- Hindi News
- Local
- Mp
- Ujjain
- Fetal Screening And Vaccination Could Not Be Done, 320 Pre mature Babies Born, Underweight And Weakness Also Increased By 1%.
Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप
रामसिंह चौहान | उज्जैनएक दिन पहले
- कॉपी लिंक
40 फीसदी तक बढ़े प्री-मैच्योर डिलीवरी केस (फाइल फोटो)
- काेराेना काल का एक और दु:खद पहलु- 40 फीसदी तक बढ़े प्री-मैच्योर डिलीवरी केस, अब सुधरने लगे हालात
कोरोना संक्रमण काल में गर्भ में पल रहे बच्चों का जन्म समय से पहले ही हो गया। नौ माह में होने वाली डिलीवरी सात माह में ही हो गई। इसका असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ा। बच्चे कम वजन के तथा कमजोर पैदा हुए। इसमें चरक अस्पताल में ही 320 प्री-मैच्योर बच्चों का जन्म हुआ।
प्री-मैच्योर बच्चों का प्रतिशत 25 से बढ़कर 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया। ऐसे में 1800 नवजात बच्चों को जन्म के बाद चरक अस्पताल में संचालित एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ा। इसकी बड़ी वजह कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं की प्रॉपर जांच नहीं हो पाई। उन्हें टीके नहीं लग पाए तथा विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को संतुलित व पोषण आहार नहीं मिल पाया। इसका असर उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर हुआ।
एक नजर में
कुल डिलीवरी 5297
एसएनसीयू में भर्ती बच्चे- 1800 प्री-मैच्योर बच्चे- 320 जन्म के बाद बच्चों की मौत- 290 रैफर किए गए बच्चे -90 से 110
चरक में जन्मे ऐसे 320 बच्चे
चरक अस्पताल के प्रसूति गृह में 320 प्री-मैच्योर बच्चों का जन्म हुआ। समय पूर्व जन्म लेने की वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती रखना पड़ा। संक्रमण काल में मार्च-2020 से अक्टूबर-नवंबर तक समय पूर्व जन्मे शिशु का जन्म के समय वजन 1.5 किलो ग्राम से कम पाया गया। ऐसे बच्चे शारीरिक रूप से कमजोर पाए गए। इनकी मृत्यु दर में 1 प्रतिशत की बढ़ी।
जन्म से लेकर 7 दिन के अंदर तक ही ज्यादा मौतें हुईं
शिशु रोग विशेषज्ञों ने केस स्टडी में पाया कि जन्म के पहले दिन से सात दिनों के बीच में व 600 ग्राम से डेढ़ किलो तक के वजन वाले बच्चों की ज्यादा मौतें हुई हैं। पिछले नौ माह में 290 बच्चों की मौत हुई, जो कि पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। पिछले साल-2019 में 279 बच्चों की मौत हुई थी। सामान्य नवजात शिशु का जन्म के समय वजन 2.5 किलो ग्राम से 3.5 किलो ग्राम के बीच रहता है।
ऐसे बच्चों को सामान्य व स्वस्थ्य माना जाता है। हालांकि जन्म लेने वाले शिशु कोरोना से सुरक्षित रहे। एक भी बच्चे की कोरोना के संक्रमण से मौत नहीं होना पाई गई, लेकिन कम वजन व समय से पहले जन्म होने से मौत उनकी मौत हुई। हालांकि दूसरे बच्चों के वजन में रिकवरी भी हुई। जो कि स्वस्थ्य होकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।