो एकदम हलचल मच गयी. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए हालांकि जमानत के प्रस्ताव को वापस ले लिया गया और दोनो आरोपियों को जमानत नहीं मिल पाई. लेकिन इसका खामियाजा जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी को भुगतना पड़ा. पहले उन्हें चार्जशीट देकर सात दिन में जबाव मांगा गया और उसके बाद उनका ट्रांसफर सिवनी कर दिया गया.

जेल महानिरीक्षक ने दी थी सख्त हिदायत मध्यप्रदेश की सियासत में हड़कंप मचाने वाले हनीट्रैप मामले में कई उतार चढ़ाव आए. मामले को मीडिया में उछालने वाले जीतू सोनी का साम्राज्य ध्वस्त कर दिया गया. लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया मामले पर पर्दा डलता चला गया.इसी बीच हनी ट्रैप की आरोपी महिलाएं भी जमानत के लिए कोशिश करती रहीं. लेकिन कोरोना के समय जब विचाराधीन कैदियों की जमानत की बारी आई तो उसमें भी उन्होंने जोर लगा दिया. जमानत का प्रस्ताव कोर्ट तक पहुंच भी गया. लेकिन इसे एमपी में सरकार बदलने का असर ही कहेंगे कि ऊपर बैठे अधिकारियों ने मामले को पकड़ लिया और प्रस्ताव वापस करा दिया. प्रस्ताव भेजने वाली इंदौर की जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी को जेल महानिदेशक ने न सिर्फ सख्त हिदायत दी बल्कि मप्र सिविल तथा वर्गीकरण नियंत्रण व अपील नियम 1964 की धारा-14 के तहत आरोप पत्र भी जारी किया था





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