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खंडवा19 मिनट पहले
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- देश के नामी जूनियर, सब जूनियर व सीनियर 18 खिलाड़ियों को बीड़ की बेटी ने पछाड़ा
नर्मदा नदी पर बने इंदिरा सागर बांध के बैकवाटर में पिता का कर्ज उतारने के लिए मछली पकड़ने वाली कावेरी केनोइंग स्पर्धा में भारत की नंबर वन खिलाड़ी बन गई। उसने देश के नामी 18 खिलाड़ियों को पछाड़ दिया। जूनियर, सब जूनियर व सीनियर वर्ग के खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए वह नंबर वन खिलाड़ी बन गई। पानी में तेज गति से नाव चलाने पर कावेरी का चयन थाइलैंड के पटाया में हाेने वाले ओलंपिक क्वालिफायर व एशियन चैंपियनशिप के लिए हुआ है। मप्र वाटर स्पोर्ट्स अकादमी के केनोइंग कोच टीके बरोई ने बताया कावेरी पिता रणछोड़ ढीमर 13 साल की थी तब उसका चयन 2016 में अकादमी में हुआ था। अकादमी में दाखिले के बाद 2017 में उसने सब जूनियर स्पर्धा में गोल्ड, 2018 में जूनियर व सब जूनियर में गोल्ड व 2019 में जूनियर व सीनियर स्पर्धा में गोल्ड मैडल हासिल किया था। बेहतर प्रदर्शन के चलते गत दिनों उसने 28 से 30 दिसंबर को दिए ट्रायल में देश के नामी 18 जूनियर, सब जूनियर व सीनियर खिलाड़ियों को मात दी और मार्च में थाइलैंड के पटाया में होने वाले ओलंपिक क्वालिफायर व एशियन चैंपियनशिप के लिए चयनित हुई। मप्र वाटर स्पोर्ट्स अकादमी के अनुसार प्रदर्शन के अनुसार अभी उसकी पोजिशन देश में नंबर-1 खिलाड़ी की है।
पिता के बिछाए जाल से मछलियां बिनती थी बेटियां
पिता का 40 हजार रुपए का कर्ज उतारने के लिए बड़ी बहन मोनिका, स्वाति व कावेरी बैकवाटर में नाव चलाने लगी। पिता रात में जाल बिछाते तीनों बहनें सुबह जाकर जाल से मछली निकालती और ठेकेदार को दें आती। ऐसा रोजाना कर उन्होंने पिता का कर्ज उतारने में मदद की। छोटी सी उम्र में न सिर्फ अपने पिता के कर्ज को दूर किया, बल्कि परिवार का पालन पोषण भी किया।
भास्कर की खबर देख अफसरों ने कावेरी को दी थी ट्रेनिंग
कावेरी को स्पाेर्ट्स अकादमी तक पहुंचाने में दैनिक भास्कर की प्रमुख भूमिका रही। अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद तत्कालीन खेल अधिकारी जोसफ बक्सला कावेरी के गांव पहुंचे थे। उन्होंने पिता रणछोड़ से तीनों बहनों को भोपाल अकादमी में ट्रायल दिलाने के लिए मनाया। ट्रायल में सबसे बेहतर प्रदर्शन कावेरी का होने पर उसे 2016 में मप्र वाटर स्पोर्ट्स अकादमी में दाखिला मिल गया।
बैकवाटर में तैराकी सीखी कावेरी ने, एशिया की स्टार बनेगी कावेरी
कावेरी ने गांव में इंदिरा सागर के बेकवाटर से तैराकी सीखकर विदेशी खेल कैनोइंग में महारत हासिल कर ली है। मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली कावेरी ने 17 साल की उम्र में यह बड़ा मुकाम पाया है।