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भोपाल3 मिनट पहले
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- भोपाल की पांच से अधिक बस्तियों से झूठ बोलकर ले जाया गया लोगों को
- वैक्सीन ट्रायल के दौरान लगे टीके के कारण कई लोग हुए गंभीर बीमार
भोपाल में गैस कांड के बाद अब वैक्सीन ट्रायल कांड का मामला सामने आया है। पीपुल्स अस्पताल ने कोरोना का टीका लगाकर लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल कर दिया। उन्हें 750 रुपए देकर चलता कर दिया। इतना ही नहीं कई लोगों के बीमार होने के बाद उनसे पुराने कागजात भी वापस ले लिए। बताया जाता है कि झूठ बोलकर 600 से अधिक लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल कर दिया गया। हालांकि प्रबंधन ने इस तरह के किसी भी तरह के झूठ बोलकर ट्रायल किए जाने से मना किया था।
सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा ने बताया कि भोपाल की विदिशा रोड स्थित शंकर नगर में रहने वाले हरिसिंह घर में अकेले कमाने वाले हैं। हरिसिंह ने बताया कि 7 दिसंबर को उन्हें पीपुल्स अस्पताल ले जाया गया। उन्हें बताया कि उनकी कुछ जांच होगी। 750 रुपए भी मिलेगा। उसके बाद एक टीका लगेगा। इससे शरीर का खून साफ हो जाएगा और कई दूसरी बीमारी भी ठीक हो जाएंगे। उन्होंने एक कागज पर नाम लिखवाया और फिर टीका लगा दिया।
उन्होंने कहा था कि कोई परेशानी हो तो यहां आकर बताना। मैंने उन्हें बताया था कि पहले टाइफाइड था। उन्होंने कहा कि कुछ नहीं होगा। दूसरी बार गया तो मैंने कहा कि पीलिया हो गया। उन्होंने एक्स-रे करवाने को कहा। इसके लिए पैसे भी लिए। दूसरी जांच कराने को कहा। दूसरी जांच के लिए भी 450 रुपए मांगे। किसी ने कुछ नहीं पूछा और न ही देखा। उसके बाद उन्होंने ध्यान ही नहीं दिया। मैं मायूस होकर घर आ गया। अब पता नहीं क्या होगा।
कुछ नहीं बताया
गरीब नगर, शंकर नगर समेत करीब छह बस्तियों के 600 से अधिक लोगों को टीका लगा है। उन्हें बीमारी हो रही है। उनका कोई ध्यान नहीं दे रहा है। प्राइवेट दिखा रहे हैं। लोगों ने मजबूरी में 750 रुपए में टीका लगवाया है। लोगों को टीका के बारे में कुछ नहीं बताया। कोरोना का टीका लगाने का कहा था। किसी ने बाद में फोन नहीं किया।
बहकावे में ऐसा कह रहे होंगे
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अनिल दीक्षित ने बताया कि वैक्सीन ट्रायल में शामिल लोगों को आधे घंटे समझाया जाता है। उनकी सहमति मिलने के बाद उनसे साइन लिए जाते हैं। इसमें सभी तरह की जानकारी उन्हें दी जाती हैं। यह भी बताते हैं कि दो वैक्सीन में से एक खाली है और दूसरे में वैक्सीन होता है। उनकी मेडिकल जांच की जाती है। टीका लगने के बाद होने वाली बीमारियों के बारे में भी बताते हैं।
फिट होने पर ही उन्हें ट्रायल में शामिल किया जाता है। जहां तक अस्पताल के पास की बस्तियों में से लोगों को लेने की बात है, तो तीन किमी के दायरे को प्राथमिकता दी गई है। इसलिए यहां के लोग ज्यादा संख्या में है। जो भी आरोप लगा रहे हैं, उन्हें बहकाया में ऐसा कह रहे होंगे। फिर भी हम पूरे मामले को दिखवाते हैं।